Betul News: धार छात्रावास में 8 छात्र पकड़ा चुके पेट्रोल की गंध का नशा करते

Betul News: 8 students caught in Dhar hostel getting intoxicated by the smell of petrol

छात्र के जलने की घटना को हल्के में ले रहे अधिकारी

Betul News: बैतूल। जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत धार ग्राम में संचालित आदिवासी बालक छात्रावास में संदिग्ध परिस्थितियों में छात्र के जलने की घटना ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में छात्र के बिस्तर से उठने वाली पेट्रोल की गंध ने मामले को संवेदनशील जरूर बना दिया था, लेकिन इस गम्भीर मामले को खुद विभागीय अधिकारियों ने हल्के में लेकर रफा दफा करने की कोशिश की है।

जानकारी मिली है कि करीब एक वर्ष पूर्व इसी छात्रावास में तत्कालीन अधीक्षक बस्तीराम कुमरे ने एक दो नहीं बल्कि पूरे आठ छात्रों को पेट्रोल की गंध लेकर नशा करते पकड़ा था। यह घटना उस समय और भी चिंताजनक हो जाती है जब हाल ही में इसी छात्रावास के एक छात्र के जलने की घटना सामने आई थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे प्रकरण को हल्के में लेते नजर आ रहे हैं।

जांच करने के बजाय निपटाने में लगे अधिकारी

इस गम्भीर मामले में अधिकारियों की गम्भीर लापरवाही सामने आ रही है, सवाल यह है कि जब पूर्व अधीक्षक ने छात्रों को पेट्रोल गन्ध का नशा करते पकड़ा था तब क्या कार्यवाही की गई, और अब जब छात्र के जलने की घटना में भी पेट्रोल की गंध सामने आई तो इस मामले में क्या एक्शन लिया गया।

मामला संवेदनशील इसलिए भी हो जाता है कि, छात्रावास में रहने वाले बच्चे अधिकतर दूर-दराज के ग्रामीण व गरीब परिवारों से आते हैं। इनके लिए छात्रावास शिक्षा का साधन ही नहीं, बल्कि भविष्य बनाने की राह है, लेकिन ऐसे संवेदनशील स्थान पर नशे की प्रवृत्ति का बढ़ना बेहद खतरनाक संकेत है। पेट्रोल जैसी घातक वस्तु की गंध लेकर इन बच्चों का नशा करना न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह जीवन को भी जोखिम में डाल सकता है। चिकित्सकों के अनुसार इस तरह का नशा दिमागी संतुलन बिगाड़ सकता है, शरीर के अंगों को प्रभावित कर सकता है और कई बार अचानक बेहोशी या दुर्घटना का कारण भी बन जाता है।

सतर्कता बढ़ाने के बजाए बरती जा रही लापरवाही

हाल ही में छात्रावास में एक छात्र आग से झुलस गया था, जिसकी जांच अभी अधूरी ही है। इसके बाद भी अधिकारी सतर्कता बढ़ाने की बजाय लापरवाही बरत रहे हैं । छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यही कारण है कि आठ छात्रों का पेट्रोल नशे में पकड़ा जाना बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर जिम्मेदार अधिकारी बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं? इधर विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की ओर झुकाव अक्सर देखरेख की कमी, तनाव और जागरूकता न होने की वजह से बढ़ता है।

छात्रावास जैसे संस्थानों में यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वहां कड़ी निगरानी और समय-समय पर काउंसलिंग होना चाहिए। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां बताती हैं कि छात्रावास प्रबंधन और संबंधित विभाग ने इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए। जरूरत इस बात की है कि इस मामले को हल्के में न लिया जाए। जिला प्रशासन को तुरंत जांच कर सख्त कदम उठाने होंगे। छात्रावास में बच्चों की नियमित काउंसलिंग, स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।

साथ ही, जो अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। बच्चों का भविष्य देश का भविष्य है, ऐसे में इस तरह की घटनाओं को अनदेखा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इस गम्भीर मामले को लेकर सहायक आयुक्त विवेक पांडेय से विभाग का पक्ष जानने के लिए मोबाइल नम्बर 9303272071 पर लगातार संपर्क किया गया, लेकिन उनका मोबाइल बिजी आता रहा।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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