बैतूल पॉलिटिकल कॉलम: किन साहब की स्मार्ट आदत बनी पहचान को मोहताज?? इन मोहतरमा के अरमान आसुओं में बह गए…. इनका जिले से नहीं छूट रहा मोह, रिटायरमेंट के बाद ही जाने की इच्छा क्यों??? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…….
Betul Political Column: Which sir's smart habit became dependent on identity?? The desires of these ladies were washed away in tears.... They are not leaving the district, why do they want to leave only after retirement??? Read our famous column in the administrative corner.......

Betul Political Column: प्रशासनिक अमले में एक बड़े साहब वैसे तो पदस्थापना के बाद कभी-कभी जिले के निरीक्षण पर निकलते थे, लेकिन चुनावी साल में वे ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं। इनमें सबसे अधिक स्कूलों का निरीक्षण करना उनकी आदत में शुमार हो गया है। इस बीच दाड़ी रखने वाले इन साहब को स्मार्ट बनने की भी आदत लग गई। दौरे में अब साहब शर्ट के बदले टीशर्ट और चेहरे पर स्मार्टनेश के लिए गॉगल नहीं भूल रहे। अब भला वे स्कूलों में निरीक्षण के लिए पहुंच रहे तो स्टाफ और बच्चे भी उनकी पहचान को मोहताज हो रहे हैं। जब पता चलता है कि यह बड़े साहब है, तब और आदर-सत्कार मिलना शुरू हो पा रहा है। साहब को अचानक स्मार्ट बनने का भूत कैसे संवार हुआ, इसके पीछे की कहानी भी काफी अलग बताई जा रही है।
दिल के अरमान आंसुओं में बह गए
पुलिस विभाग में हालिया तबादले से ऊपर से नीचे तक फेरबदल हो गया है। विभाग की एक चर्चा में रहने वाली महिला अधिकारी को जिले में हालांकि लगभग पंद्रह माह का ही कार्यकाल बीता है, लेकिन उनकी रवानगी के चर्चें भोपाल तक थे। खबर आई थी कि उन्होंने ने अपने राजनैतिक आकाओं का पावर दिखाते हुए होने वाले तबादले पर अघोषित रोक लगा दी। बैतूल आने के बाद वे फुले नहीं समा रही थी और कहते फिर रही है कि किसी में दम नहीं जो उनका तबादला करवा। कुछ दिन पहले जब तबादला सूची निकली तो उनकी पूरी हेकड़ी निकल गई। दरअसल सूची में उनका नाम शामिल था, विदेश से ही मैडम ने यह संदेश दे दिया कि वे अपने गृह जिले के पास जा रही है और खुद ने तबादला करवाया। बड़बोली मैडम के बारे मेें पूरे विभाग में चर्चा है कि अल्प कार्यकाल में उन्होंने चित भी मेरा पट्ट भी मेेरा के लिए जाना जाता है।
बैतूल से रिटायरमेंट का अनोखा मोह (Betul Political Column)
प्रशासनिक अमले में एक तहसील के बड़े साहब को जिले में वैसे तो तीन वर्ष पूरे हो गए, लेकिन उनका यहां से मोह भंग नहीं हो रहा है। विधानसभा चुनाव के पहले उनका तबादला तय था, किंतु रिटायरमेंट को कम समय बचने के कारण वे यही से विदा होना चाह रहे थे। इसके लिए भी उन्होंने हाईकोर्ट में पीटिशन लगा दी और किस्मत देखो साहब को राहत मिल गई। यानी अब वे अपने मुख्यालय से ही विदाई पार्टी लेकर गृह क्षेत्र रवाना होंगे। पूरे जिले में साहब का यही से रिटायरमेंट प्रेम काफी सुर्खियों में है।




