Betul: प्रशासनिक कोना: राजस्व विभाग में नए साहब के आने के बाद कामकाज क्यों हुए ठप?? जमीन पर कब्जा दिलाने की चर्चा की क्या है हकीकत??? नए साहब की आमद के बाद इस विभाग में क्यों मच रही खींचतान???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…….

नई आमद के बाद कामकाज ठप
राजस्व विभाग में पिछले दिनों हुए परिवर्तन के बाद कुछ अधिकारी इधर से उधर हुए, लेकिन जिला मुख्यालय पर जो बदलाव हुआ है, इससे किसी को राहत नहीं मिली है।
पुराने साहब को शिकायत के बाद हटाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जिन नए साहब को जिम्मेदारी है, वे लो प्रोफाइल के है। न तो अधीनस्थ अमले और न ही लोगों की समस्याओं का निदान हो पा रहा है। लोग सिर धुनकर पुराने साहब की ही याद कर रहे हैं। काम के प्रति तो वैसे नए साहब ईमानदार है, लेकिन फील्ड की जिम्मेदारी में अधिक अनुभव नहीं होने से वजह से कामकाज में कई तरह की दिक्कते आ रही है। फिलहाल वे दोहरी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
उम्मीद की जा रही है कि उनके बदले भैंसदेही वाले साहब को यहां भेजा जा सकता है। हालांकि फिर समस्या खड़ी हो जाएगी कि भैंसदेही का जिम्मा किसे सौंपे? इस समय वैसे ही अधिकारियों का टोटा चल रहा है।
जमीन पर कब्जा दिलाने की सुपारी
वर्दी वाले विभाग एक साहब ने इन दिनों जमीन पर कब्जा दिलाने की तथाकथित सुपारी ले रखी है। इसकी शहर में खूब चर्चा चल रही है। शहर के बाजार क्षेत्र की महंगी जमीन पर चल रही रस्साकशी के बीच साहब के मैदान में आने से मामला रोचक हो गया है।
चर्चा है कि मुख्य बाजार की इस जमीन पर कब्जाधारियों की घेराबंदी की जा रही है। फर्जी मामले से लेकर जिला बदर तक का खेल होने की चर्चा है। पिछले दिनों इसमें कुछ राजनैतिक हस्तक्षेप और विवाद की स्थिति भी निर्मित हो चुकी है, लेकिन साहब को जिम्मा मिलने के बाद माहौल कुछ बदला-बदला सा दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में देखने लायक यह होगा कि जमीन के इस पेंच में क्या गुल खिलता है।
नई आमद के बाद खींचतान शुरू
वर्दी वाले विभाग में पूर्व में पदस्थ रहे एक अधिकारी के जिले में आमद के बाद सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। इस बारे में खूब चर्चा हो रही है कि नए साहब की अपने थानेदारों से पटरी नहीं बैठ रही है। इसका कारण तलाशने का प्रयास किया तो वस्तुस्थिति सामने आ रही है कि प्रसाद को लेकर मतभेद हो गया।
वैसे भी साहब यहां पहले रह चुके हैं, इसलिए सारा तर्जुबा है। यही वजह है कि वे अपने अधीनस्थ थानेदारों को सीख दे रहे हैं। यह सीख कुछ थानेदारों को हजम नहीं हो रही है। वैसे उनकी भी बात सही है, क्योंकि थाने का जिम्मा उनका है। ऐसे में उनसे थोड़े बड़े साहब का हस्तक्षेप कैसे बर्दाश्त करें? वैसे विरोध करने वाले थानेदार के दूसरे साथी एक मामले में स्थानांतरित हो चुके हैं।




