Betul Ki Khabar: धूप-बारिश से बिगड़ी लोगों की सेहत, उल्टी-दस्त बुखार के मरीज बढ़े
Betul Ki Khabar: People's health deteriorated due to sun and rain, cases of vomiting, diarrhea and fever increased

जिला अस्पताल में सोमवार 11 सौ के पार पहुंचा ओपीडी का आंकड़ा
Betul Ki Khabar: बैतूल। इन दिनों बदलते मौसम ने लोगों की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। कभी तेज धूप तो कभी बारिश के कारण मौसमी बीमारियां तेजी से फैलने लगी है। जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में मौसमी बीमारी से पीड़ित मरीज पहुंचने लगे हैं। ओपीडी का आंकड़ा 11 सौ के पार पहुंच गया। सोमवार, मंगलवार और बुधवार तीन से चार दिनों तक मरीज बड़ी संख्या मेें पहुंचते हैं। अभी रक्षाबंधन और कृष्ण जन्माष्टमी की छुट्टियां खत्म होने के बाद सोमवार को बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच गए। ओपीडी के सामने लंबी कतारें लग गई थी। डॉक्टरों के कक्ष के सामने भी मरीजों की भीड़ देखने को मिली है।
धूप-छाव और बारिश के कारण मौसमी बीमारियां सबसे ज्यादा सरकारी और निजी अस्पताल में उल्टी, दस्त, बुखार और डीहाईड्रेशन के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में बार-बार बदलाव आने से शरीर की रोग प्रतिरोग क्षमता कमजोर हो जाती है, जिसके कारण लोग मौसमी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। मौसमी बीमारियों से बचने के लिए खानपान पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। बारिश के दिनों में पानी उबाल कर सेवन करना चाहिए। कई बार पानी के कारण भी तबीयत बिगड़ जाती है। डॉक्टर बासा भोजन नहीं करने की भी सलाह लोगों को दे रहे हैं।
ओपीडी में लंबी कतार से लोग परेशान
सोमवार से अगले तीन से चार दिनों तक अस्पताल में मरीजों की अधिक भीड़ बनी रहती है। ओपीडी के सामने लंबी-लंबी कतारे लगने के कारण लोगों को पर्ची काटने के लिए घंटों तक लाइन में लगना पड़ता है। लंबी कतार होने के कारण लोग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। कई बार गंभीर मरीज आने पर भी उन्हें ओपीडी पर्ची बनाने के लिए परेशान होना पड़ता है। गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा अलग से व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि परेशानियों का सामना न करना पड़े।
भर्ती मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी
जिला अस्पताल में भर्ती होने वाली मरीजों की संख्या अब बढ़ने लगी है। ओपीडी का आंकड़ा 11 सौ के पार चला गया, जिसमें अधिकतर मरीज उल्टी, दस्त और बुखार के मरीज शामिल हैं। कुछ मरीजों को तो भर्ती तक कराने की नौबत आ जाती है। महिला-पुरूष वार्ड के साथ-साथ बच्चा वार्ड में भी भर्ती मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होने लगा है। बढ़ते मरीजों के कारण अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था बनानी पड़ती है। कई बार तो मरीजों की संख्या बढ़ने पर एक पलंग पर 2-2 मरीजों को सुलाना तक पड़ता है। ऐसी स्थिति सबसे ज्यादा बच्चा वार्ड में निर्मित होती है।




