Betul Samachar: वन वृत के 25 वनरक्षकों का एक साथ तबादला, नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल

Betul News: 25 forest guards of forest circle transferred together, questions raised on ignoring the rules

जंगलों की सुरक्षा भगवान भरोसे, तबादला नीति की पारदर्शिता पर सवालिया निशान

Betul Samachar: बैतूल। प्रदेश सरकार द्वारा जारी तबादला अभियान के तहत अधिकांश विभागों में अधिकारियों-कर्मचारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। लेकिन वन विभाग में हुए एक विशेष घटनाक्रम ने शासन की तबादला नीति की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन वृत बैतूल में पदस्थ 25 परिवीक्षाधीन वनरक्षकों का एक साथ जिले से बाहर तबादला किया जाना विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, ये सभी वनरक्षक बाहरी जिलों के निवासी हैं और प्रशिक्षण उपरांत इनकी पहली पदस्थापना बैतूल जिले में की गई थी।

नियमों की खुली अनदेखी

सूत्रों के अनुसार, वन विभाग के सेवा नियमों के तहत किसी भी नव नियुक्त परिवीक्षाधीन वनरक्षक को प्रशिक्षण उपरांत कम से कम तीन वर्षों तक उसी जिले में पदस्थ रहना होता है ताकि वह क्षेत्र की भौगोलिक, पारिस्थितिकीय एवं प्रशासनिक परिस्थितियों से भलीभांति परिचित हो सके, लेकिन बैतूल वृत में इन 25 वनरक्षकों का मात्र एक वर्ष की सेवा के भीतर ही स्वयं के व्यय पर अन्य जिलों में स्थानांतरण किया जाना नियमों की स्पष्ट अनदेखी दर्शाता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ये स्थानांतरण न तो स्थानीय अधिकारियों की आपत्ति से रोके गए और न ही विभागीय विरोध दर्ज हुआ। शासन स्तर से इन सभी तबादलों को ऑनलाइन प्रणाली के तहत स्वीकृति प्रदान कर दी गई।

जंगलों की सुरक्षा पर संकट

बैतूल वनवृत, जो सतपुड़ा के घने वनों से घिरा अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, पहले से ही फील्ड स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। एक-एक बीट गार्ड को दो से तीन बीटों की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, जिससे जंगल की सुरक्षा व्यवस्था पहले ही प्रभावित हो रही थी। अब 25 प्रशिक्षित वनरक्षकों के एक साथ जिले से बाहर स्थानांतरण के बाद स्थिति और भी विकट हो गई है। वन्यप्राणी शिकार, अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए जिस सशक्त मैदानी अमले की आवश्यकता है, वह अब और भी सीमित हो गया है।

नीतियां बनी कागजी औपचारिकता

जानकारों का कहना है कि विभागीय नीतियां केवल कागजों तक सिमटकर रह गई हैं। यदि प्रशिक्षण काल में ही थोक में स्थानांतरण स्वीकृत किए जा रहे हैं, तो यह न केवल नीति की अनदेखी है, बल्कि यह विभागीय कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। बैतूल जैसे रणनीतिक और संवेदनशील वन क्षेत्र से प्रशिक्षित अमले को हटाना जंगलों की सुरक्षा को प्रत्यक्ष खतरे में डालने जैसा है। यदि आने वाले समय में वन्य अपराधों में वृद्धि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से उन नीतिगत निर्णयों पर होगी जो तात्कालिक लाभ को प्राथमिकता देकर दीर्घकालिक हितों की अनदेखी कर रहे हैं।

अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध, जवाबदेही तय नहीं

पूरे मामले में वन वृत बैतूल के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। तबादलों की ऑनलाइन प्रक्रिया में भले ही उनकी भूमिका सीमित हो, लेकिन 25 वनरक्षकों के स्थानांतरण पर चुप्पी यह संकेत देती है कि या तो उन्होंने जानबूझकर आंखें मूंदी रखीं या फिर वे प्रभावहीन होकर केवल मूकदर्शक बन गए। अब तक इस मामले में न तो शासन स्तर पर कोई बयान आया है और न ही विभागीय स्तर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है।

निष्पक्ष जांच की मांग

वन विभाग के इस विवादास्पद घटनाक्रम ने न केवल स्थानांतरण नीति की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली की विश्वसनीयता को भी ठेस पहुंचाई है। जरूरत इस बात की है कि शासन इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों की जिम्मेदारी तय करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रशिक्षण अवधि में किसी भी कार्मिक का स्थानांतरण न हो। साथ ही, रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्रों में अमले की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रदेश के वन संसाधनों की रक्षा को कोई आंच न पहुंचे। अन्यथा यह प्रशासनिक विफलता, आने वाले समय में जंगलों और पर्यावरणीय संतुलन के लिए एक बड़ी चूक साबित हो सकती हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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