Betul Ki Khabar: यातायात थाने का टो व्हीकल बना शो पीस

Betul Ki Khabar: Traffic police station's tow vehicle becomes a showpiece

सड़कों पर जस की तस बेतरतीब पार्किंग, नियमों की उड़ रही धज्जियाँ

Betul Ki Khabar: बैतूल। शहर की जाम होती सड़कों और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर टो व्हीकल खरीदा था। इस वाहन को इसलिए लाया गया था ताकि सड़कों पर लापरवाही से खड़े वाहनों को हटाया जा सके और नियमों का पालन न करने वालों पर तगड़ी चालानी कार्रवाई की जा सके, लेकिन हकीकत यह है कि यह टो व्हीकल आज सिर्फ थाने के अहाते में धूल खा रहा है या फिर शहर में इसे तफरीह करवाकर इसकी नुमाइश ही कि जा रही है। पिछले तीन से चार महीनों में एक भी ऐसी बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित हो सके कि इस वाहन का उपयोग करके यातायात पुलिस ने अव्यवस्थित पार्किंग पर शिकंजा कसा हो। यह एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है , क्या यातायात पुलिस केवल व्यवस्थाओं का प्रदर्शन कर रही है, या वास्तव में व्यवस्था सुधारने की कोशिश कर रही है?

शहर के लल्ली चौक, थाना रोड, कोठीबाजार, जय स्तंभ और गंज क्षेत्र , लिंक रोड, विकास नगर,जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में हालात बदतर हैं। इन इलाकों में सड़क पर ही दो पहिया, चौपहिया वाहन खड़े हुए कभी भी देखे जा सकते हैं। लोग जहां मर्जी वहां गाड़ियाँ खड़ी कर रहे हैं , चाहे वह मुख्य सड़क हो, मोड़ हो या फिर फुटपाथ। इससे न केवल आम जनता को परेशानी हो रही है, बल्कि एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों का रास्ता तक रुक जाता है।गंज हाथी नाले से दिलबहार चौक तक पूरे दिन बड़े वाहन बेतरतीब खड़े आसानी से देखे जा सकते हैं। यही हाल स्टेशन रोड का भी है। इधर कारगिल चौक से लिंक रोड पर भी स्तिथि भयावह नजर आ जाती है। कोठीबाजार में सप्ताह में दो दिन लगने वाले बाजार में यातायात पुलिस टो वाहन की नुमाइश तो करती है। सड़क पर बेतरतीब वाहन भी खड़े नजर आते हैं। लेकिन कार्यवाही से परहेज क्यों किया जाता है, यह समझ से परे है।जिस उद्देश्य को लेकर यह इक्यूपमेंट खरीदा गया है, ना ही उस उद्देश्य की पूर्ति यातायात पुलिस कर पा रही है, और ना ही आम नागरिको को बेतरतीब यातायात से मुक्ति दिला पा रही है।

प्रशासनिक विफलता या इच्छा शक्ति की कमी?

इस पूरे मामले पर सवाल यह उठता है कि यदि नियमों को लागू करने के लिए संसाधन मौजूद हैं, तो उनका उपयोग आखिर क्यों नहीं हो रहा है ? क्या यह सिर्फ कागजी कार्रवाई और दिखावे का औजार बनकर रह गया है? ये तमाम ऐसे सवाल हैं जो आम नागरिकों के मानस पटल पर उभरकर बाहर आ रहे हैं।।क्योंकि लोग अक्सर इस वाहन की नुमाइश सड़को पर देख रहे हैं।जनता की मांग है कि शो पीस नहीं, बल्कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं कि जाती समस्या का समाधान कहीं से कहीं तक संभव नहीं है। अगर प्रशासन वाकई यातायात व्यवस्था को सुधारना चाहता है, तो टो व्हीकल को सिर्फ दिखावे की वस्तु ना बनाये , बल्कि इसे सड़क पर उतारा जाए और कार्यवाही अंजाम भी दी जाए।

तब ही व्यवस्था धरातल पर नजर भी आएगी और जनता सवाल भी नहीं खड़े करेगी। यदि संसाधन का सही उपयोग नहीं किया गया तो शहर की सड़कें सिर्फ पार्किंग स्थल ही बनकर रह जाएंगी।इस पूरे मामले को लेकर यातायात पुलिस का पक्ष है कि, टो व्हीकल के जरिये अभी तक 15 से 20 कार्यवाही कर शमन शुल्क वसूला गया है। लेकिन जिन इलाकों का जिक्र किया गया है, उन इलाकों के सूरतेहाल बदल नहीं पाए बल्कि आज भी जस की तस बने हुए हैं। ऐसे में यातायात व्यवस्था पटरी पर आ पाएगी,इसकी गुंजाइश कम ही नजर आ रही है।अब जरूरत है दृढ़ इक्षाशक्ति की जो सही तरीके से निभाई जाए तो सड़कों पर परिणाम भी नजर आने लगेंगे।

इनका कहना

समय समय पर टो व्हीकल गश्त करवाई जाती है। अभी तक 15 से 20 वाहन चालकों पर कार्यवाही हो चुकी है। कार्यवाही में तेजी लाई जाएगी।

गजेंद्र केन, यातायात थाना प्रभारी बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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