Betul Mandi News: आंखों देखी: मंडी में अवैध वसूली के दावे बौने, खुलेआम आम हो रही उगाही
Betul Mandi News: Eyewitness: Claims of illegal recovery in the market are dwarfed, extortion is happening openly

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के आदेश रद्दी की टोकरी में, तौल के नाम पर राशि मांगने पर किसान परेशान
Betul Mandi News: बैतूल। जिले की कृषि उपज मंडी में तौल के नाम पर किसानों से अवैध वसूली का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा कई बार निरीक्षण के बावजूद मंडी में हो रही उगाही को रोकने में कोई सफलता नहीं मिल पाई है। अब स्थिति यह हो गई है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस अव्यवस्था के आगे हार मान चुके हैं और चुप्पी साधकर बैठ गए हैं। इसका खामियाजा सीधे तौर पर उन किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जो कड़ी मेहनत से उपज तैयार कर बेचने के लिए मंडी पहुंचते हैं।
कृषि उपज मंडी में आज भी जब किसान अपनी उपज लेकर आता है, तो तौल करने से पहले ही हम्माल उससे पैसे मांगते हैं। यदि किसान पैसे देने में आनाकानी करता है, तो उसकी उपज तौलने से मना कर दिया जाता है। मजबूरी में किसान तयशुदा राशि देता है ताकि उसकी उपज तौली जा सके और उसे जल्द से जल्द भुगतान मिल सके। इस प्रकार की वसूली से किसान बेहद आहत हैं, लेकिन वे खुलकर कुछ कह नहीं पाते क्योंकि उन्हें बार-बार मंडी आना होता है और किसी भी प्रकार का विरोध उनके लिए भविष्य में और अधिक मुसीबत खड़ी कर सकता है।

300 रुपये में 15 बोरी की तौल
मंडी में पहुंचे किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 15 बोरी सोयाबीन तौलने के उनसे 300 रुपये वसूले गए। एक अन्य किसान ने बताया कि उसने 10 बोरी सोयाबीन लाई थी, जिसके तौल के लिए हम्मालों ने 200 रुपये लिए। केवल हम्माल ही नहीं, पर्ची देने वाले कर्मचारी भी किसानों से 50-50 रुपये तक की वसूली कर रहे हैं। यह सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन प्रशासन इसे रोक पाने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
प्रशासनिक निरीक्षण भी बेअसर
मंडी में व्याप्त इस गड़बड़ी को लेकर कलेक्टर, एसडीएम और कई जनप्रतिनिधि समय-समय पर निरीक्षण कर चुके हैं। हर बार हम्मालों को चेतावनी दी जाती है, कर्मचारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिखता। अधिकारी लौटते ही स्थिति फिर वैसी की वैसी हो जाती है। किसान यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक यह लूट जारी रहेगी? मंडी में हो रही इस अवैध वसूली के खिलाफ किसान आवाज नहीं उठा पा रहे हैं। उन्हें डर है कि यदि उन्होंने विरोध किया या किसी अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखी तो भविष्य में उन्हें मंडी में और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कई किसानों ने इस बात को स्वीकार किया कि वे जानते हैं कि यह गलत है, लेकिन मजबूरी में वे चुप रहते हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता अपनी उपज को समय पर बेचकर घर लौटने की होती है।

व्यवस्था सुधारने के प्रयास अधूरे
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बार-बार व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ। मंडी समिति भी इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। सवाल यह उठता है कि यदि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी भी इस गड़बड़ी को ठीक नहीं कर पा रहे हैं, तो फिर किसानों को न्याय कौन दिलाएगा? मंडी में खुलेआम हो रही इस उगाही ने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। किसानों के हक में यह जरूरी हो गया है कि मंडी में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। केवल निरीक्षण करने और निर्देश देने से कुछ नहीं होगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए बिना हालात नहीं सुधरेंगे। किसानों की मेहनत की कमाई पर मंडी में हो रही यह खुली लूट अब बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है।
इनका कहना…
मंडी में अगर किसानों से वसूली हो रही है तो शिकायत मिलने पर इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर, बैतूल
मंडी में कोई अवैध वसूली नहीं हो रही है। हम्माल उपज तौल रहे है तो उसके पैसे किसानों से लेंगे।
धनराज लोखंडे, मंडी सचिव, बडोरा बैतूल




