Betul News: समर्थन मूल्य खरीदी में बड़ा सिंडिकेट सक्रिय, सत्यापन में ज्वार के 449 फर्जी पंजीयन निरस्त
Betul News: A large syndicate is active in the purchase of support price, 449 fake registrations of jowar were canceled during verification.

अन्य ब्लाकों में तहसीलदार कर रहे सत्यापन
Betul News: बैतूल। जिले में समर्थन मूल्य खरीदी को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। भावांतर योजना के तहत ज्वार की फसल के पंजीयन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान कुल 449 फर्जी पंजीयन सामने आए, जिन्हें प्रशासन द्वारा निरस्त कर दिया गया है। हालांकि अधिकारी इसे रूटीन प्रक्रिया बता रहे हैं।
यह खुलासा यह साबित करता है कि जिले में समर्थन मूल्य खरीदी के नाम पर बकायदा एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो समय समय पर शासन की किसान हितैषी योजनाओं का पूरा और संगठित तरीके से दुरुपयोग कर लाखों रुपए के वारे-न्यारे कर रहा है। ऐसे में प्रशासन को सिंडिकेट की तह तक जाने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय मे किसानों के हित पर डाका डालने वालों को सबक मिल सके।

चार ब्लाकों में 449 फर्जी पंजीयन पकड़ाए
प्राप्त जानकारी के अनुसार आठनेर, चिचोली, पट्टन और बैतूल क्षेत्र में यह फर्जीवाड़ा पाया गया। यहां सहकारी समितियों द्वारा पंजीयन प्रक्रिया में मिलीभगत कर ज्वार के नाम पर पंजीयन करवाए गए थे। चारों ब्लाकों में जब तहसीलदारों ने जांच की तो आठनेर ब्लॉक में 100, पट्टन में 136, चिचोली में 84 और बैतूल ब्लाक में 139 पंजीयन फर्जी पाए गए। इन पंजीयनों के जरिए फर्जी तरीके से शासन से अनुदान और भावांतर राशि का लाभ उठाने की पूरी तैयारी की गई थी। जांच में जब यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ तो हड़कंप मचा हुआ है।
पुराने रिकार्ड खंगाले तो बड़ा फर्जीवाड़ा आ सकता है सामने
मामला सामने आने के बाद हालांकि अब इन पंजीयनों को निरस्त कर दिया गया है, लेकिन इससे यह सवाल जरूर उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कैसे संभव हुआ क्या आंखे बंद कर पंजीयन किए जा रहे हैं ? बिना किसी उच्च स्तरीय संरक्षण के यह कार्यवाही अंजाम देना कहीं से कहीं तक सम्भव नहीं लगता है। जानकारों का मानना है कि यह कोई एक-दो व्यक्ति का खेल नहीं बल्कि पूरे तंत्र की मिलीभगत से चल रहा गड़बड़झाला हो सकता है।
शासन स्तर पर समर्थन मूल्य की खरीदी लम्बे समय से चली आ रही है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज की सही कीमत प्रदान करना है, लेकिन इसका फायदा अधिकारियों- कर्मचारियों की अनदेखी के चलते व्यापारी और बिचौलिए उठा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पुराने रिकार्डों की यदि जांच कराई जाए तो एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश होना भी तय माना जा रहा है। अब प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वह केवल निरस्तीकरण तक सीमित न रहे, बल्कि इस सिंडिकेट की जड़ तक पहुंचकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे। तभी किसानों के विश्वास को बहाल किया जा सकेगा और समर्थन मूल्य योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।
इनका कहना..
समर्थन मूल्य खरीदी को लेकर सभी ब्लाकों में तहसीलदार सत्यापन कर रहे हैं। सत्यापन में जिन कृषि भूमि पर ज्वार होना नहीं पाया गया उन्हें निरस्त किया जा रहा है।
केके टेकाम, जिला आपूर्ति अधिकारी, बैतूल




