Betul Samachar: बीच शहर में नियम विरुद्ध व्हाइट टापिंग सड़क प्लांट जानलेवा

Betul News: Illegal white topping of road plant in the middle of the city is fatal

डस्ट से स्कूली बच्चों और राहगीरों की सेहत पर संकट, जिम्मेदार मौन

Betul Samachar: बैतूल। शहर के हृदयस्थल में बनाई जा रही करोड़ों की लागत वाली व्हाइट टापिंग सड़क अब आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार को नियमों को ताक पर रखकर शहर के बीचोंबीच सीमेंट कांक्रीट मिक्सिंग प्लांट लगाने की अनुमति दे दी है, जिससे लोगों की जान पर बन आई है। सर्किट हाउस परिसर में लगे इस प्लांट से उड़ने वाली डस्ट लोगों की आंखों और श्वसन तंत्र पर गंभीर असर डाल रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह प्लांट मुख्य मार्ग के एकदम समीप स्थित है, जहां से रोजाना हजारों वाहन और राहगीर गुजरते हैं।

प्लांट से लगातार उड़ती धूल के कारण वाहन चालकों को जहां-की-तहां रुकना पड़ता है, वहीं पैदल चलने वाले राहगीर विशेषकर स्कूली बच्चे सीधे इस डस्ट का शिकार हो रहे हैं। इसी मार्ग से सुबह करीब दो दर्जन से अधिक स्कूली बस भी बच्चों को लाना-ले जाना करती है। बच्चों की आंखों में घुसती यह धूल गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसके अलावा सुबह के समय प्लांट पर ठेकेदार द्वारा मटेरियल तैयार करने के कारण बारिक कंकर जैसी डस्ट उड़कर पोस्ट आफिस, स्टेडियम, पुलिस ग्राउंड तक पहुंच रही है।

सुबह वाकिंग पर जाने वाले लोगों को भी पिछले कई दिनों से इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। डॉक्टरों की मानें तो लंबे समय तक इस तरह की धूल का संपर्क आंखों और फेफड़ों के लिए खतरनाक हो सकता है। बावजूद इसके, न तो लोक निर्माण विभाग ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था की और न ही ठेकेदार की ओर से कोई डस्ट कंट्रोल सिस्टम लगाया गया।

प्लांट के स्थल चयन सहित नियमों की अनदेखी

गौरतलब है कि यह सड़क चौपाटी से लेकर कलेक्ट्रेट और कोतवाली तक बनाई जा रही है। प्रोजेक्ट की लागत करीब सवा तीन करोड़ रुपए है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में तमाम नियमों की अनदेखी की गई है। प्लांट का स्थान चयन इस बात का प्रमाण है कि ठेकेदार के प्रभाव में आकर विभागीय अधिकारियों ने सरकारी जमीन का दुरुपयोग कर जनता को संकट में डाल दिया है। स्थिति की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि प्लांट के ठीक सामने पुलिस लाइन स्थित है, जहां कई पुलिसकर्मी अपने परिवार सहित निवास करते हैं। डस्ट से उनके भी परिवार प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है इतना सब होने के बावजूद नसम जनता की कोई सुनवाई नहीं हो रही।

जिनकी जिम्मेदारी वही साधे बैठे चुप्पी

नागरिकों का कहना है कि जब निर्माण कार्य से नागरिकों की जान को खतरा हो, तो उसे रोकना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। लेकिन यहां तो जिम्मेदार अधिकारी ही चुप्पी साधे बैठे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या ठेकेदार की सुविधा आम नागरिकों की सेहत से ज्यादा जरूरी हो गई है? शहरवासी मांग कर रहे हैं कि तत्काल इस प्लांट को अन्यत्र शिफ्ट किया जाए और उड़ती डस्ट को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं। प्लांट से उड़ने वाली डस्ट से परेशान लोगों ने उच्चाधिकारियों से शिकायत के अलावा सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत करने की तैयारी कर ली है। इस संबंध में व्हाइट टाइपिंग सड़क के इंचार्ज राघव उपाध्याय ने कहा कि डस्ट उड़ रही है तो इसे दिखवाएंगे। आठ दिन में प्लांट का काम खत्म हो जाएगा।

इनका कहना…..

इस संबंध में आपके माध्यम से शिकायत मिली। चूंकि शहर में सड़क का काम चल रहा है, इसलिए थोड़ा सहयोग सभी को करना पड़ेगा। कुछ दिनों में प्लांट यहां से हट जाएगा।

प्रीति पटेल, ईई पीडब्ल्यूडी बैतूल।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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