Betul News: जर्जर भवनों में संचालित हो रहे सरकारी दफ्तर

Betul News: Government offices are being run in dilapidated buildings

जान हथेली पर रखकर करना पड़ रहा काम, अब गिरे-तब गिरे जैसे हालात कर्मचारी भयभीत

Betul News: बैतूल। आधुनिक युग में जहां सुविधाजनक और सुरक्षित कार्यस्थलों की आवश्यकता सबसे अधिक है, वहीं बैतूल जिले में कई सरकारी विभाग आज भी ब्रिटिश काल के बने जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। इन भवनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी रोज़ जान हथेली पर रखकर काम करने को मजबूर हैं। ना तो छतों की मजबूती का भरोसा है और ना ही दीवारों की टिकाऊ स्थिति पर कोई विश्वास किया जा सकता है।

इन पुराने भवनों की छतें समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, प्लास्टर जगह-जगह से गिर चुका है और दीवारों में दरारें साफ दिखाई देती हैं। कई जगह पर लकड़ी की पुरानी छत्तें दीमक की शिकार हो चुकी हैं और बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बारिश होते ही पानी टपकने लगता है, जिससे फर्श पर फिसलन और करंट लगने जैसे हादसों का खतरा बना रहता है। कर्मचारियों का कहना है कि वे रोज़ इस चिंता में दफ्तर आते हैं कि कहीं कोई हिस्सा गिर न जाए या किसी दिन कोई बड़ा हादसा न हो जाए। जिला मुख्यालय के लगभग आधा दर्जन विभाग इस स्थिति से जूझ रहे हैं। इनमें लाखों रुपए बजट वाला महिला बाल विकास विभाग भी शामिल है। पुराने कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित इस भवन में प्रमुख अधिकारी समेत करीब 15 कर्मचारियो का स्टाफ है। इनमे महिला कर्मचारी भी शामिल हैं।

भवन के दीवारों पर बारिश की सीलन आसानी से नजर आ रही हैं। भवन के पिछले हिस्से की छत का तो भगवान ही मालिक है। ऐसे में यदि बारिश के चलते कोई हादसा हो गया तो, जनहानि भी झेलना पड़ सकता है। इसी विभाग के ठीक बाजू में रजिस्ट्री कार्यालय भी जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। रजिस्ट्री विभाग ऐसा विभाग है जिसके जरिए शाषन को प्रतिवर्ष करोड़ो रुपयों का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन यह भवन देखने मे ही किसी गरीब खाने जैसा प्रतीत हो रहा है।लेकिन इन दफ्तरों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने या नया भवन तैयार करने की अभी तक कोई कार्य योजना नहीं बनाई जा सकी है।

भवन जर्जर, शौचालय तक नहीं, पुराने दस्तावेज भी खतरे में

इसी परिसर में जिला अभियोजन संचालनालय, पुलिस विभाग की खुफिया शाखा का दफ्तर और भू अभिलेखागार कार्यालय भी संचालित है। पुलिस विभाग की खुफिया शाखा के दफ्तर को छत पर टीन डालकर थोड़ा सुरक्षित तो कर दिया गया है। लेकिन बारिश के पानी मे भीगती पुरानी दीवारें कब धराशाई हो जाएं इसका कोई भरोसा नहीं है। एक अधिकारी समेत इस दफ्तर में करीब 8 से 9 कर्मचारियो का स्टाफ है, इनमे कुछ महिला कर्मचारी भी शामिल हैं, और दफ्तर में शौचालय तक कि व्यवस्था नहीं है। पुरुष कर्मचारी न्यायालय परिसर में बने शौचालयों का उपयोग करने पर मजबूर हैं।

सबसे ज्यादा खतरे में भू अभिलेखागार का दफ्तर नजर आ रहा है।रजिस्ट्री कार्यालय के ठीक बगल में संचालित कार्यालय में तीन से चार कर्मचारियो का स्टाफ मौजूद है। दफ्तर के एक मात्र हाल में चारों तर$फ अनगिनत पुरानी फाइलें सहेज कर रखी गई हैं। इन फाइलों में जिले भर के भूमि संबंधी पुराने रिकार्ड रखे हुए हैं। लेकिन इन रिकार्डो को सुरक्षित रखने के बजाय ऐसे भवन में रखा गया है जो कभी भी दगा दे सकता है। पुराने सरकारी रिकार्ड बारिश में दीवारों पर आने वाली सीलन के चलते खराब भी हो सकते हैं। प्रशाषन यदि चाहे तो यह भवन नए कलेक्ट्रेट भवन में शिफ्ट करने की व्यवस्था कर सकता है। लेकिन विडम्बना है कि इस गम्भीर विषय पर ना ही विभाग प्रमुख चिंतित हैं और ना ही प्रशासन।

कर्मचारियो को सुरक्षित कार्यस्थल देना आवश्यकता नहीं बल्कि जिम्मेदारी का विषय

पुराने भवनों में संचालित ये ऐसे विभाग ऐसे हैं जहां कर्मचारी तो असुरक्षित हैं ही बल्कि सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की भी यहां उचित व्यवस्था नहीं है, बड़ा सवाल यही है कि सरकारी तंत्र आखिर कब जागेगा? यदि किसी दिन कोई अप्रिय घटना घटती है तो उसकी जि़म्मेदारी कौन लेगा? क्या हमेशा की तरह तब भी जांच बैठा दी जाएगी और मुआवज़े की खानापूर्ति कर दी जाएगी? सरकार और प्रशासन को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कदम उठाने चाहिए। कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल देना केवल उनकी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी भी है। यह न केवल मानव जीवन की सुरक्षा का मामला है, बल्कि एक संवेदनशील प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। अगर अभी भी आंखें बंद रखी गईं, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।

इनका कहना…..

कार्यालय में कहीं कहीं मरम्मत की जरूरत है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग से पत्राचार किया गया है।

दिनेश कौसले, पंजीयक रजिस्ट्री कार्यालय बैतूल

भवन पुराना हो चुका है यह सही है। मरम्मत की अभी आवश्यकता तो नहीं है लेकिन होगी तो इससे अधीकारियों को अवगत कराया जाएगा।

गौतम अधिकारी, महिला बाल विकास अधिकारी बैतूल

कामकाज को देखते हुए भवन की मरम्मत पहले ही करवा ली गई थी, केवल शौचालय की ही थोड़ी दिक्कत कर्मचारियो को महसूस होती है।

नित्यानंद विश्वास, प्रभारी शाखा डीएसबी बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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