Betul News: व्यापारियों के सामने नतमस्तक मंडी और जिला प्रशासन

नहीं सुधर रही मंडी की व्यवस्था, शेड से नहीं हो रहा बोरों का उठाव
Betul News: बैतूल। कृषि उपज मंडी की अव्यवस्थाएं अब प्रशासनिक लापरवाही की पहचान बन चुकी हैं। जिला प्रशासन द्वारा बार-बार निरीक्षण, निर्देश और फटकार के बावजूद मंडी की हालत जस की तस बने हुए है। हालात यह हैं कि कृषि उपज मंडी में प्रशासन नहीं, बल्कि व्यापारी नियम तय कर रहे हैं और मंडी प्रशासन उनके सामने पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रहा है।
कृषि उपज मंडी के शेड वर्षों से व्यापारियों के कब्जे में हैं। खरीदी के बाद अनाज के बोरे कई-कई दिनों तक शेड में ही जमा कर दिए जाते हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज रखने तक की जगह नहीं मिलती। मजबूरी में किसान शेड के बाहर खुले परिसर में उपज डालने को विवश हैं। बारिश और तेज धूप में किसानों को मजबूरी में अपनी उपज बाहर डालकर परेशान होना पड़ता है, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, एसडीएम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी अनेक बार मंडी का निरीक्षण कर चुके हैं। हर बार अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई जाती है, मंडी सचिव को फटकार लगाई जाती है, लेकिन कार्रवाई फटकार से आगे नहीं बढ़ पाती। न तो किसी व्यापारी पर जुर्माना लगाया गया, न ही शेड खाली कराने के लिए सख्त कदम उठाए गए। नतीजा यह है कि निरीक्षण अब महज दिखावा बनकर रह गया है।

शेड से नहीं हो रहा बोरों का उठाव
मंडी शेड का मूल उद्देश्य किसानों को उपज रखने की सुविधा देना है, लेकिन यहां स्थिति ठीक उलट है। व्यापारी खरीदी के बाद बोरे शेड में ही छोड़ देते हैं और समय पर उठाव नहीं कराते। मंडी प्रशासन भी इस पर कोई दबाव नहीं बनाता। यही कारण है कि जैसे ही आवक बढ़ती है, पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। इन दिनों मंडी में सोयाबीन, मक्का और गेहूं की बंपर आवक हो रही है। किसानों की संख्या बढ़ने के साथ ही अव्यवस्थाएं और गंभीर हो गई हैं। शेड खाली न होने के कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार बिना तौल कराए ही वापस लौटना पड़ता है।
वर्षों से झेल रहे हैं किसान परेशानी
किसानों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। वर्षों से वे इसी अव्यवस्था से जूझ रहे हैं। बारिश के मौसम में उपज भीग जाती है, तो गर्मी में अनाज और किसान दोनों बेहाल हो जाते हैं। बावजूद इसके न तो मंडी प्रशासन सुधर रहा है और न ही जिला प्रशासन ठोस कार्रवाई कर पा रहा है। सवाल यह है कि आखिर मंडी किसके लिए है—किसानों के लिए या व्यापारियों के लिए? यदि यही हाल रहा तो कृषि उपज मंडी किसानों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि परेशानी का केंद्र बनती चली जाएगी। अब केवल निरीक्षण और चेतावनी नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई की जरूरत है, अन्यथा प्रशासन की साख पर गंभीर सवाल खड़े होते रहेंगे। इस संबंध में मंडी सचिव सुरेश परते के मोबाईल पर संपर्क किया गया पर उनसे चर्चा नहीं हो सकी।




