Politics: राजनीतिक हलचल: अपनी टीम बढ़ाने किसने दावेदारों को अभी से दिए लॉलीपॉप?? जिम्मेदारी या मजाक पर क्यों छिड़ी बहस??? हाथी के दांत खाने के कुछ, दिखाने के कुछ का क्या है सही माजरा???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

Politics: Political stir: Who has already given lollipops to the contenders to increase their team?? Why the debate has started on responsibility or joke???

टीम बढ़ाने कई दावेदारों को लालीपाप

एक पार्टी में नए चीफ ने अपनी टीम को तगड़ी करने के लिए अभी से विधानसभा चुनाव के दावेदारों को ऐसा लालीपाप पकड़ाया कि उनकी अपरिपक्व राजनीति के किस्से जोर से सुने जा रहे हैं। पिछले दिनों वे एक सुरक्षित विधानसभा प्रवास पर गए थे। यहां पर पार्टी की ओर से बीते विधानसभा में दावेदार रहे नेता को अपने पक्ष में लाने में सफल रहे। उन्होंने अगले विधानसभा में भी उन्हें उम्मीदवार बनाने का ठोस आश्वासन दिया। हालांकि यह नेता दूसरे गुट के कट्टर समर्थक माने जाते हैं, लेकिन उन्हें टिकट का लालीपाप दिया तो उन्होंने पाला बदलने में जरा भी देरी नहीं की। उनके इस पैतरे से अन्य दावेदारों की नाराजगी बढ़ी तो दूसरों को भी ऐसा ही लालीपाप दे डाला। आधा दर्जन दावेदार उनके लालीपाप के बाद एक मंच पर नजर आए, लेकिन पार्टी प्रमुख की राजनीति उन्हें समझते देर नहीं लगी और आगे की राणनीति पर विचार शुरू हो चुका है। इसके दुर्गामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

जिम्मेदारी या मजाक?

पिछले दिनों सत्ता पक्ष में कुछ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई। इसमें कहीं खुशी और कहीं गम देखा गया। दूसरी पार्टी से आए कुछ नेताओं को भी इसमें वजन दिया गया है। हालांकि यह नेता हेवी वेट समझते थे, लेकिन उन्हें एक जगह का प्रभारी बनाया गया। हालांकि वे पहले ही कह चुके थे कि वे पार्टी द्वारा दी गई हर जिम्मेदारी का निर्वाहण करेंगे, इसलिए अब वे इसे बड़ी जिम्मेदारी मिलने के तौर पर प्रचारित करवा रहे हैं। विरोधी दल के उनके पूर्व साथी तो सोशल मीडिया पर मजाकिया लहजे में कहने से नहीं चूक रहे हैं कि क्या बनने गए थे और क्या बना दिए गए।

किसने बोला हाथी के दांत वाला डायलॉग?

विपक्षी पार्टी के एक जिला प्रमुख के टेक्ट को देखते एक पदाधिकारी कह बैठे कि हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ और। यह बात पार्टी के पदाधिकारी ने इसलिए कहीं कि उक्त पार्टी प्रमुख ने एक जगह उद्बोधन में कहा था कि कोई किसी के साथ भी रहे, उन्हें कोई दिक्कत नहीं पर संगठन में सभी साथ रहे। इस बात की चुटकी इसलिए ली जा रही है,क्योंकि जब यह नेता जी जिला प्रमुख नहीं थे, तब पुराने प्रमुख के कार्यक्रमों के आने से अपने लोगों को न सिर्फ रोकते थे, बल्कि मुख मीडिया में कवरेज भी न मिले, इसकी जुगत लगाते रहते। यही वजह है कि पार्टी के पदाधिकारी जिला प्रमुख की इस बात को हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ और की संज्ञा दे बैठे।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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