Betul Samachar : भोपाल, इंदौर नहीं, बैतूल के डॉक्टर भी कई बार चुके विदेश यात्रा
Betul News: Not just Bhopal and Indore, doctors from Betul have also travelled abroad several times.

दवा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच गहरा गठजोड़ उजागर, मरीज इनके सामने असहाय
Betul Samachar : बैतूल। अब तक बड़े शहरों के डॉक्टरों पर ही दवा कंपनियों से गठजोड़ के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन यह खेल छोटे जिलों तक पहुंचे चुका है। सूत्र बताते हैं कि बैतूल जिले के कई नामचीन डॉक्टरों के नाम भी ऐसे मामलों में सामने आए हैं, जिन्होंने दवा कंपनियों के खर्चे पर विदेश यात्राएं की हैं। बताया जा रहा है कि कुछ नामी डॉक्टरों को कंपनियों ने महंगे कॉन्फ्रेंस और सेमिनार के नाम पर दुबई, सिंगापुर, थाईलैंड जैसे देशों की यात्राएं करवाईं। हालांकि यह मामला कभी उजागर नहीं हुआ, लेकिन सांझवीर की पड़ताल में जानकारी सामने आई है कि कई दवाई कम्पनियां अपनी दवाइयां बेचने के एवज में डॉक्टरों के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाने सहित महंगे गिफ्ट और विदेश यात्रा का लालच डॉक्टरों को देते हैं और दे भी रहे हैं। ऐसे में मरीजों को महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है तो वहीं दवाई कब मरीज के लिए जानलेवा बन जाये इसका कोई भरोसा नहीं है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में दर्जनों ऐसे डॉक्टर हैं, जो कम्पनियों के ऑफर पर सपरिवार विदेश में एन्जॉय कर चुके हैं। इन यात्राओं के बदले में डॉक्टरों को उन्हीं कंपनियों की दवाइयों को प्राथमिकता से मरीजों को लिखने का अनकहा दबाव होता है। इसके चलते कई बार महंगी और अनावश्यक दवाइयां मरीजों को दी जाती हैं, इससे आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ता है। वहीं, कंपनियों को करोड़ों का मुनाफा होता है। सूत्रों के मुताबिक यह पूरा खेल प्रमोशन पॉलिसी के नाम पर चलता है, जिसमें होटल ठहराव, एयर टिकट और गिफ्ट तक शामिल होते हैं। सूत्र बताते हैं कि दवाई बनाने वाली गोल्डलाइन, केनोविष्टा, एवं एक्सेस ऐसी बड़ी कम्पनी हैं जो इस तरह का सीधा ऑफर डॉक्टरों को देती हैं । एक निश्चित स्टॉक डॉक्टरों को दिया जाता है। स्वाभाविक सी बात है कि डॉक्टर की लिखी हुई दवाई को मरीज के परिजन किसी भी स्तिथि में काउंटर नहीं कर सकते। मरीजों की इसी मजबूरी का फायदा कम्पनी सहित डॉक्टर भी उठाते हैं और बदले में विदेश यात्रा का आनंद उठाते हैं।
1 लाख की दवाई बेचने पर 35 हजार रुपए का सीधा फायदा
डॉक्टरों और दवा कंपनियों के बीच बने गठजोड़ की कहानी लाखो रुपयों के कमीशन की पोल खोल रही है। अंदरखाने से मिली खभर के मुताबिक दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को तगड़े कमीशन का सीधा ऑफर दिया जाता है। यदि डॉक्टर एक लाख रुपए की दवाई ठिकाने लगा देता है तो कम्पनी सीधे-सीधे 35 हजार रुपए कमीशन डॉक्टर को देती है यानी 35 प्रतिशत का कमीशन फिक्स है। सूत्र बताते हैं कि दवाई बेचने के लिए कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोर्स पर यह दवाइयां रखवा दी जाती हैं। और कमीशन का कुछ हिस्सा मेडिकल स्टोर्स संचालकों को भी दे दिया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के नियमों के तहत किसी भी डॉक्टर को दवा कंपनियों से किसी प्रकार का लाभ या उपहार लेना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यह प्रथा जारी है। कई बार कंपनियां इसे वैज्ञानिक सम्मेलन या मेडिकल अपडेट मीट के रूप में दर्शाकर कानूनी दायरे से बचने की कोशिश करती हैं।
नियम तगड़े फिर भी डॉक्टरों को कोई डर नहीं
यदि कोई डॉक्टर फार्मा कम्पनी से इस तरह का गठजोड़ करता है तो प्रोफेशनल कंडक्ट 2002 की धारा 6,8 के तहत राज्य मेडिकल काउंसिल उनका पंजीयन निलंबित या रद्द कर सकती है। इसी तरह फार्मा कम्पनी पर यू सी पी एम पी 2024 के तहत कार्यवाही के चलते कम्पनी का लाइसेंस निलंबित हो सकता है। यह मामला न केवल चिकित्सा जगत की नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी भी उजागर करता है। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में यह प्रवृत्ति और गहरी जड़ें जमा सकती है। प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि ऐसे डॉक्टरों और कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर मिसाल पेश की जाए।
इनका कहना…
इस तरह के यदि कोई मामले सामने आते है तो इसकी शिकायत सीएमएचओ कार्यालय और राज्य मेडिकल काउंसिल में की जा सकती है। यदि शिकायत मिलेगी तो निश्चित रूप से इसकी जांच कर कार्यवाही की जाएगी।
डॉ मनोज हुरमाड़े, सीएमएचओ , जिला बैतूल




