Betul News: 1 घंटे में 30 क्यूबिक मिक्चर होगा तैयार, 25 साल टिकी रहेगी सड़क
Betul News: 30 cubic mixture will be ready in 1 hour, the road will last for 25 years

वाइट टापिंग सड़क निर्माण के लिए पहुंची हाईटेक मशीनें
Betul News: बैतूल। विधायक हेमन्त खंडेलवाल के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल लल्ली चौक से कोतवाली तक की सड़क जल्द साकार रूप लेने जा रही है। आधुनिक तकनीक से बनाई जा रही इस सड़क के निर्माण के लिए बड़ी हाईटेक मशीनें बैतूल पहुंच चुकी हैं। बताया जा रहा है कि लगभग 500 मीटर की इस सड़क की उम्र करीब 25 साल होगी।पूर्व में इस सड़क को चौड़ा कर डामरीकरण कराया जाना था, लेकिन बढ़ते ट्रेफिक और यहां रहने वाले लोगों की सुविधा को हमेशा हमेशा खत्म करने के उद्देश्य से ही यह सड़क विधायक हेमन्त खण्डेलवाल ने वाइट टापिंग में तब्दील करवाया था। अब कुछ ही दिनो के भीतर उबड़ खाबड़ सड़क की जगह नई चमचमाती सड़क यहां नजर आने लगेगी।

1 घंटे में 30 क्यूबिक मीटर मिक्चर होगा तैयार
वाइट टापिंग सड़क निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा कराया जा रहा है। सड़क का ठेका भोपाल के कपिल शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया है। कम्पनी द्वारा भारीभरकम आधुनिक मशीने भेजी गई हैं। इन मशीनों को रेस्ट हाउस परिसर में रखा है। मशीनों के साथ आए सुपरवाइजर ने बताया कि बड़े ट्राले में मशीन का स्ट्रक्चर लाया गया है। मिक्चर कैप्सूल स्ट्रक्चर पर फिक्स किया जाना है। मशीनों का जल्द ही इंस्टालेशन कराया जाएगा। मशीन की क्षमता देखी जाए तो 1 घण्टे में करीब 30 क्यूबिक मीटर मिक्चर तैयार किया जा सकता है। इसे किलो में कन्वर्ट करें तो मात्र एक घण्टे के भीतर 72 हजार किलो मिक्चर तैयार हो जाएगा। मशीने आने के बाद अब प्लांट तैयार करने की कवायद की जा रही है। हालांकि काम कब तक शुरू होगा इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी है।
बार-बार की मरम्मत से मिलेगी मुक्ति, ईंधन की भी होगी बचत
अभी तक सड़कों के क्या कल्प में या तो सीमेंट कांक्रीट की सड़कें बन रही थी या फिर डामर युक्त सड़कों का निर्माण कराया जा रहा था, लेकिन आधुनिक तकनीक और संसाधनों से तैयार की जाने वाली यह सड़क जिले की उत्कृष्ट सड़को में गिनी जाएगी। दरअसल बॉन्डेड व्हाइटटॉपिंग में डामर फुटपाथ से जुड़ी 5 से 15 सेमी (2-6 ) की मोटाई का उपयोग किया जाता है और इसे दो प्रकारों में विभाजित किया जाता है, पतला और अल्ट्राथिन । डामर को बनावट देकर बॉन्ड बनाया जाता है।
पतली व्हाइटटॉपिंग में कंक्रीट की एक बॉन्डेड परत का उपयोग किया जाता है जो 10-15 सेमी (4-6 ) मोटी होती है जबकि एक अल्ट्राथिन परत 5 से 10 सेमी (2-4 ) मोटी होती है। इसे जरूरत के हिसाब से घटाया बढ़ाया भी जा सकता है जिससे सड़क को संरचनात्मक मजबूती मिलती है।यह तकनीक ईधन की भी बचत होती है। कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। सड़क पर पानी रुकने के बावजूद इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और न ही सड़कों में गड्ढे हो पाते हैं। कुल मिलाकर यह सड़क आम जनता को मिलने वाली बेहतरीन सौगात के रूप में सामने आएगी।




