Today Betul News: गरीबों की पेट की भूख शांत करते करते बीत गए 1 हजार दिन
Today Betul News: 1 thousand days spent in satisfying the hunger of the poor

रेलवे स्टेशन पर रोजाना गरीबों को भोजन कराने का रोटी बैंक निभा रहा फर्ज
Today Betul News: बैतूल। यह शास्वत सत्य है कि प्रकृति की रचना करने वाले ईश्वर इंसान को भूखा जगा तो देते हैं, लेकिन भूखा सुलाते नहीं हैं। गरीबों के पेट की इसी चिंता को दूर करने के लिए समाजसेवी संस्था पिछले लंबे समय से रेलवे स्टेशन पर खुले आसमान के नीचे रहने वाले बेसहारा गरीबों के पेट की आग बुझा रही हैं। भीषण गर्मी हो या फिर तेज बारिश या फिर कड़ाके की ठंड। संस्था से जुड़े समाजसेवी गरीबों को पेट भर भोजन कराने से नहीं चूकते। रोटी बैंक के इस पुनीत कार्य से अब आम लोग भी जुड़ चुके हैं। हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके भी इस पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता दर्ज कराए जाने से अपने आप को रोक नहीं सके तो वहीं आमजन भी अपने सगे संबंधियों के जन्मदिवस, जन्म जयंती या फिर खास मौके पर गरीबों को भोजन कराए जाने के लिए स्वेच्छा से अपना योगदान दे रहे हैं। रोटी बैंक को अपनी सेवाएं देते देते पूरे 1 हजार दिन गुजर चुके हैं। अब संस्था पूरी तरह अपने उद्देश्य को लेकर कामयाब महसूस कर रही है।

रात 8 बजे बैठती हैं रेलवे स्टेशन पर गरीबों की पंगत
रोटी बैंक के चेयरमैन आर के विजयकर बताते हैं कि गरीबों के पेट की भूख मिटाए जाने का यह सफर 21 अगस्त 2021 से शुरू किया गया था। शुरुआती दौर में रोटी बैंक संस्था के वाइस चेयरमैन एस ब्राम्हणे के साथ- साथ केवल 5 लोग जुड़े थे, लेकिन जैसे-जैसे लोगों को इस पुनीत कार्य के संचालन की जानकारी मिलती गई रोटी बैंक का कारवां भी बढ़ता चला गया। गरीबों के पेट की भूख शांत करते करते आज पूरे 1 हजार दिन बीत चुके हैं। अब हालात यह हैं कि आम लोगों का भी संस्था को पूरा योगदान मिल रहा है। लोग स्वेच्छा से संस्था के पदाधिकारियों को फोन कर इस पुनीत कार्य में हिस्सेदार बनने की पेशकश करते हैं। गरीब के पेट की चिंता करने वालों की आज कोई कमी नहीं है। रोजाना भोजन का इंतजाम कैसे हो जाता है, पता ही नहीं चलता। हम खुशकिस्मत हैं कि हम हमारे साथ हमारे शहर के लोगों को भी इस सौभाग्यशाली कर्म से जोड़ पाए हैं।
गरीब को भोजन करता देख परम सुख की होती है प्राप्ति
संस्था के वाइस चेयरमैन एस ब्राम्हणे बताते हैं कि पेट की आग क्या होती है? यह भूख से बिलखते हुए लोगों के अलावा शायद ही कोई जानता होगा। रात्रि 8 से 8.30 के बीच जब संस्था के पदाधिकारी भोजन लेकर रेलवे स्टेशन पर पहुंचते हैं तो गरीब की लालसा स्वत: देखने को मिलती है। सभी को सम्मान के साथ एक लाइन में बैठाया जाता है। इसके पश्चात भोजन परोसा जाता है। ब्राम्हणे कहते हैं कि जिस वक्त गरीब भोजन कर रहा होता है, उस वक्त यह महसूस होता है कि गरीब की आत्मा पूरी तरह तृप्त हो चुकी है, उस क्षण यह भी महसूस होता है कि हमारे माध्यम से किया जा रहा यह पुण्य कार्य स्वयं ईश्वर ही हम से करवा रहे हैं। हमारा यह प्रयास सतत रूप से आगे बढ़ता रहेगा। संस्था ने आम लोगें से अपील है कि अपने खुशी के पलों को यादगार बनाने के लिए बेकार के खर्चों से बचते हुए इन गरीबों को भोजन करना ज्यादा उचित है, ताकि ईश्वर की इक्षा के मुताबिक हम गरीबों की दुआएं हासिल कर सकें।





