Politics : राजनीतिक हलचल: किस माननीय के लिए कौनसा अफसर बन रहा चुनौती?? ऐसा क्या हुआ कि पार्षद पुत्र को धर्म संकट में फंसना पड़ गया??? पीसी में मनगढंत कहानी कह कर कौनसे नेताजी बुरे फंसे???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

माननीय के लिए एक अफसर बना चुनौती
जिले के एक प्रमुख माननीय के लिए भविष्य में फिर एक अफसर चुनौती पेश कर सकता है। वर्गवाद में एक महिला अफसर को अपने क्षेत्र में पदस्थापना दिलवाने वाले माननीय को बाद में यही अफसर राजनीति मेें चुनौती देने लगी थी। इतना ही नहीं हालाकान भी कर दिया था। अब महिला अफसर के नक्शे कदम पर मरहम पट्टी और इलाज वाले विभाग के अफसर भी चलते दिख रहे हैं। माननीय की आरक्षित सीट का राजनैतिक गणित जानने-समझने में उनकी भारी रूचि है। यही वजह है कि वे गोपनीय और बारीक जानकारी भी अपने माध्यम से ले रहे हैंं। चर्चा है कि इसके साथ ही जिला मुख्यालय से करीब कहे जाने वाले आरएसएस के एक शक्ति केंद्र कहे जाने वाले आवासीय विद्यालय में घुसपैठ के लिए भी मजबूत विकल्प ढूंढ रहे हैं। उनके बारे में सभी को पता है कि वे वर्तमान में जिस तरह विभाग में लपेट रहे हैं, उसमें पैसे की कोई दिक्कत नहीं है।
धर्मसंकट में फंसा पार्षद पुत्र
शहर में पैदल और लिफ्ट लेकर चलने के लिए प्रसिद्धि पा चुके एक हष्ट पुष्ट पार्षद पुत्र पिछले दिनों गजब के धर्मसंकट में फंस गया। दरअसल पिछले दिनों एक कार्यक्रम के दौरान विपक्षी पार्टी के एक पूर्व माननीय को देखकर वह कन्नी काट रहा था। पार्षद पुत्र के यह रवैए को देखकर पूर्व माननीय ने तेज आवाज में चिल्लाकर कहा कि क्यों रे! यहां पर सबके सामने मुझ से कट रहा है, वैसे तो फोन लगाकर खूब सलाह देता है, आज भाग क्यों रहा? उनके इतना कहते ही पार्षद पुत्र घबरा गया और बिना कोई जवाब दिए, वह तेज गति से कार्यक्रम से खिसक लिया। इस दौरान कई लोग यहां पर मौजूद थे, जो अपनी हंसी नहीं रोक पाए। पार्षद पुत्र के बारे में कहा जाता है कि वह हर इवेंट में सत्ता पक्ष के नेताओं ने से जबरन चिपकते देखा जा सकता है। इसी आदत की वजह से विपक्षी पार्टी की एक नेता की पत्नी ने भी धुत्तकार कर भगा चुकी है।
पीसी में मनगढ़ंत जानकारी कह बैठे नेताजीपिछले दि
नों विपक्षी पार्टी की एक पीसी में पार्टी प्रमुख ने ऐसी बात कह डाली, जिसको लेकर सुर्खियां हो रही हैं। बिना जानकारी और तथ्य के उन्होंने सोशल मीडिया की खबरों को आधार बनाते हुए राजधानी के एक अखबार में धार्मिक स्थल तोड़ने का जिक्र किया। यही से उन्होंने हजारों वर्ष पुराना बता डाला। नेताजी की फजीहत तब हुई, जब जानकारी सामने आई है कि यह धार्मिक स्थल केवल अस्सी वर्ष पुराने हैं। यहां सजदा भी किया जाता है और पूजा भी। इसके बाद पार्टी प्रमुख बैकफुट पर दिखाई दे रहे हैं। यह समझ से परे हैं कि उन्हें यह जानकारी आखिर किस करीबी ने दी थी, जिसकी वजह से वे पीसी में रायता फैलाकर किरकिरी का केंद्र बन गए। इन पार्टी प्रमुख के बारे में कहा जाता है कि कान के कच्चे होने के कारण बिना सोचे समझे निर्णय लेते हैं। इसी वजह कई मौकों पर वे ट्रोल हो जा रहे हैं।




