Betul Ki Khabar: ऑपरेटरों के सरगना चैतू के पास फर्जी खातों की परमानेंट सूची
Betul Ki Khabar: Operators' kingpin Chaitu has a permanent list of fake accounts

सीसीएफ के जांच आदेश भी हवा हवाई, वरिष्ठों के निर्देश दरकिनार
Betul Ki Khabar: बैतूल। वन विभाग के उत्तर-दक्षिण और पश्चिम वन मंडल सहित उत्पादन के 10 कंप्यूटर ऑपरेटरों की अनियमित्ताओं को लेकर आए दिन चर्चाएं तेज होती जा रही हैं। विभाग के एक तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी पीजी फुलझेले के आदेश के बाद भी इन कथित आपरेटरों को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जाना सन्देह के घेरे में है। सूत्र बताते हैं कि विभाग में वर्षों से जमे इन ऑपरेटरों ने अधिकारियों की छत्रछाया में कई फर्जी खातों का नेटवर्क खड़ा कर लिया है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि इन खातों की एक परमानेंट सूची ऑपरेटरों के सरगना किसी चैतू के पास मौजूद है, जिसके जरिए विभागीय लेन-देन और फाइल पासिंग के नाम पर बड़े बड़े खेलों को अंजाम दिया जा चुका है। पूर्व में इस मामले की जांच कराए जाने की बात मौजूदा सीसीएफ ने की थी, लेकिन जांच समिति में किन अधिकारियों को शामिल किया गया, अभी तक जांच प्रतिवेदन क्यों नहीं मिला, आपरेटरों पर कार्यवाही कब तक होगी? यह तमाम ऐसे सवाल हैं जो अब उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
इससे साफ है कि पूरी व्यवस्था में विभाग के हित की बजाए केवल व्यक्तिगत लाभ को ही महत्व दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि चैतू के पास 40 से 45 फर्जी खातों की सूची मौजूद है। जिसे समय-समय पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। खाते तो फर्जी हैं, साथ ही बिलिंग से लेकर भुगतान तक में भी गड़बड़झाला होने की बात सुनाई दे रही है। इसके बावजूद अभी तक अधिकारी ठोस कार्रवाई करने से क्यों बच रहे हैं, यह समझ से परे है। सूत्रों का कहना है कि जांच को जानबूझकर लंबित रखा गया है, ताकि समय बीतने के साथ सब कुछ दबा दिया जाए।
नतीजा यह है कि विभाग की छवि लगातार धूमिल हो रही है और सरकारी राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। आखिर कब तक फर्जी खातों और भ्रष्टाचार की इस व्यवस्था पर पर्दा डाला जाएगा। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह नेटवर्क और ज्यादा मजबूत होकर विभाग की जड़ें खोखली कर देगा।हालांकि कार्यवाही न होने की दशा में अब जल्द ही इस पूरे मामले की शिकायत तत्कालीन मुख्यवनसंरक्षक पीजी फुलझेले के निर्देश की कॉपी के साथ सीएम हेल्पलाइन , वित्त एवं बजट और प्रधान मुख्य वन संरक्षक से की जा रही है।




