Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: आखिर साहब पत्नी प्रेम के आगे इतने बेबस क्यों?? तबादला होने के बाद मोहतरमा क्यों बच गई कुर्सी और कैसे मिल गया अभयदान??? साहब को पद मिला, लेकिन निगरानी करने किसे बैठाया ?????? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में

Prashasnik Kona: Administrative Corner: After all, why is the wife so helpless in front of love? Why did Mohtarma save her chair after transfer and how did she get immunity?

साहब पत्नी प्रेम के आगे इतने बेबस क्यों?

एक निकाय के साहब अपनी पत्नी की डिमांड और जिद के आगे इतने नतमस्तक हो गए है कि उन्हें नियम- कायदों का तक ध्यान नहीं है। वैसे मैडम की डिमांड कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में उन्होंने एक ऐसी डिमांड कर डाली जिससे साहब की परेशानी बढ़ गई है। दरअसल यह साहब अभी किराए के मकान में रह रहे है। पुराने साहब ने हाल ही में लंबे चौड़े क्षेत्र में फैले बंगले को खाली किया है, लिहाजा अब इन्हें यहां रहना था, लेकिन चर्चा है कि निरीक्षण के दौरान साहब को तो बंगला पसंद आ गया, लेकिन मैडम को बिल्कुल नहीं। फिर क्या था, नए बंगले की तलाश में निकाय के अमले को लगा दिया गया।

अंत में मैडम को बंगले के लिए ऐसी जगह पसंद आई, जहां पहले से एक कार्यालय संचालित हो रहा है। साहब ने नियमों को ताक पर रख अधीनस्थों को कार्यालय खाली करने का फरमान जारी कर दिया। ऐसे में कर्मचारियों को सांप सूंघ गया। हालांकि मामला बढ़ता देख मैडम की डिमांड को अभी किनारा कर दिया है। चर्चा है कि मामले को ठंडे बस्ते में जाने के बाद साहब फिर नया पैतरा खेलने वाले है। बताते चले कि यह साहब कुछ माह पहले ही एक बड़ी रकम देकर प्रमुख निकाय में पदस्थ होने में सफल हुए है। उनके बारे में कहा जाता है कि जहां भी पदस्थ रहे निकाय के धन को ठिकाने लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इसी ट्रैक रिकॉर्ड के कारण नौकरी के चंद वर्षो में 4 से अधिक जगह पदस्थ रह चुके है।

आखिर मोहतरमा को मिला फिर अभयदान

प्रशासनिक अमले की एक महिला अधिकारी को पिछले दिनों बड़े साहब ने शिकायत मिलने के बाद हटाकर दूसरी जगह पदस्थ करने के फरमान जारी कर दिए। इसको लेकर प्रशासनिक गलियारों में खूब चर्चा होते रही। हालांकि एक नेता से सांठगांठ और लेनदेन के आरोप में उनका तबादला जिस जगह किया, वहां के साहब का काम काफी बेहतर था, इसलिए चूक को सुधार कर मैडम को किसी दूसरे अनुविभाग में भेजे जाने की चर्चा थी, लेकिन इस बीच खबर चल पड़ी कि मैडम को अभयदान और कार्यप्रणाली सुधारने की नसीहत देकर फिलहाल एक मौका दे दिया है। फिलहाल मैडम अभयदान मिलने पर फीलगुड महसूस कर रही है।

मेरा क्या कसूर???

लोगों के स्वास्थ से जुड़े 1 साहब के तेवर इन दिनों बदले-बदले है। कुछ माह पहले उन्हें विभाग के मुखिया के रिटायर होने पर कुर्सी मिल गई। इसके बाद वे निर्माण कार्य से जुड़े विभाग के मुखिया अपने मामा से सीधे सोर्स लगाकर बंगले की लाखों रुपए देकर रंग रोगन कराने में भी कामयाब हो गए, लेकिन यहां मीडिया में मामला आने के बाद मुंह की खानी पड़ गई। यह मामला थमा ही नहीं था कि एक जनप्रतिनिधि ने रिटायर होने वाले साहब को अपना प्रतिनिधि बनाकर नजर रखने को कहा। चूंकि यहां मलाई काफी खाने मो मिलती है, ऐसे में जिम्मेदारी के ऊपर एक और जिम्मेदार आने से यह साहब कहते फिर रहे है कि आखिर मेरा कसूर क्या था?

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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