Betul Ki Khabar : Video: काजली और मेंढाखेड़ा के ग्रामीणों ने 200 हेक्टेयर वनभूमि पर जमाया अवैध कब्जा

रामपुर भतोड़ी परियोजना के जंगलों पर दो गांव वालों का कब्जा
Betul Ki Khabar : चिचोली। वन संपदा को सुरक्षित रखने और जंगलों के विस्तार के उद्देश्य से स्थापित रामपुर भतोड़ी परियोजना बैतूल जिले के जंगलों के लिए संकट बनती जा रही है। परियोजना के संचालन में लापरवाही, भ्रष्टाचार और विभागीय अमले की कमी के चलते यहां अवैध कटाई और अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि चूना हजूरी द्वितीय रेंज के कंपार्टमेंट नंबर 221 और 218 में काजली और मेंढाखेड़ा गांव के ग्रामीणों ने लगभग 200 हेक्टेयर वनभूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है।
चार वर्ष पूर्व इन दोनों कंपार्टमेंट में कूप कटाई के बाद लाखों रुपए की लागत से पौधारोपण किया गया था। इसका उद्देश्य क्षेत्र में घना जंगल विकसित करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति पूरी तरह उलट है। अतिक्रमणकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से पौधारोपण को नुकसान पहुंचाकर खेत तैयार कर लिए हैं। बरसात के दौरान मक्का की फसल लहलहाती दिखाई दी और अब रबी सीजन में गेहूं व चना की बुवाई भी पूरी तरह शुरू हो चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और फील्ड स्टाफ मौके से नदारद रहते हैं, जिसके कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। दो वर्षों से लगातार हो रहे इस अतिक्रमण पर विभाग की ओर से केवल खानापूर्ति जैसी कार्रवाई की गई है।
जंगल का ज्यादातर हिस्से को नुकसान
बताया जाता है कि कुछ हेक्टेयर में पीओआर कर दिखावा किया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश जमीन अब भी ग्रामीणों के कब्जे में है और वहां खेती निरंतर जारी है। परियोजना के सामान्य जंगलों को रामपुर भतोड़ी योजना में शामिल तो कर लिया गया, लेकिन संरक्षण के नाम पर व्यवहारिक काम नहीं हुआ। हालात इतने भयावह हैं कि जंगल के कई हिस्से पूरी तरह साफ कर दिए गए हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो आसपास के अन्य कंपार्टमेंट में भी अवैध कब्जा फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।
वन संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर अतिक्रमण पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र का वन पूरी तरह खत्म हो सकता है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि लाखों रुपए से किए गए पौधारोपण और बची हुई वन संपदा को संरक्षित किया जा सके। रामपुर भतोड़ी परियोजना के वन लगातार सिमट रहे हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अतिक्रमण पर रोक लगती नहीं दिख रही है।




