Betul Ki Khabar: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल: पद बड़ा, पर सादगी पहले जैसी
Betul Ki Khabar: State BJP President Hemant Khandelwal: The position is big, but the simplicity is same as before

न बंगला लिया, न सरकारी गाड़ी – निजी घर और वाहन से ही कामकाज, पहनावा भी वहीं, दो माह में कार्यकर्ताओं के दिलों पर छाए
Betul Ki Khabar: बैतूल। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल राजनीति में आज उन चुनिंदा नेताओं में गिने जा रहे हैं, जिनके लिए पद और शक्ति सिर्फ संगठन सेवा का माध्यम है, जीवनशैली बदलने का साधन नहीं। अध्यक्ष पद की बागडोर संभालने के बाद भी उनकी सादगी, समर्पण और सहजता वैसे ही कायम है जैसी पहले थी। यही वजह है कि खंडेलवाल न केवल कार्यकर्ताओं बल्कि वरिष्ठ नेताओं के बीच भी एक अलग छवि बना चुके हैं।
अध्यक्ष पद संभालने के बाद पार्टी ने उन्हें आवास और वाहन उपलब्ध कराए, लेकिन खंडेलवाल ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया। वे आज भी अपने निजी घर में ही रहते हैं और पार्टी के सभी कार्यक्रमों, बैठकों और यात्राओं के लिए अपनी निजी गाड़ी का ही उपयोग करते हैं। गाड़ी का ईंधन खर्च भी वे स्वयं वहन करते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवहार बताता है कि राजनीति में रहते हुए भी सादगी से जिया जा सकता है।
पहनावा भी पहले जैसा
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी उनके पहनावे में जरा भी बदलाव नहीं आया। वे हमेशा की तरह क्रीम-ब्लैक पैंट और सफेद शर्ट पहनते हैं। जहां अन्य नेता पद पर आते ही ब्रांडेड कपड़े और तड़क-भड़क अपनाते हैं, वहीं खंडेलवाल ने इसे खुद से दूर रखा है। उनकी यही सरलता कार्यकर्ताओं को संदेश देती है कि सच्चा नेता वही है जो जमीन से जुड़ा रहे।
दो माह के कार्यकाल में ही बना लिया बड़ा स्थान
महज दो माह के कार्यकाल में ही उन्होंने हजारों कार्यकर्ताओं के दिलों में खास जगह बना ली है। वे लगातार संगठन के बीच रहकर, बैठकों और कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं को सुनकर और उनके साथ घुल-मिलकर काम कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि खंडेलवाल का स्वभाव ही उन्हें खास बनाता है – वे हर किसी को सहजता से सुनते हैं और समाधान का रास्ता बताते हैं।
अध्यक्ष चयन के समय भी रहे अपने शहर में
जब प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भोपाल और दिल्ली के गलियारों में बड़े नेताओं के नामों की चर्चा थी, तब खंडेलवाल ने न तो राजधानी का रुख किया और न ही हाईकमान से संपर्क साधने की कोशिश। वे अपने ही शहर बैतूल में सामान्य कार्यकर्ता की तरह संगठन कार्यों में लगे रहे। जब पार्टी हाईकमान ने उनका नाम तय किया, तभी वे भोपाल रवाना हुए। यह उनके आत्मविश्वास और पार्टी पर भरोसे की मिसाल है। अध्यक्ष बनने से पहले भी उनकी सादगी और समर्पण भाव से वरिष्ठ नेता प्रभावित रहे हैं। यही कारण है कि संगठन के भीतर उनका नाम हमेशा भरोसे और ईमानदारी का पर्याय माना जाता रहा है।




