Betul Cyber Fraud: जनधन खाते से 9.84 करोड़ की साइबर ठगी का पर्दाफाश

गैंग ने मृत व्यक्ति के बैंक खाते का किया इस्तेमाल, तीन आरोपी गिरफ्तार, बैंक कर्मचारी भी गिरफ्तार
Betul Cyber Fraud: बैतूल। जिले में अब साइबर ठगी की घटनाएं भी बढ़ने लगी है। पुलिस ने 9.84 करोड़ एक बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश किया है। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गैंग ने एक मृत व्यक्ति के खाते का इस्तेमाल किया है। इस अपराध में बैंक का एक कर्मचारी भी लिप्त पाया गया। गुरुवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित पत्रकारा वार्ता में एसपी वीरेंद्र जैन ने एक बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश किया है। इस दौरान एएसपी कमला जोशी, एसडीओपी सुनील लाटा, कोतवाली थाना प्रभारी नीरज पाल प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
एसपी ने बताया कि खेड़ीसांवलीगढ़ निवासी बिसराम इवने उम्र 40 वर्ष जो मजदूरी का काम करता है। बिसराम ने एसपी कार्यालय पहुंचकर बताया कि उसके जनधन खाते में 2 करोड़ रुपए का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इसकी जानकारी तब लगी जब वह केवायसी करने के लिए बैंक पहुंचा। शिकायत पर मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि जून 2025 से लेकर अब तक खाते से 1.5 करोड़ रुपए का अवैध ट्रांजेक्शन किया गया।
सात खातों से करोड़ों का लेनदेन
पुलिस जांच में पाया गया कि महाराष्ट्र बैंक शाखा खेड़ीसांवलीगढ़ से सात बैंक खातों से करोड़ों का ट्रांजेक्शन हुआ है और इसकी जानकारी खातेधारकों को भी नहीं थी। साइबर ठगों ने अलग-अलग व्यक्तियों के बैंक खातों को निशाना बनाते हुए 9करोड़ 84 लाख 95 हजार 212 रुपए की हेराफेरी हुई है। इन खातेधारकों में बिसराम इवने, नर्मदा इवने, मुकेश इवने, नितेश उईके, राजेश बर्डे, अमोल और चंदन के नाम शामिल है।
मृत व्यक्ति के खाते का इस्तेमाल
एसपी ने साइबर ठगी के खुलासे में बताया कि साइबर ठगों ने मृत व्यक्ति राजेश बर्डे के खाते का भी इस्तेमाल किया है। चौंकाने वाली बात सामने आई है कि मृत व्यक्ति के इस खाते का सक्रियता से उपयोग किया गया, जैसे कि किसी जिंदा व्यक्ति द्वारा खाते में लेने-देन किया जाता है। साइबर गिरोह ने इस खातेधारक के मोबाइल नंबर को बदल दिया गया। एटीएम कार्ड जारी किया और इंटरनेट बैंकिंग का सहारा लिया गया। मोबाइल नंबर बदलने के कारण ओटीपी भी आरोपियों के पास ही पहुंचता था। मृत व्यक्ति के खाते से बड़ी रकम लेनदेन किए जाने का खुलासा हुआ है।
बैंक में कार्यरत निजी कर्मचारी की मिलीभगत
पुलिस जांच में पाया गया कि इस साइबर ठगी में महाराष्ट्र बैंक शाखा में कार्यरत एक निजी कर्मचारी भी इस साइबर ठगी में संलिप्त होना पाया गया। इसे पुलिस मु य सहयोगी मान रही है। जिसकी सहायता से साइबर गिरोह के हाथ बैंक शाखा के खातेधारकों की गोपनीय जानकारी पहुंचाई गई। जिसके जरिए साइबर ठगों ने बड़ी ठगी को अंजाम दिया। इन साइबर ठगों ने ग्राहकों के दस्तावेज, ग्राहकों के खातों में फर्जी मोबाइल नंबर लिंक, एटीएम कार्ड जारी करना, पासबुक और चेकबुक का अनाधिकृत उपयोग करना पाया गया।
बैंक की संवेदनशील जानकारी जिले के बाहर बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाई है। पुलिस ने बताया कि खाते की पूरी किट इंदौर भेजी जाती थी। गिरोह प्रत्येक लक्षित खाते की एक किट तैयार करता था जिसमें लिंक की गई सिम, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक शामिल रहती थी। यह किट बस के माध्यम से इंदौर भेजी जा रही थी। जहां से बाहरी फ्राडिस्टर बड़े ट्रांजेक्शन को अंजाम देते थे।
इंदौर में छापामार कार्रवाई तीन गिर तार
जांच के बाद पता चला कि साइबर ठगी का काम इंदौर से हो रहा है। पुलिस ने इंदौर में दो ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसमें राजा उर्फ आयुष चौहान 28 वर्ष निवासी खेड़ीसांवलीगढ़, अंकित राजपूत उम्र &2 वर्ष निवासी इंदौर, नरेंद्र सिंह राजपूत 24 वर्ष निवासी इंदौर को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 15 मोबाइल फोन, 25 सिम कार्ड, 21 एटीएम कार्ड, 28 हजार नगद, 11 बैंक पासबुक, 7 चेकबुक, 2 ओपीएस मशीन, 69 एमटीएम जमा रशीद, 48 हजार की जमा पर्ची, 2 लेपटॉप, 1 फाइबर राउटर, 4 रजिस्टर और डायरी जब्त किया है।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस बड़ी साइबर ठगी का खुलासा करने में साइबर सेल बैतूल, कोतवाली टीआई नीरज पाल, एसआई अश्विनी चौधरी, एसआई नवीन सोनकर, राजेश धाड़से, बलराम राजपूत, दीपेंद्र सिंह, पंकज नरवरिया, सचिन हनवते की महत्पूर्ण भूमिका रही।




