Betul Ki Khabar : आरसीए टेंडर के नाम ठेकेदारों के लाखों हजम!
Betul Ki Khabar: Lakhs of rupees of contractors embezzled in the name of RCA tender!

पहला ठेका निरस्त, अब दोबारा जारी हुई प्रक्रिया से बढ़े सवाल
Betul Ki Khabar : बैतूल। बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। चाहे वह किसानों से नियम विरुद्ध वसूली हो या फिर उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले भारी भरकम बिलों के मामले हो। ताजा मामला कम्पनी के ठेकेदारों से जुड़ा बताया जा रहा है कि जिले में आरसीए (रूरल कंस्ट्रक्शन एग्रीमेंट) के नाम पर जिले के दर्जनों ठेकेदारों से लाखों की वसूली की गई और अचानक टेंडर की प्रक्रिया निरस्त कर दी गई।
प्रदेश के मध्य क्षेत्र में आने वाले सैकड़ों ठेकेदारों ने टेंडर को लेकर जो शुल्क जमा किया था, उसकी लाखों की राशि सरकार की तिजोरी में पहुंच गई। मजे की बात यह है कि यह राशि ठेकेदारों को वापस लौटाने या समायोजित किए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। ऐसे में यह साफ है कि आरसीए टेंडर में ठेकेदारों द्वारा जमा किया गया लाखों का शुल्क हजम हो चुका है। जानकारी मिली है कि अब दोबारा से प्रक्रिया शुरू की जा रही है और ठेकेदारों को फिर उतना ही शुल्क दोबारा जमा करना पड़ेगा। इससे ठेकेदारों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिजली कंपनी ने कुछ महीने पहले आरसीए टेंडर जारी किए थे, जिसमें प्रदेश के अलग अलग कैटेगिरी में आने वाले करीब 700 ठेकेदारों ने हिस्सा लिया था। बैतूल जिले से भी करीब 50 से 60 ठेकेदारों ने आवेदन कर ईएमडी और दस्तावेज शुल्क के रूप में प्रति ठेकेदार 13 हजार 500 रुपए शुल्क जमा किया था। इसका हिसाब लगाया जाए तो टेंडर के नाम पर ही सरकार के खाते में 8 लाख 10 हजार और पूरे मध्य क्षेत्र के ठेकेदारों से करीब 94 लाख रुपए जमा कराए गए थे। ठेकेदारों को उम्मीद थी कि शीघ्र ही आरसीए टेंडर के माध्यम से साल भर के लिए काम आवंटित हो जाएंगे, लेकिन अचानक यह टेंडर निरस्त कर दिया गया।
अब पुन: वहीं प्रक्रिया दोहराई जा रही है, जिससे ठेकेदारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि कंपनी ने पहले से जमा की गई राशि अब तक वापस नहीं की है, जबकि नया टेंडर जारी कर फिर से राशि जमा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे साफ है कि कंपनी की नीति पारदर्शी नहीं है और इससे छोटे ठेकेदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
क्या हैं आरसीए टेंडर के मायने, साल भर मिलता है काम
सूत्र बताते हैं कि बिजली कम्पनी में आरसीए टेंडर ठेकेदारों के लिए काम हासिल करने का एक सुगम रास्ता माना जाता है। इस टेंडर में ए कैटेगिरी से लेकर ए-5 कैटेगिरी के ठेकेदार शामिल किए जाते हैं। टेंडर के माध्यम से कैटेगिरी अनुसार सभी छोटे बड़े $काम ठेकेदारों द्वारा किया जाता है। इसके लिए अलग से टेंडर किए जाने की आवश्यकता नहीं होती ,लेकिन अचानक पूरी प्रक्रिया होने के बाद जहां ठेकेदार अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं तो वहीं अधिकारियों में भी असमंजस की स्तिथि नजर आ रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि टेंडर निकालना और निरस्त उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता यह पूरी प्रक्रिया शासन स्तर पर लॉगिन पोर्टल के माध्यम से की जाती है।
राशि मिलने की उम्मीद करना बेइमानी
बताया जाता है कि यदि टेंडर रद्द किए तो शुल्क की राशि कम्पनी के नहीं बल्कि सरकार के खाते में जमा की जाती है और इस राशि की वापसी अदायगी का कोई प्रावधान नहीं है। यदि ऐसा है तो ठेकेदारों को उनके द्वारा जमा की गई राशि वापस मिल पाएगी, इसकी उम्मीद करना भी बेमानी होगी। इस पूरी प्रक्रिया ने न केवल ठेकेदारों के बीच असंतोष फैला दिया है, बल्कि कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि बिजली कंपनी पारदर्शिता अपनाते हुए ठेकेदारों को न्याय दिलाती है या यह मामला यूं ही फाइलों में दबा रह जाएगा।
इनका कहना….
पूर्व में की गई आरसीए टेंडर प्रक्रिया निरस्त हो चुकी थी। दोबारा टेंडर प्रक्रिया की गई है। शुल्क की राशि सरकार के खाते में जमा होती है, शुल्क की वापसी या समायोजन का कोई प्रावधान नहीं है।
डीएस बघेल, अधीक्षण यंत्री, मप्रमक्षेविविकं, बैतूल




