Betul Samachar: जीवनधारा वाहनों में स्वच्छता की भारी अनदेखी: लोगों का स्वास्थ्य दांव पर
वाटर डिस्पेंसर के पास काई और कचरे का जमाव, अंदर की स्थिति भयावह होने की आशंका

Betul Samachar: बैतूल। शहर में नपा के माध्यम से पेयजल आपूर्ति के लिए चलाई जा रही जीवनधारा योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिकों द्वारा जारी तस्वीरों में जीवनधारा वाहनों के वाटर डिस्पेंसर क्षेत्र में भारी गंदगी, काई और कचरे का जमाव देखा गया है। ऐसे में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घूम-घूमकर पेयजल पहुंचाने वाले इन वाहनों की सफाई व्यवस्था बेहद लचर है। नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि डिस्पेंसर के बाहरी हिस्से इतने गंदे हैं, तो टंकी के अंदर की हालत और भी भयावह हो सकती है। गणेश चौक स्थित फिल्टर प्लांट से इन वाहनों को पानी भरकर भेजा जाता है, परंतु न तो पानी की नियमित जांच होती है, न ही वाहनों की साफ-सफाई।
दूषित पानी से गंभीर स्वास्थ्य खतरे
विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी के सेवन से टाइफाइड, हैजा, पेचिश, दस्त, उल्टी, त्वचा संक्रमण, और यहां तक कि जानलेवा बीमारियां फैल सकती हैं। यह बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को विशेष रूप से प्रभावित करता है। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन शारीरिक दुर्बलता और कुपोषण का कारण बन सकता है।
नपा की निष्क्रियता से जनता में रोष
करीब 5 वर्षों से नपा द्वारा संचालित जीवनधारा परियोजना पर जनता ने पहले भी कई बार सवाल उठाए हैं, लेकिन नियमित सफाई और गुणवत्ता जांच की कोई ठोस व्यवस्था अब तक नहीं की गई है। ना तो प्लांट पर पानी की शुद्धता की जांच की जाती है, न ही वाहनों की स्थिति पर कोई निगरानी रखी जाती है।
जरूरत है कठोर कदमों की
स्वास्थ्य की दृष्टि से यह एक आपात स्थिति है। नागरिकों की मांग है कि –
- 1. सभी जीवनधारा वाहनों की नियमित सफाई अनिवार्य की जाए।
- 2. पानी की गुणवत्ता की जांच हर सप्ताह हो और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- 3. वाटर डिस्पेंसर एवं टंकियों की स्वच्छता सुनिश्चित की जाए।
- 4. दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।




