Betul Ki Khabar: 8 वार्ड बॉय के भरोसे 300 बिस्तरीय जिला अस्पताल
Betul Ki Khabar: 300 bedded district hospital dependent on 8 ward boys

परिजन खीचते रहते है स्ट्रेचर, वर्षों से कोई भर्ती नहीं
Betul Ki Khabar: बैतूल। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों की परेशानियां कम होने का नाम हीं नहीं ले रही है। आए दिनों मरीज और उनके परिजनों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। इसका प्रमुख कारण जिला अस्पताल में स्टॉफ की कमी है। एमरजेंसी की स्थिति में परिजनों को स्टे्रचर की सुविधा तक नहीं मिल पाती है।
जिला अस्पताल में स्टे्रचर पर मरीजों को लेजाने के लिए वार्ड बॉय तो है, लेकिन मरीजों के परिजनों की सहायता के बगैर कोई काम नहीं होता। परिजनों को स्ट्रेचर खीचते हुए मरीज को वार्ड तक लेजाना पड़ता है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक करोड़ों की लागत से बने 300 बिस्तरीय जिला अस्पताल में लगभग 24 से 25 वार्ड बॉय होने चाहिए, लेकिन जिला स्पताल में लगभग 8 ही वार्ड बॉय मौजूद है।
इतने कम वार्ड बॉय होने के कारण आए दिनों अस्पताल की व्यवस्था बिगड़ जाती है। देखने में आता है कि जब मरीज उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचते है तो अधिकतर मरीजों के साथ परिजन स्ट्रेचर खीतचते हुए दिखाई पड़ते है। वार्ड बॉय मौजूद तो रहे है, लेकिन दूसरे कामों में लगे रहते है। जिला अस्पताल में वार्ड बॉयों की संख्या बढ़ती है तो व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है।
तीन मंजि़ला जिला अस्पताल में देखने में आता है कि मरीज ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल तक परिजन लेकर जाते है। थोड़ी राहत की बात यह है कि जिला चिकित्सालय में लिफ्ट होने से राहत मिल जाती है। मरीज को सिटी स्टेन, एक्स-रे इत्यादि जांच कराने स्ट्रेचर पर मरीजों के परिजन लेकर जाते है। हाल ही में कुछ महीनों पहले नये नियम लागू किए, जिसमें मरीज के साथ जिला अस्पताल में केवल एक ही परिजन रह सकते है। स्ट्रेचर खीचते हुए मरीज को लेजाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, उस समय परेशानी बड़ जाती है जिस टाईम मरीज के साथ महिला अंटेंडर रहती है।

गंभीर मरीजों को रिसीव करने में हो जाती है देरी
वार्ड बॉय की कमी के कारण कई बार गंभीर मरीजों को रिसीव करने में देरी हो जाती है, जब एम्बुलेंस मरीज को जिला अस्पताल लेकर आती है तो उस समय वार्ड बॉय मौजूद नहीं होते। मरीज को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वार्ड बॉय किसी दूसरे मरीज को वार्ड लेकर जाते है तो मुख्य गेट के पास वार्ड बॉय नहीं रह पाते, जिससे मरीज और परिजनों को परेशान होना पड़ता है।
अस्पताल में वार्ड बॉय के कई पद खाली है, लेकिन भर्ती नहीं हो पाई है। फंड की कमी के कारण आउट सोर्स से वार्ड बॉय की नियुक्ति नहीं हो पाती है। अस्पताल में पर्याप्त वार्ड बॉय रहने पर बेहतर व्यवस्था बनाई जा सकती है। कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पताल प्रशासन भी व्यवस्था नहीं बना पा रहा है। जिला अस्पताल में कर्मचारियों की कमी और व्यवस्था को लेकर सिविल सर्जन डॉ. जगदीश घोरे से चर्चा करने के लिए उनके मोबाईल पर संपर्क किया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।




