Betul News: मैडम गई, साहब आए, फिर भी नहीं सुधरे छात्रावासों के हालात

जिला मुख्यालय के छात्रावासों में निकल रही इल्लियां तो दूरस्थ अंचलों का अंदाजा लगाना मुश्किल

Betul News: बैतूल। सोमवार को जब शासकीय कार्यालय खुले भी नहीं थे, तब कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर आदिवासी कन्या परिसर की एक सैकड़ा छात्राओं को इल्लियांयुक्त भोजन करने के विरोध में डटे रहना पड़ा। भले ही अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच के निर्देश दे दिए हो। यह भी हो सकता है कि व्यवस्थाओं में सुधार आ जाएंगा, लेकिन कितने दिनों तक? यह सवाल सभी के जहन में कौंध रहा है। दरअसल लंबी पारी खेलने वाली सहायक आयुक्त शिल्पा जैन की जिले से रवानगी के बाद उम्मीद की जा रही थी कि नए साहब विवेक पांडे व्यवस्थाओं को पटरी ला लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और व्यवस्थाएं बेपटरी होते जा रही है। चौकाने वाली बात यह है कि जब जिला मुख्यालय के छात्रावासों में घटिया और इल्लियां युक्त भोजन परोसा जा रहा है तो ग्रामीण अंचलों के छात्रावासों में क्या हालात होंगे? सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि छात्रावासों में विशेष वर्ग के छात्र-छात्राओं को अच्छी सुविधाएं दिलाने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग फंड में कोई कमी नहीं आने देता। वर्ष 2021 में जब पूरे देश में कोविड ने दस्तक दी थी तब सरकार की वित्तीय हालत चरमराने पर सभी विभागों के फंड में कटौती की गई। इतना ही नहीं प्रदेश की लाड़ली बहना योजना को लागू करने के लिए भी सरकार ने दूसरे विभागों में कैची चलाई, लेकिन छात्र-छात्राओं से जुड़े विभाग में कभी बजट की कमी नहीं आई। मांग के अनुसार छात्रावासों के लिए बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार की बजाए लगातार हालात बिगड़ रहे हैं।

मनमाना बजट, फिर भी घटिया खाना

छात्रावासों में लंबे समय से जमे अधीक्षक आदिम जाति विभाग से मनमाना बजट ले रहे हैं। इस बजट मेें छात्राओं को गुणवत्तायुक्त भोजन, रूकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद छात्रावासों में हालात किसी से छिपे नहीं है। यदि छात्रावासों के हालातों पर नजर दौड़ाएं तो बीते दो वर्षों में ही व्यवस्थाओं को लेकर खुद छात्र-छात्राओं को अपने हक के लिए मोर्चो खोलना पड़ रहा है। कुछ दिनों पूर्व एकलव्य आवासीय छात्रावास शाहपुर के छात्र-छात्राओं ने घटिया भोजन मिलने पर बैतूल तक पैदल मार्च निकालने का एलान किया तो अधिकारियों की सांस फूल गई।

जबकि आवासीय एकलव्य विद्यालय में करोड़ों का बजट हर वर्ष मिलता है। इसके बावजूद घटिया भोजन देना आम बात हो गई। भीमपुर , भैंसदेही जैसे आदिवासी अंचलों में भी विद्यार्थियों ने इसी तरह छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर मोर्चा खोल चुके हैं। अब जिला मुख्यालय के कन्या परिसर स्थित छात्रावास में इल्लियांयुक्त भोजन दिए जाने के बाद छात्राओं को सुबह-सुबह खुद कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर पहुंचकर प्रदर्शन करना पड़ा।

बड़ा सवाल: क्यों नहीं सुधर रहे हालात?

चौकाने वाली बात यह है कि बैतूल-हरदा-हरसूद संसदीय क्षेत्र आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। जिले की पांच विधानसभा में से दो सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। तीनों जनप्रतिनिधि इसी वर्ग का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार लाने के कोई सार्थक प्रयास नहीं किए गए हैं। पूर्व सहायक आयुक्त की अगुवाई में छात्रावासों के हालात बदत्तर हो गए थे। उन्हें 6 वर्ष तक जिले में रहने के बाद रूखसत होना पड़ा। नए सहायक आयुक्त विवेक पांडे दूरस्थ अंचलों के छात्रावासों की ओर रूख कर यहां के छात्रावासों की नब्ज टटोलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और छात्रावासों की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ते जा रही है। इस संबंध में सहायक आयुक्त विवेक पांडे

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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