Politics: राजनीतिक हलचल: पार्टी छोड़ने वालों को आखिर क्यों नहीं मिली तवज्जो?? तबादला एक्सप्रेस शुरू होने के पहले किसने बढ़ाई अधिकारियों से मेल- मुलाकात??? कौनसा वार्ड आने वाले समय में नेताओं के लिए बनेगा प्रतिष्ठा का प्रश्नचिन्ह???? पढ़िए विस्तार से हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……
Politics: Political stir: Why did those who left the party not get attention??

पार्टी छोड़ने वालों को नहीं मिल रही तवज्जों
एक पार्टी में पिछले कुछ दिनों से नाराजगी के स्वर फूट रहे हैं। एक आरक्षित विधानसभा के प्रमुख नगर में उपेक्षित नेताओं ने लंबे समय से तक पार्टी का झंडा उठाने के बाद जब इस्तीफा दिया तो बवाल मच गया। सभी को उम्मीद थी कि वरिष्ठता के कारण इन्हें मनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
चौकाने वाली बात तो यह है कि इस्तीफा देने वालों को असंतुष्ट धड़ा भी वजन देने को तैयार नहीं है। वे कहते फिर रहे हैं कि इस्तीफा देने वालों का जमीनी स्तर पर कुछ बचा ही नहीं था, इसलिए उनके सामने कोई विकल्प ही बचा नहीं था। राजनीति की इस उठापटक में इस्तीफा देने वाले घर के रहे न घाट के वाली कहावत से गुजर रहे हैं। भले ही उनके इस्तीफे पर संगठन ने कोई निर्णय नहीं लिया, लेकिन इसे वापस न लेने पर भी किरकिरी झेल रहे हैं। इस्तीफा देने वालों को उम्मीद है कि पार्टी कही न कही उनसे चर्चा करेंगी।
तबादलों के पहले अधिकारियों से बढ़ी मेल-मुलाकात
तबादलों की बारिश शुरू होने वाली है। इसके पहले ही चुने हुए जनप्रतिनिधि अपने पसंद के अफसरों को विधानसभा में पदस्थ कराने के लिए लाबिंग करने लगे हैंं। खबर है कि एक बहुसंख्यक समाज के अनारक्षित क्षेत्र के माननीय और सुरक्षित क्षेत्र के सबसे वरिष्ठ माननीय की जुगल जोड़ी ने हाल ही में बड़े साहब से मुलाकात कर अपने पसंद के अधिकारियों को पदस्थ करने की सूची सौंप दी है।
सुरक्षित क्षेत्र के माननीय ने तो अपने क्षेत्र में बढ़ रहा छात्रावास अधीक्षकों के दबदबे को कम करने के लिए एक दर्जन को हटाने की सिफारिश कर डाली। इसके अलावा अपने ही विधानसभा के जयस के जनाधार वाले प्रमुख ब्लॉक के बीएमओ और नर्सों को भी हटाने के लिए सिफरिश कर डाली। देखना यह है कि उनकी सिफारिश का कितना असर होता है या फिर अगले साल तक इंतजार करना पड़ेगा।
यह वार्ड बनेगा महासंग्राम का अखाड़ा
इस समय शहर में एक पार्षद के निधन के बाद सीट रिक्त हो चुकी है। कुछ समय बाद यहां पर चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो जाएगी। इसके पहले ही यहां दोनों ही पार्टी को लेकर प्रतिष्ठा की जंग देखने को मिलेगी। दरअसल इसी वार्ड के रहने वाले एक प्रमुख पार्टी के पदाधिकारी लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी पार्टी को बाय-बाय कह दिया था।
अब वे यहां से नई पार्टी के उम्मीदवार को जीत दिलाने और पसंद के उम्मीदवार खड़ा करने के लिए जोर लगाएंगे। उनका मुकाबला कभी अपने करीबी रहे एक पूर्व माननीय से होगा, जो लंबे समय तक इसी वार्ड में निवास कर रहे थे। कुल मिलाकर आने वाले समय में यह वार्ड प्रतिष्ठता का प्रश्न चिन्ह बन जाएगा। इसके लिए अभी से ताने-बाने बुने जा चुके हैं।





