Betul News: सत्यापन में फंसे हजारों राशन कार्ड धारी, नहीं मिलेगा सस्ता राशन
Betul News: Thousands of ration card holders stuck in verification, will not get cheap ration

पीडीएस के 3072 राशन कार्डधारी संदिग्ध, जीएसटी कारोबारी भी गरीबों की सूची में
Betul News: (सत्येंद्र सिंह परिहार) बैतूल। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों और जरूरतमंदों को मिलने वाले राशन पर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। केंद्र सरकार की पहल पर राज्य स्तर पर हाल ही में कराए गए ई-केवाईसी अभियान के बाद बैतूल जिले की 20 जनपद पंचायत और नगर पालिका, परिषद क्षेत्र में कुल 3072 राशन कार्डधारी संदिग्ध पाए गए हैं। इन संदिग्धों में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो जीएसटी रजिस्टर्ड व्यापारी हैं और जिनकी आर्थिक स्थिति गरीब परिवारों जैसी बिल्कुल भी नहीं है वे भी गरीब बनकर शासन की योजनाओं का लाभ ले रहे थे। यह स्थिति शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचने में बड़ी बाधा साबित हो रही लिहाजा खाद्य विभाग ने चुनचुनकर सत्यापन शुरू किया औऱ पूरी पारदर्शिता के साथ कार्यवाही कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
खाद्य विभाग द्वारा प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जिले के 20 जनपद पंचायतों और नगरीय निकायों में विशेष सत्यापन अभियान चलाया गया। इस दौरान अधिकारियों ने संदिग्ध कार्डधारियों की जांच की और आय, व्यवसाय एवं अन्य आधारभूत दस्तावेजों का मिलान किया। जांच में सामने आया कि ऐसे हजारों कार्डधारी गरीबी रेखा में शामिल हैं, जिनकी वार्षिक आय 6 लाख रुपए से अधिक है। गरीबी रेखा का लाभ लेने वालों में वे कारोबारी भी शामिल थे जो बकायदा अपने करोबार को लेकर जीएसटी टैक्स पेयर भी थे। जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य अधिकारियों की जांच में 29 कारोबारी सामने आए इनमे से 16 कारोबारियों के खिलाफ कार्यवाही अनुशंसित की गई है।
इसी तरह कुछ राशन कार्ड ऐसे भी थे, जिनमें 100 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सदस्यों के भी नाम जुड़े हुए थे। ऐसे 83 राशन कार्डों से नाम हटाए जाने की कार्यवाही की जा रही है। इस तरह से जिले में कुल 3072 राशन कार्ड धारी सन्दिग्ध पाए गए हैं। जिनमें से 1800 राशन कार्ड धरियों पर कार्यवाही होना तय माना जा रहा है। अब इन्हें ना ही पीडीएस के तहत गरीबों का राशन मिलेगा और न ही वे किसी अन्य शासकीय योजना का लाभ ले पाएंगे।
मोटा कारोबार, लेकिन गरीबों के हक पर डाका
मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह सामने आया कि कई ऐसे परिवार, जो मोटे कारोबार में संलग्न हैं और जिनका जीएसटी पंजीयन है, वे भी गरीबों की सूची में शामिल होकर वर्षों से सस्ते अनाज और शासन की योजनाओं का लाभ ले रहे थे। इससे उन परिवारों का हक मारा जा रहा था जो वास्तव में पात्र हैं और जिनकी जीविका ही इस राशन पर निर्भर है। शासन की सख्ती और विभागीय निगरानी के चलते अब इस पर लगाम कसना शुरू हो गया है। सत्यापन के दौरान यह भी सुनिश्चित किया गया कि जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है और वे वास्तव में गरीब रेखा के पात्र हैं, उनके नाम सूची में यथावत बने रहें। ऐसे वास्तविक कार्डधारियों को योजनाओं का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे, इसके लिए विभाग ने पात्रता की दोबारा पुष्टि की है।
लगातार जारी रहेगी कार्रवाई
खाद्य विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और समय-समय पर ऐसे सत्यापन अभियान चलाकर फर्जी या गैर-पात्र लाभार्थियों की पहचान की जाएगी। इससे शासन की योजनाओं का लाभ सही पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगा और पारदर्शिता बनी रहेगी। इस कार्रवाई से जहां वास्तविक जरूरतमंदों को राहत मिली है, वहीं फर्जीवाड़ा कर योजनाओं का लाभ उठाने वालों पर शिकंजा कस गया है। शासन अब ऐसे मामलों को लेकर और भी ज्यादा सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है।
इनका कहना….
शासन के निर्देश मिलने के बाद सत्यापन कार्य शुरू किया गया है। संदिग्ध कार्डधारियों को चिन्हित कर रिपोर्ट भेजी गई है। जांच में जो वास्तविक गरीब पाए गए हैं शासन के मार्गदर्शन के मुताबिक उन्हें कंटीन्यू किया जाएगा।
केके टेकाम जिला खाद्य अधिकारी बैतूल




