Betul Ki Taza Khabar: ट्रायबल शिक्षक सुनील पवार और प्रशांत कोसे की आत्महत्या के लिए कौन जिम्मेदार?
Betul Ki Taza Khabar: Who is responsible for the suicide of tribal teachers Sunil Pawar and Prashant Kose?

ट्रायवल में एसी के संरक्षण में प्राचार्य डोनीवाल और लिपिक सोनारे की तूती के आरोप…
Betul Ki Taza Khabar:(बैतूल)। करोड़ों रुपये के बजट वाला जनजातीय कार्य विभाग इन दिनों एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में हुए फर्जीवाड़े को लेकर सुर्खियों में चल रहा है। सांझवीर टाईम्स में फर्जीवाड़े को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही है। इससे पूरे विभाग में हुए भ्रष्टाचार को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। सांझवीर की मुहिम का असर है कि विभाग में मौजूद अधिकारी अपनी आवाज बुलंद करने लगे हुए है। प्रताड़ित कर्मचारियों में भी अपने हक और अधिकारों के प्रति हिम्मत नजर आ रही है, जो विभाग के अधिकारियों और रसूखदार कर्मचारियों की प्रताड़ना का शिकार होने के बाद कार्यवाही न होने की दशा में तक हार कर अपने घर बैठ गए थे। ताजा मामला है ट्रायबल के अंतर्गत कार्य करने वाले उन दो शिक्षकों का जिन्हें अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने जैसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। इसकी शिकायत भी राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों से की गई,लेकिन कोई कार्यवाही नहीं कि जा सकी।
डोनीवाल और सोनारे पर प्रताड़ना का आरोप
शिकायतकर्ता सोहनलाल राठौर ने बताया कि एकलव्य आवासीय विद्यालय प्राचार्य एसके डोनीवाल और लेखापाल राजू सोनारे पिछले 20-25 वर्षो से जनजातीय कार्य विभाग में मनमानी कर रहे हैं। ट्रायबल विभाग में पदस्थ शिक्षकों को लगातार प्रताड़ित करना इनका शगल बन चुका है। उन्होंने बताया कि सहायक आयुक्त चाहे कोई भी आए इन दोनों कर्मचारियों की विभाग में तूती बोलती है। वर्तमान सहायक आयुक्त द्वारा इन दोनों को संरक्षण दिया जा रहा है, इससे पूरे विभाग के अधिकारी और कर्मचारी परेशान है।
बताया शिक्षकों की आत्महत्या का सच
राठौर ने शिकायत में बताया कि 7 से 8 साल पहले ट्रायबल शिक्षक सुनील पवार के साथ किया गया अत्याचार इसका उदाहरण है। जिसे विभागीय जांच से परेशान होकर आखिर फांसी लगाकर आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा था। जिसका परिवार आज भी न्याय की आस में अपनी जिंदगी के दिन गिन रहा है। ताजा मामला है ट्रायबल शिक्षक प्रशांत कोसे का जिस पर नकल प्रकरण को लेकर विभागीय जांच शुरू की गई थी। जांच अधिकारी भी एकलव्य शाहपुर प्राचार्य एसके डोनीवाल को सौंपी गई थी, लेकिन जांच के दौरान श्री कोसे को भी परेशान किया जाने लगा था। उनका तबादला जिला मुख्यालय से दूर किए जाने के साथ उनका वेतन तक नहीं निकलने दिया जा रहा था। तंग आकर प्रशांत कोसे को भी मौत का रास्ता अपनाना पड़ा लगभग 4 माह पूर्व उन्होंने आग लगाकर आत्महत्या कर ली इसे विडम्बना ही कहा जायेगा कि इन दोनों घटनाओं को लेकर न ही किसी प्रकार की कोई जांच की गई और न ही दोषियों के खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही की जा सकी है। श्री राठौर का आरोप है कि, प्राचार्य डोनीवाल और लेखापाल सोनारे द्वारा विभागीय जांच की आड़ में कर्मचारियों को प्रताधित किया जाता है। जिनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए।





