Betul Samachar: बैतूल विधायक से सीखें सादगी, न नेमप्लेट और न गार्ड लगाए

Betul News: Learn simplicity from Betul MLA, neither nameplate nor guard

शेष चार विधायक ने अपने वाहन पर विधायक के साथ हुटर पर भी लगाए, जा रहा गलत संदेश

Betul Samachar: बैतूल। इस समय घोड़ाडोंगरी गंगा सज्जन सिंह उइके द्वारा जिस तरह शासकीय नियमों की अनदेखी की जा रही है, यह बैतूल से लेकर भोपाल तक चर्चा में बना है। माना कि वे विधायक है, इसलिए अपने निजी वाहन पर सिर्फ विधायक लिखवा सकती है, लेकिन उनके दो पुत्र भी अपने वाहनों पर खुलेआम विधायक लिखवाकर और हुटर लगवाकर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आरोप है कि विधायक पुत्रों के कुछ दोस्तों ने अपने वाहन पर विधायक लिखवा डाला है।

इस सूर्खियों के बीच सांझवीर ने जिले के पांचों विधायकों को लेकर फीडबैक लिए है, उसमें खुलासा हुआ है कि केवल बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ऐसे हैं, जिन्होंने अपने वाहन पर न तो विधायक लिखवाया है और न ही हुटर लगवाया है। उनकी सादगी की एक और मिसाल देखने को मिली है कि कई जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने पुलिस विभाग से कभी सुरक्षा गार्ड भी नहीं मांगा। उनकी सादगी के आगे न सिर्फ बैतूल बल्कि प्रदेश में भी सारे विधायक फेल नजर आते हैं।

विधायकों को जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि माना जाता है। ऐसे जनप्रतिनिधि सीधे जनता से जुड़कर संवाद कर सकें, इससे सीधे तौर पर उनको फायदा होता है, लेकिन पद मिलते ही विधायक अपने वाहनों पर नेमप्लेट के अलावा हुटर लगवा रहे हैं। नियम के अनुसार उन्हें इसकी पात्रता नहीं है। अलबत्ता उनके हुटर लगाने और नेमप्लेट लगाकर चलने से गांवों में अलग मैसेज जाता है। लोगों से आत्मीय जुड़ाव के लिए हुटर विलेन का रोल निभा रहे हैं। यह बात इसलिए कही जा रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में हुटर से भय का माहौल निर्मित होते देखा गया है।

एक राजनैतिक विश£ेषक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उनका एक ग्राम में जाना हुआ था, अचानक एक विधायक का वाहन हुटर बजाते हुए आया तो ग्रामीण उनसे चर्चा करने के दौरान सीधे घर के अंदर चले गए। बकौल राजनैतिक विश्लेषक उन्होंने अपने घर का दरवाजा भी बंद कर लिया। दरवाज उस समय खोला जब गांव के बाहर सायरन की आवाज खत्म हो गई। वे मानते हैं कि विधायक द्वारा वाहनोंं हुटर लगवाने से जनता का जुड़ाव दूर होते जा रहा है, लेकिन दिखावे की इस परिपाटी ने ही चुने हुए विधायकों को जनता से दूर कर दिया है।

हेमंत की सादगी के आगे सब फीके

जिले की राजनीति में बैतूल विधायक सर्वमान्य भाजपा नेता माने जाते हैं। इसकी कई खास वजह है। वे दो बार विधायक रहने के अलावा एक बार सांसद, जिला अध्यक्ष के अलावा प्रदेश भाजपा में कई बड़े पदों पर रहने के बावजूद उनकी सादगी आज भी कायम है। इसकी मिसाल उनके लग्जरी वाहन पर लोगों ने कभी न तो विधायक की नेमप्लेट देखी और न ही हुटर। और तो और कभी उन्होंने निजी सुरक्षा गार्ड की भी मांग नहीं की।

एक मर्तबा उनका कार्यकाल पांच वर्ष का बीत गया, किंतु कभी सुरक्षा गार्ड के साथ चलना बेहतर नहीं समझा। सूत्र बताते हैं वे जनता से सीधे आत्मीय जुड़ाव रखते हैं, इसलिए वे दिखावे की राजनीति नहीं करते हैं। हेमंत की सादगी को करीब से जानने वाले बताते हैं कि वे दिखावे पर नहीं, काम पर विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि कभी भी पद पर होने का घमंड नहीं करते। इसी वजह उन्हें सारे जनप्रतिनिधियों में सबसे अच्छा स्थान जिले की राजनीति में मिला हुआ है।

इनके वाहनों पर नेमप्लेट, कुछ के पास गनमैन भी

सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसके अनुसार विधायक अपने वाहनों में हुटर नहीं लगवा सकते हैं। नियम के अनुसार उन्हें विधायक भी लिखने की पात्रता नहीं है, लेकिन कई जगह पहचान न होने के कारण यह परंपरा आम हो गई है। बैतूल विधायक को छोड़कर जिले के सांसद दुर्गादास उइके(केंद्रीय राज्यमंत्री), आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे, मुलताई विधायक चंद्रशेखर देशमुख, घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा उइके ने भी अपने वाहनों पर अपना पद लिखवाया हुआ है।

यह बात दीगर है कि अपने क्षेत्र के लोग इन्हें चेहरे से जानते हैं, फिर ऐसी क्या जरूरत पड़ रही है कि वाहनों पर पद लिखवाना पड़े? हालांकि इन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा गार्ड भी ले रखा हुआ है। इसके वे पात्र जरूर है, लेकिन हेमंत ने सुरक्षा गार्ड भी नहीं लेकर ऐसी मिसाल पेश की है, जिससे दूसरे विधायक प्रेरणा ले सकते हैं, लेकिन इसकी संभावना कम दिखाई देती है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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