कॉलेज में करोड़ों के फर्जीवाड़े के आरोपी प्राचार्यों को पुलिस का अभयदान!
9 दिन चले अढ़ाई कोस की तर्ज पर काम कर रही बैतूल पुलिस

बैतूल। पीएमश्री जेएच कॉलेज में ग्रामीण छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में करोड़ों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद प्रशासन तो अपना काम कर चुका, लेकिन जैसे ही गेंद पुलिस के पाले में पहुंची तो मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यह आश्चर्यजनक है कि पूरे 2 करोड़ रुपए से अधिक का फर्जीवाड़े को पुलिस इतने हल्के में आखिर क्यों ले रही है। तत्कालीन प्राचार्य राकेश तिवारी और विजेता चौबे के नाम आज तक एफआईआर में दर्ज नहीं हो सके। पुलिस जांच का ढिंढोरा जरूर पीट रही है, लेकिन हद तो तब हो गई जब एसडीओपी को इसकी जांच का जिम्मा सौंपा गया। करीब 10 दिन बीत जाने के बाद न ही पुलिस इस गम्भीर मामले की जांच कर पाई है और न ही प्राचार्यों के नाम एफआईआर में दर्ज किए जा सके हैं। इससे साफ है कि पुलिस दबाव में जानबूझ कर इस मामले को ठंडा करने के प्रयास कर रही है।
500 मीटर की दूरी तय करने में पुलिस कर रही परहेज
प्राचार्यों के खिलाफ जांच में देरी किया जाना और अब तक एफआईआर में दोनों के नाम शामिल न होना, पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है। खास बात तो यह है कि मामला लाखों का नहीं बल्कि करोड़ों से जुड़ा हुआ है। तत्कालीन प्राचार्य राकेश तिवारी और विजेता चौबे दोनों इस फर्जीवाड़े में संदिग्ध माना हैं। जांच प्रतिवेदन सामने आने के तत्काल बाद ही प्राचार्य डॉ मीनाक्षी चौबे ने दोनों प्राचार्यों के खिलाफ एफआईआर का आवेदन गंज थाने में दे दिया था, लेकिन पुलिस जांच के नाम पर पिछले 10-12दिनों से इस मामले को लटकाए हुए है। इस फर्जीवाड़े की जांच की जिम्मेदारी एसडीओपी बैतूल शालिनी परस्ते को दी है। एसडीओपी कार्यालय से जेएच कालेज की दूरी मात्र 500 मीटर से ज्यादा नहीं है, लेकिन पुलिस आज तक कालेज नहीं पहुंची है। इस गम्भीर मामले में पुलिस आखिर इतनी लेटलतीफी क्यों बरत रही है? इसके पीछे की वजह तो पुलिस अधिकारी ही जाने, लेकिन हर मामले के खुलासे के प्रेस नोट प्रकाशित करने वाली पुलिस की भूमिका इस मामले में संदिग्ध नजर आ रही है।
जांच में ढिलाई फोन उठाने में भी दिक्कत
इस पूरे मामले को सबसे पहले सांझवीर टाईम्स ने उजागर किया था। इसके बाद लगातार चली प्रशासनिक जांच में तीन बाबू सहित प्राचार्य दोषी ठहराया गया। तीन बाबुओं के खिलाफ तो पुलिस ने बिना देरी और जांच किए आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया, लेकिन प्राचार्यों के लिए जांच का पेंच फंसाना गले से नीचे नहीं उतर रहा है। पुलिस जांच कहां तक पहुंची, जांच शुरू की भी गई है या नहीं? अब तक यह सामने नहीं आ सका है।
मामले को लेकर चर्चा करने के लिए एसडीओपी शालिनी परस्ते के सरकारी मोबाइल नम्बर 7049135459 पर कई बार काल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं गंज थाना प्रभारी का कहना है कि प्रकरण अभी जांच में है जांच के बाद ही कार्यवाही तय की जाएगी। हां यह जरूर है कि इस संवेदनशील मामले में एसपी निश्चल एन झारिया ने आश्वस्त किया है कि जांच को लेकर वह अधीनस्थ अधिकारियों से गम्भीरता से चर्चा कर कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।
इनका कहना….
आज विभागीय बैठक रखी गई है। बैठक के दौरान इस मामले की जांच पर संबंधित से चर्चा की जाएगी।
निश्चल एन झारिया, एसपी बैतूल
प्रकरण की जांच एसडीओपी मैडम कर रही हैं। जांच के बाद कार्यवाही तय की जाएगी।
अरविंद कुमरे, थाना प्रभारी गंज थाना बैतूल




