Friendship Day Special : मित्रता ऐसी कि अभी भी एक घर में साथ गुजर रही इनकी जिंदगी, भाजपा से इस्तीफा देकर शैलेन्द्र को घनश्याम ने घर में रखकर निभाया दोस्ती का फर्ज
Friendship Day Special: Friendship is such that their lives are still passing together in a house, after resigning from BJP, Ghanshyam fulfilled the duty of friendship by keeping Shailendra at home

Friendship Day Special : (बैतूल। दोस्ती कोई खोज नहीं होती, दोस्ती किसी से हर रोज नहीं होती, अपनी जिंदगी में हमारी मौजूदगी को बेवजह न समझना, क्योंकि पलकें आखों पर कभी बोझ नहीं होतीं। यह बात मित्रता दिवस पर जिला मुख्यालय के दो दोस्तों के लिए सटीक बैठती है, जिन्होंने बचपन साथ गुजारा। एक पार्टी के मीडिया प्रभारी से इस्तीफा दिया तो कार्यालय छोडक़र दोस्त ने अपने घर में ही एक कमरा देकर दोस्ती का फर्जी अदा किया।
इतना ही नहीं दोस्त ने एक कदम आगे बढक़र खाने, पीने से लेकर सारी व्यवस्थाएं भी कर दी। बैतूल के यह दोनों दोस्त भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र आर्य और जेएच कॉलेज के जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष घनश्याम मदान है।दोस्ती दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता है। जो बातें हम अपने माता-पिता, पति-पत्नी या भाई-बहनों के साथ साझा नहीं कर सकते, दोस्तों के साथ बेहिचक शेयर करते हैं।
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सच्ची दोस्ती में ना तो कोई छोटा-बड़ा होता है, ना ऊंच-नीच और न ही कोई स्वार्थ छिपा होता है। जीवन के मुश्किलभरों दिनों ने जब हर कोई साथ छोड़ देता है तो दोस्त ही सहारा देता है। दोस्ती के लिए हमारे साहित्यकारों, कवियों और शायरों ने एक से बढक़र एक गीत, कविता और शायरी लिखी हैं।दोस्ती पर कई शानदार फिल्में बनी हैं। कई ऐसे सदाबहार गीत हैं, जो दोस्ती का जिक्र होते ही खुद-ब-खुद जबान पर आकर थिरकने लगते हैं।
रविवार को जब पूरे विश्व में मित्रता दिवस मनाया जा रहा है, तब बैतूल के दोस्तों का उल्लेख न हो ऐसा संभव नहीं है। सांझवीर टाईम्स मित्रता दिवस के इस मौके पर बैतूल के घनश्याम मदान और शैलेन्द्र आर्य की 50 वर्ष की मित्रता को पाठकों तक पहुंचा रहे है। इनकी मित्रता इतनी गहरी है कि दोनों के रास्ते अलग-अलग थे, लेकिन संयोग से दोनों सुबह से शाम तक साथ रहकर एक दूसरे के सुख-दुख में काम आ रहे है, बल्कि जिंदगी का एंजाय भी कर रहे है।
पार्टी छोड़ी तो दोस्त ने फिर दिया साथ
घनश्याम मदान और शैलेन्द्र आर्य की दोस्ती इतनी मजबूत है कि पिछले दिनों शैलेन्द्र ने भाजपा के वर्षो तक मीडिया प्रभारी पद को त्याग दिया। शैलेन्द्र चूंकि अविवाहित थे इसलिए भाजपा कार्यालय में ही उनका निवास था। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कार्यालय खाली किया तो किराए के मकान की तलाश कर ही रहे थे कि बचपन के मित्र घनश्याम मदान ने एक बार फिर दोस्ती अदा कर दी। घनश्याम ने अपने बचपन के लंगोटियां यार के लिए घर का एक कमरा दे दिया। अब इस कमरे में शैलेन्द्र अपना निवास करते है। सबसे बड़ी बात यह है कि सुबह का नाश्ता से लेकर रात का भोजन तक दोनों मित्र साथ में करते है। मदान का परिवार शैलेन्द्र को अब अपना ही समझकर खूब खातिरदारी करने से पीछे नहीं हट रहे है।
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50 वर्ष पुराना याराना
शैलेन्द्र और घनश्याम के बीच याराना लगभग 50 वर्ष पूर्ण बताया जा रहा है। लगभग 58 वर्ष के दोनों मित्र का बचपन लोहिया वार्ड और आसपास बीता। छटवीं से शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (अब उत्कृष्ट विद्यालय) में 11 वीं तक साथ पढ़े। इसके बाद कॉलेज में भी दोनों मित्र साथ रहे, यहीं से दोनों के छात्र जीवन की शुरूआत अभाविप से हुई। धीरे-धीरे घनश्याम और शैलेन्द्र की मित्रता परवान चढ़ी और भाजपा भी साथ ही ज्वाईन की। शैलेन्द्र जहां भाजपा के मीडिया प्रभारी रहे तो घनश्याम को जिले के सबसे बड़े जेएच कॉलेज में जनभागीदारी समिति का अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ।




