Aayushman Yojana Benifits: 16 वर्षीय किशोरी को लकवा, कोमा में जाने के बाद भी बच गई जान
आयुष्मान योजना ने बढ़ाई नाबालिग आदिवासी बालिका की आयु, डॉक्टर ने भी जान बचाने किए खूब जतन

Aayushman Yojana Benifits: बैतूल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आयुष्मान योजना उन गरीब- कमजोर वर्ग के लिए वाकई वरदान साबित हो रही है, जिनके परिजन आर्थिक अभाव मे महंगा उपचार नहीं करवा पाते हैं। ऐसे में मरीजों की जान पर भी बन आती है।
छिंदवाड़ा जिले की जुन्नारदेव तहसील अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव में रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी की आयु बढ़ाने में आयुष्मान योजना ने संजीवनी का काम कर दिया। पूरे 13 दिन के अथक प्रयास का ही नतीजा है कि जो नाबालिग लकवे का शिकार होकर मरणासन्न हालत में लिंक रोड सदर के एक निजी अस्पताल में आई थी।
अब वह न सिर्फ पूर्व की तरह चल पा रही है, बल्कि खोई हुई आवाज वापस आकर सामान्य बातें भी कर रही है। किशोरी के पालकों और परिजन अब बेटी को स्वस्थ देखकर काफी राहत महसूस कर रहे हैं। इनके चेहरों पर मंडराने वाले चिंता के बादल अब छंट चुके हैं। वे प्रधानमंत्री की आयुष्मान योजना की मुक्तकंड से तारीफ किए बिना नहीं रह रहे हैं।
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Aayushman Yojana Benifits : लकवे के कारण साइड इफैक्ट, ब्रेन ने भी काम करना किया बंद
दरअसल 19 जनवरी को जुनारदेव तहसील में रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी को मरणासन्न हालत में शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। किशोरी की माता ने बताया कि लकवे के चलते बेटी का इलाज भगत भुमका से भी कराया गया था, लेकिन दिनबदिन हालत बिगड़ती ही चली गई। उसे झटके आने शुरू हो चुके थे। जिस दिन अस्पताल लाया गया ऐसा नहीं लग रहा था कि बेटी जिंदा वापस घर जा पाएगी।
बेहोशी की हालत में शरीर के बाएं हिस्से ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया था। बेटी की बोलचाल तक बन्द हो चुकी थी, खाना पीना छूट चुका था। इलाज के लिए पैसे तक कम पड़ रहे थे। ऐसे में डॉक्टर ने हिम्मत दी और अपना उपचार शुरू किया।
पूरे 13 दिन इलाज के बाद बेटी की हालत में जो सुधार आया है वो किसी चमत्कार से कम नहीं है। ऐसा लग रहा था कि हमारी बेटी जिंदगी की जंग हार जाएगी, लेकिन कामयाबी मिली और बेटी जिंदगी की जंग जीत गयी। हमारी बेटी अब बोल सकती है, चल फिर सकती है और पूरी तरह चैतन्य अवस्था मे आ चुकी है। बड़ी बात ये है कि, आयुष्मान योजना की वजह से हमें आर्थिक परेशानी तक नहीं झेलना पड़ा। वे बताती है कि बेटी को नया जीवन देने वाली इस योजना के अलावा बचाने वाले डाक्टर भी खासा योगदान हैै।
Aayushman Yojana Benifits : भगत भुमका से किया तौबा, डॉक्टरी इलाज पर किया भरोसा
अपनी बेटी के स्वस्थ होने के बाद खुशी से लबरेज माता ने बताया कि बेटी को लकवा होने के बाद गांव के समीप ही रहने वाले एक भगत से उसका इलाज शुरू करवाया था, लेकिन बेटी की हालत सुधरने के बजाय और ज्यादा बिगड़ती जा रही थी। फिर किसी ने अस्पताल का पता देकर बैतूल भेजा। यहां पर मात्र 13 दिन के इलाज के बाद ही बिटिया पूरी तरह स्वस्थ हो गई। रोजाना शरीर मे सुधार आना शुरू हो गया और आज उसे रूटीन चेकअप के लिए हम अस्पताल भी लेकर गए थे। जहां डॉक्टर ने जांच कर बेटी के अब पूरी तरह स्वस्थ होने की जानकारी दी।
परिजनों से बार बार अस्पताल का नाम पूछा गया, लेकिन काफी सोचने विचारने और याद करने के बाद वे इतना ही बता सके कि बेटी का इलाज किसी लिंक रोड स्थित एक अस्पताल में कराया गया था। खैर जिस भी अस्पताल में इलाज हुआ हो, लेकिन आयुष्मान योजना और डॉक्टर के अथक प्रयास से आज एक बेटी की जान बच सकी यह किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा सकता ।




