Betul Samachar: विवादित ढांचा आंखों से गिरने वाला दृश्य आज भी आंखों में कैद है
Betul Samachar: The scene of the disputed structure falling from the eyes is still captured in the eyes.

Betul Samachar: 6 दिसंबर 1992 को दोपहर 12 बजे से शाम 4.30 बजे तक का समय आज भी मुझे याद है। लगभग साढ़े चार घंटे का यह दृश्य आंखों में इसलिए कैद है, क्योंकि अति उत्साह में पूरे देश के कारसेवक अयोध्या में विवादित ढांचे को गिरा रहे थे, तब मैं वहां खुद मौजूद था। हालांकि भीड़ अधिक होने के कारण में चाहकर भी विवादित स्थल तक नहीं पहुंच पाया, इसका हमेशा अफसोस रहेगा, लेकिन करीब पहुंचने के पहले ही विवादित ढांचे को उत्साहित कार्यकर्ताओं ने जमीजोद कर दिया था। कार सेवकों की अपार भीड़ के कारण 6 दिसंबर को मेरा मन भी उत्साह से लबरेज था।
इससे पहले 30 नवंबर से 5 दिसंबर 1992 तक कारसेवक के रूप में अयोध्या में साथियों के साथ सेवा करने का मौका मिला, यह क्षण कभी भूला नहीं सकता। उस समय उम्र महज 24 वर्ष की रही होगी, लेकिन जज्बा 16 वर्ष के नवजवान जैसा लग रहा था। ट्रेन से जब साथियों के साथ अयोध्या के लिए रवाना हुए तो मन में कई तरह के विचार आ रहे थे। भाजपा से जुड़े रहने के कारण शुरू से ही भगवान राम का अनन्य भक्त था, इसलिए परिजनों की बात को दरकिनार करते हुए अयोध्या के लिए बढ़ गए थे। मेरे वृद्ध पिता भी भगवान राम के अनन्य भक्त है, उन्होंने मेरा हौसला अफजाई किया। साथ में गए साथी अलकेश आर्य, पूरन साहू, सुरेश श्रीवास एवं अन्य ने बखूबी साथ निभाया।
मुझे गर्व है कि जब विवादित ढांचा कार सेवकों ने गिराया था तब लाखों की संख्या में मौजूद कारसेवकों ने जिस तरह जय श्री राम के नारे लगाए थे, इससे राम नगरी अयोध्या गूंजमान हो गई थी। शाम को 6 बजे सेना के आने की जानकारी मिली तो हम लोग विवादित स्थल से फैजाबाद के लिए पैदल ही निकल पड़े। हमारा एक साथी चोट लगने से घायल भी हुआ, लेकिन भगवान राम की कृपा से पैदल चलने के दौरान जरा भी असर नहीं कर रही थी। जब बैतूल आए तो हमारा जो स्वागत किया, यह दृश्य आज भी भावुक कर देता है। लगभग 54 की उम्र हो गई है, बस भगवान श्रीराम का सानिध्य और आशीर्वाद मिलता है तो परिवार सहित एक बार फिर अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने की प्रबल इच्छा है। बात खत्म करते समय एक बार और कहना चाहूंगा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो काम किया है, इससे पूरे देश का सीना गर्व से फूल गया है, इसमें मैं भी शामिल हूं। उन्हें मेरी तरफ से कोटिश: नमन।
अंत में सबको जय-जय श्रीराम
(कार सेवक घुड़़न टिकारे ने जैसा सत्येंद्र सिंह परिहार को बताया)





