Politics: राजनीतिक हलचल: पोस्टकार्ड की राजनीति के क्या है मायने?? नदी परिक्रमा से कौनसे नेता नई राह की उम्मीदें??? दो सीनियर नेताओ के बीच जबरदस्त जुगलबंदी के राजनीति में आखिर क्यों हो रही चर्चा????? विस्तार से पढ़िए हमारे कॉलम राजनीतिक हलचल में…..
Politics: Political stir: What is the meaning of postcard politics?? Which

पोस्टकार्ड की राजनीति के निकल रहे मायने
पिछले कुछ दिनों से शहर की राजनीति में एक चर्चा छिड़ी हुई है। दरअसल एक पार्टी के नेता को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चाओं के बीच कुछ नेतानुमा और ठेकेदार लोग विपक्षी पार्टी के पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ सांठगांठ कर पोस्ट कार्ड अभियान छेड़ रखा है। इनका मकसद क्या है, यह तो वे ही जाने, लेकिन चर्चा है कि किसी भी हाल में प्रदेश स्तर का पद उन नेता को नहीं देने के खिलाफ यह अभियान चलाए जाने की चर्चा है। राजनीति में फूट डालो वाली कहावत को चरितार्थ पार्टी से ही जुड़े कुछ लोग विपक्षी पार्टी के एक बड़े नेता के साथ इस अभियान को गति देने में लगे हैं।
चर्चा है कि पिछले एक पखवाड़े से केंद्रीय नेतृत्व को पोस्ट कार्ड भेजकर बताने का प्रयास कर रहे हैं कि बड़े नेता को जिम्मेदारी दी जा रही है, इससे पार्टी को नुकसान होगा। आखिर बड़ी जिम्मेदारी देने पर विरोधियों के पेट में मरोड़ कैसे आई? इसके गुणा-भाग लगाने वाले गठबंधन की राजनीति कह रहे हैं। इसमें पक्ष-विपक्ष के जनप्रतिनिधियों की गहरी सांठगांठ की चर्चा भी हो रही है। कहा जा रहा है कि एक सुरक्षित विधानसभा में भी यही लोग पूर्व चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के लिए चल रहे नामों का खुलकर विरोध कर फूट डालो शासन करो वाली राजनीति अपना चुके हैं, लेकिन मर्तबा जिले को मिलने वाले पद पर पोस्टकार्ड अभियान छेड़कर राजनीति का स्वरूप बदल दिया है।
नदी परिक्रमा से नई राह की तलाश
जिले के सत्तारूढ़ पार्टी के एक वरिष्ठ नेता इन दिनों एक पवित्र नदी की परिक्रमा कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से वे इस नदी के अलग-अलग स्थलों की परिक्रमा अपनी टीम के साथ कर रहे हैं। उनकी इस परिक्रमा के चर्चे होने स्वभाविक है। दरअसल पूर्व में वे एक विधानसभा से टिकट की दावेदारी भी जता चुके हैं, लेकिन तमाम कवायदों के बावजूद उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी। संघ के निकट होने का भी उन्हें फायदा नहीं मिला।
हालांकि राजनीति में उन्हें पूर्व सरकार में एक महत्वपूर्ण पद से नवाजा जा चुका है, लेकिन उसके बाद उन्हें सम्मानजनक पद नहीं मिला। यही वजह है कि वे नई राह तलाशने के लिए वे एक महत्वपूर्ण नदी की परिक्रमा कर रहे हैं। उनकी यात्रा के कई राजनैतिक मायने निकाले जा रहे हैं। बताते चले कि वरिष्ठ नेता खुद एक पवित्र नदी की नगरी से ताल्लुकात रखते हैं।
इनके तालमेल ने बढ़ाई सरगर्मी
इन दिनों जिले के दो माननीयों के बीच जबरदस्त तालमेल चल रहा है। कई छोटे और बड़े मामलों में मिलकर प्रयास करने का ही नतीजा है कि जिले की विकास की राह को नए पंख मिल सकते हैं। वरिष्ठता में दोनों ही माननीय की अलग-अलग क्षेत्रों में काफी पकड़ है।
यही वजह है कि जिले में होने वाले कई प्रमुख कामों के लिए दोनों के बीच पिछले कुछ दिनों से न सिर्फ बात हो रही, बल्कि तालमेल स्थापित कर उसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चाहे जिले के विकास से जुड़ी बात हो या प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति का मामला हो, इनके बीच जबरदस्त तालमेल स्थापित हुआ है। दोनों माननीयों की जुगलबंदी के एक बार फिर राजनीति में मायने निकल रहे हैं, लेकिन चर्चा है कि विकास की राह दोनों के तालमेल से काफी आसान हो सकती है। इनमें से एक माननीय वरिष्ठ है तो दूसरे भी युवा होने के साथ सक्रिय कहे जाते हैं।




