Betul Samachar – अफरशाही: एससी-एसटी छात्रावासों में दूसरे अधीक्षकों की पदस्थापना

आदिम जाति कल्याण विभाग में शासन के आदेश को किया दरकिनार, विधायकों की भी अनदेखी।

 

Betul Samachar: बैतूल। जिले में पदस्थ अफसरों ने शासन के आदेशों को बौना साबित करते हुए अपनी मर्जी से ऐसे तबादले कर दिए हैं, जो सूची आने के बाद सुर्खियां बटौर रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन तबादलों में जिले के सांसद और विधायकों की अनुशंसाओं को दरकिनार किया गया है।

आदिम जाति कल्याण विभाग में हाल ही में सैकड़ों शिक्षकों, व्याख्याताओं और अधीक्षकों समेत प्राचार्यों के थोकबंद तबादले हुए। इस सूची में कई ऐसे तबादले भी हुए हैं जो विवाद का कारण बन गए हैं।

बताया जाता है कि जनजाति कार्य विभाग के कमिश्नर ने वर्ष 2015 में सभी सहायक आयुक्त आदिवासी को स्पष्ट निर्देश दिए थे, कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रावासों, आश्रमों में इसी वर्ग के अधीक्षकों की नियुक्ति की जाना सुनिश्चित किया जाए। शासन ने निर्देश दिए थे कि यदि इस वर्ग के अधीक्षकों की कमी है तो इन्हें संविदा पर तीन वर्षों के लिए रखकर कार्य संपादित किए जाए। इन छात्रावासों में संविदा शिक्षक वर्ग-2 के ही शिक्षकों को पदस्थ किया जाए। उक्त आदेश का पालन करने के लिए सभी को कड़ाई से निर्देशित किया गया था। परिसर में ही छात्रावास अधीक्षकों को निवास सहित विद्यार्थियों के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश थे।

सूची आई तो मचा बवाल

जनजाति कार्य विभाग द्वारा हाल ही में अपने अधीनस्थ प्राचार्य, व्याख्याता, छात्रावास अधीक्षक और शिक्षकों के थोक बंद तबादले किए हैं। इन तबादलों में नियमों की ऐसी अनदेखी की गई कि पूरा विभाग सुर्खियां बटौरने लगा है।

जानकार सूत्र बताते हैं कि शासन के आदेश को दरकिनार करते हुए तबादले के पूर्व अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में गैर अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधीक्षकों की नियुक्ति कर दी है। करीब एक दर्जन छात्रावासों में दूसरे वर्ग के अधीक्षकों को जिम्मेदारी दिए जाने से इस वर्ग के अधीक्षक ठगा महसूस कर रहे हैं। सहायक आयुक्त ने आखिर इस वर्ग के ही अधीक्षकों को पदस्थ करने में रूचि क्यों नहीं दिखाई, खासा चर्चा का केंद्र बना है।

इधर, दूसरे सूत्र बताते हैं कि छात्रावास अधीक्षकों की नियुक्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। इसके बावजूद न तो कलेक्टर और न ही अन्य अधिकारियों ने जानकारी लेना उचित नहीं समझा। इसी वजह बड़े पैमाने पर अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में दूसरे अधीक्षकों की नियुक्ति कर दी। इसी के बाद जमकर बवाल मचा हुआ है।

केंद्रीय मंत्री और विधायकों को भी जानकारी नहीं

चौकाने वाली बात सामने आई है कि क्षेत्रीय सांसद आदिवासी मामलों के राज्य मंत्री है। उन्हीं के संसदीय क्षेत्र के मुख्यालय में गैर आदिवासी अधीक्षकों को नियुक्ति दे दी गई। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सहायक आयुक्त ने मंत्री को भी गुमराह कर दिया। इधर, एक अन्य सूत्र बताते हैं कि जिले के पांचों विधायकों ने भी जिन तबादलों के लिए विभाग में अपनी सिफारिश की थी, इसकी भारी अनदेखी की गई है।

तबादला सूची जारी होने के बाद न सिर्फ केंद्रीय मंत्री बल्कि विधायकों के पास भी दर्जनों शिकायतें पहुंची है। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद कुछ विधायकों ने अपनी नाराजगी भी जताई है। इस बात से साफ हो गया है कि जिले के एक ओर विभाग में अफरशाही हावी होने के कारण पांचों विधायकों की तबादला सूची में भारी अनदेखी की गई है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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