Betul News: नेहरू पार्क की दुर्दशा उजागर, बच्चों की ट्रेन बनी कबाड़
Betul News: Nehru Park's plight exposed, children's train turned into junk

बाल दिवस मनाने पार्क पहुंचे बच्चों के चेहरों पर दिखी मायूस
Betul News: बैतूल। शुक्रवार को बाल दिवस के अवसर पर जब शहर के सैकड़ों बच्चे उत्साह और उमंग के साथ नेहरू पार्क पहुंचे, तो वहाँ का बदहाल नज़ारा देखकर उनके चेहरों पर मायूसी छा गई। पार्क की वह बच्चों की पसंदीदा ट्रेन, जो वर्षों से आकर्षण का केंद्र रही थी, अब पूरी तरह कबाड़ में तब्दील हो चुकी है। बच्चे उम्मीद कर रहे थे कि वे ट्रेन की सवारी करेंगे, घूमेंगे और बाल दिवस का आनंद उठाएँगे, लेकिन ट्रेन बंद पड़ी देखकर उनकी खुशी निराशा में बदल गई।
नेहरू पार्क कभी बच्चों और परिवारों के लिए शहर का सबसे खूबसूरत मनोरंजन स्थल था, लेकिन अब इसकी हालत दिन-प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। पार्क में न केवल ट्रेन खराब हो चुकी है, बल्कि उसकी पटरियाँ भी कई स्थानों से उखड़ गई हैं, जिससे ट्रेन संचालन पूरी तरह असंभव हो गया है।

देख-रेख के अभाव में पार्क हुआ बदहाल
पार्क की मौजूदा स्थिति देख ऐसा लगता है कि वर्षों से इसकी देखभाल पर ध्यान ही नहीं दिया गया है। हरियाली, जो कभी पार्क की पहचान थी, आज लगभग गायब हो चुकी है। जगह-जगह घास उखड़ी हुई है, पेड़-पौधों की कटिंग नहीं होती, और सूखे पत्तों का ढेर साफ-सफाई की लचर व्यवस्था की ओर इशारा करता है। पार्क में लगे फव्वारे भी लंबे समय से बंद पड़े हैं। ये फव्वारे कभी पार्क की खूबसूरती में चार चांद लगा देते थे, लेकिन अब जंग लगे पाइप और टूटी टाइलें उनके बंद पड़े होने की कहानी खुद बयां करती हैं। बच्चे इस दृश्य को देखकर और भी निराश हो गए, क्योंकि बाल दिवस जैसे खास मौके पर भी पार्क में कोई तैयारी नहीं की गई थी।
झूले भी टूटे-फूटे, बच्चों का उत्साह ठंडा
पार्क में लगे झूले भी अब उपयोग योग्य नहीं बचे हैं। कई झूले टूट चुके हैं, तो कुछ पर जंग लग चुका है। बाल दिवस पर पहुंचे बच्चों को झूलों का आनंद तक नहीं मिला। कई बच्चे मायूस होकर माता-पिता से सवाल करते दिखे कि पार्क की यह हालत क्यों हो गई है? स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका ने नेहरू पार्क की व्यवस्था को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। वर्षों से पार्क के रख-रखाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यही वजह है कि कभी रौनक से भरा यह पार्क अब वीरान और असुरक्षित महसूस होता है।
लोगों ने करना बंद किया पार्क का रुख
कुछ साल पहले इस पार्क में सुबह-शाम लोगों की भीड़ रहती थी। बच्चे खेलते थे, बुजुर्ग टहलते थे और परिवार पिकनिक मनाने आते थे। लेकिन अब लोग यहाँ आना भी पसंद नहीं करते। बदहाल झूले, बंद फव्वारे, उखड़ी पटरियाँ और टूटी-फूटी ट्रेन पार्क की उपेक्षा की दर्दनाक कहानी बयां करते हैं।
बाल दिवस जैसा उत्सव, जो बच्चों के लिए आनंद का अवसर होता है, वह भी पार्क की जर्जर स्थिति के कारण फीका पड़ गया। बच्चों के चेहरे पर खुशी की जगह उदासी देखने को मिली। स्थानीय नागरिकों व अभिभावकों ने नगर पालिका से मांग की है कि नेहरू पार्क का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार किया जाए, ताकि यह फिर से बच्चों के लिए मनोरंजन का केंद्र बन सके और शहर की पहचान को वापस पाया जा सके।




