अवैध कालोनी किसी और के नाम, बेच कोई और रहा
फजीवाड़े को अंजाम दे रहे भूमाफिया, अधिकारी भी बेपरवाह

बैतूल। जिले में अवैध कालोनियों को लेकर एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। कई नामी और दिग्गजों ने अपना नाम खराब न होने के लिए दूसरे के कांधे पर बंदूक रखकर गोली चलाने की रणनीति अपनाई है। कालोनाइजरों ने कई आदिवासियों की जमीन खरीदकर करीबी आदिवासी के नाम रजिस्ट्री कराकर बेचा जा रहा है। फ्रंट फुट पर तथाकथित कालोनाइजर ही सामने आकर शिकायत के बाद अधिकारियों से सांठगांठ करने में लगे रहते हैं, तब वास्तविकता सामनी आती है।
जानकार सूत्रों ने बताया कि बैतूल जिले में करीब आधा सैकड़ा से अधिक ऐसी कालोनियां चिन्हित की जा सकती है, जिनका उत्तराधिकारी कोई और बेच कोई और रहा है। पिछले दिनों कुछ क्षेत्र के एसडीएम और तहसीलदारों द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि अवैध कालोनियों में जो नोटिस जारी किए गए हैं, वे किसी और के नाम थे, लेकिन पर्दे के पीछे इसमें बड़े भूमाफिया शामिल है। सामान्य और अन्य वर्गों के लोगों ने यह जमीन खरीदकर करोड़ों के वारे-न्यारे कर दिए, लेकिन खरीदने वाले बाद में अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।
आदिवासियों को बनाया अस्त्र
सूत्र बताते हैं कि बैतूल जिला पांचवीं अनुसूची में शामिल होने के कारण यहां के आदिवासी वर्ग की जमीन सामान्य वर्ग को नहीं बेच पाता। इसके बावजूद पिछले पांच वर्षों में जिस तरह आदिवासियों की जमीन की खरीद फरोख्त हुई है। यह जांच का विषय हो सकता है। माफियाओं ने आदिवासियों की रोड टच जमीन खरीदने के लिए जबरदस्त दिमाग का उपयोग किया है। अपने परिचित आदिवासी या खेत में काम करने वालों के नाम पर करोड़ों की जमीन ले ली। उन्हें मालिकाना हक तो दिलवा दिया, लेकिन पर्दे के पीछे रजिस्ट्री करने से लेकर शिकायत होने पर असली भूमाफियाओं का चेहरा सामने आ रहा है।
सूत्र बताते हैं कि जिले में आधा सैकड़ा से अधिक आदिवासियों का अस्त्र बनाकर उपयोग कर जमीन उनके नाम खरीद ली है। भविष्य में यदि अवैध कालोनी पर कार्रवाई हो तो इन आदिवासियों पर कार्रवाई होगी। इस बात की जांच प्रशासन के अधिकारी करें तो कई फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।
पंजीयक आफिस के रिकार्ड दे सकते हैं गवाही!
जानकार सूत्रों ने बताया कि बैतूल जिले में जमीन खरीदने और बेचने के करोबार में कई दिग्गज और धनाड्य लोग जुड़े हैं। चूंकि आदिवासियों की जमीन औने-पौने दाम में खरीदकर किसी अन्य आदिवासी के नाम रजिस्ट्री होती है तो भूमाफियाओं को बड़ा फायदा होता है। इसी वजह पिछले पांच से सात सालों में कई आदिवासियों के नाम रजिस्ट्री हुई है। यदि प्रशासन के अधिकारी पंजीयक कार्यालय से यह रिकार्ड निकाले तो वास्तविकता सामने आ जाएगी।
बैतूल शहर के आसपास से लेकर अंचलों में तक आदिवासियों के नाम रजिस्ट्री की गई है। इस पर अवैध कालोनियां बनाई जा रही है। प्रशासन की जांच अभी जारी है। ऐसे में दो जून की रोटी के लिए मौताज आदिवासियों पर भी कार्रवाई की आंच होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस संबंध में कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से चर्चा करने के लिए कॉल किया, लेकिन व्यस्त होने के कारण उन्होंने मोबाइल रीसिव नहीं किया।




