Betul Ki Khabar: जिले में 500 दवाई दुकानों में सालाना करोड़ों का कारोबार

Betul Ki Khabar: 500 medicine shops in the district have annual turnover of crores.

दवा दुकानों की जांच में कोताही, 3 हजार सालाना की वसूली चर्चा में

Betul Ki Khabar: बैतूल। घटिया क्वालिटी के कफ सीरप पीने के बाद 16 बच्चों की मौत ने प्रदेश शासन और प्रशासन को हिला कर रख दिया है। बैतूल जिले में भी दी बच्चों की मौत के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी मेडिकल स्टोर्स की जांच में जुटे हुए हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी घटना घटित होने के बाद ही शासन-प्रशासन के जागने का क्या मतलब? यदि यही प्रक्रिया रूटीन में संपादित होती तो हो सकता है कि 16 मासूम बच्चों को अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ता।

अब घटना होने जे बाद स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी और औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों की कारगुजारी भी परत दर परत सामने आ रही है। चर्चा है कि जिले में संचालित प्रत्येक मेडिकल स्टोर से 3 हजार रुपए सालाना की रकम उन अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है, जिनके जिम्मे इन मेडिकल स्टोर्स में दवाओं के स्टॉक, बिल बाउचर का रखरखाव, एक्सपायरी दवाओं की जानकारीसहित कई संवेदनशील मेडिसिनों की खरीद बिक्री की जांच करना है। यदि इस तथ्य पर विश्वास किया जाए तो लोगों की जिंदगी से जुड़े इस व्यवसाय के जरिए प्रतिवर्ष लाखों रुपए की वसूली हो रही है। प्रशासन को इस तथ्य की भी जांच कराए जाने की आवश्यकता है, ताकी दवा करोबार के जरिए आम जन की जान से खेलकर स्वहित का साधन बनाने वाले ऐसे अधीकारियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

एक ड्रग इंस्पेक्टर के भरोसे 500 दुकानें

प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के जरिए जिले में करीब 500 से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित किए जा रहे हैं। नियम के मुताबिक आम आदमी के जीवन से जुड़े इस व्यवसाय की मॉनिटरिंग और जांच किए जाने के लिए समय समय पर इनकी जांच भी अनिवार्य की गई है, लेकिन एक साथ दर्जन भर से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या इन मेडिकल स्टोर्स की जांच अभी तक गम्भीरता से की गई या फिर कागजों पर ही लीपापोती की जाती रही है। जानकारी के मुताबिक जिले में एक मात्र ड्रग इंस्पेक्टर संजीव जादौन को यह जिम्मेदारी दी गई है।

बताया जा रहा है कि उनके पास बैतूल जिले के अलावा हरदा जिले का भी प्रभार है। स्तिथि साफ है कि एक अधिकारी के भरोसे दोनो जिलों में संचालित हजारों मेडिकल स्टोर्स की जांच कहीं से कहीं तक सम्भव नहीं है। इधर सूत्रों का दावा है कि मेडिकल स्टोर्स की जांच मौके पर नहीं कि जाकर केवल कागजों में ही पूरी कर ली जाती है। जो अपने आप गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है। भले ही जिले के मेडिकल स्टोर्स में इस तरह की कोई दवाई बिक्री से जनहानि की कोई घटना सामने नहीं आई, लेकिन रूटीन जांच को लेकर जिस तरह की अनदेखी और लापरवाही सामने आ रही है उसे दृष्टिगत रखते हुए। कलेक्टर को ड्रग इंस्पेक्टर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करवाना चाहिए, ताकि इस तरह की घटना जिले में घटित ना हो सके।

15 लाख रुपए की सालाना वसूली शक के दायरे में

इस गम्भीर मामले की पड़ताल में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों और ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका पर गम्भीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दवा व्यवसाय से ही जुड़े सूत्रों का दावा है कि मेडिकल स्टोर्स की जांच के नियम की वर्षों से धज्जियां उड़ा रही हैं। यह सही है कि दुकानों की जांच की खाना पूर्ति मौके पर नहीं बल्कि कागजों में ही पूरी की जाती रही है। सूत्र बताते हैं कि, प्रत्येक दुकानों से जांच के नाम पर 3 हजार रुपए सालाना की सेटिंग की गई है।

इसके किये बकायदा इस व्यवसाय से जुड़े एजेंट पूरी खानापूर्ति के लिए अपनी भूमिका निभा रहे हैं। यदि इस तथ्य में थोड़ी भी सत्यता माना जाए तो, 3 हजार रुपए सालाना के हिसाब से 500 दुकानों से कुल 15 लाख रुपए सालाना की वसूली की जा रही है। यह जांच का विषय हो सकता है कि, 15 लाख रुपयों की इस राशि के आखिर हिस्सेदार कौन कौन अधिकारी हैं। यह जांच इसलिए भी जरूरी है कि, इसी लापरवाही के चलते 16 परिवारों के चिराग एक झटके में बुझ चुके हैं। बच्चों के खोने का दर्द अब इन परिवारों के लिए जिंदगी भर के लिए नासूर बन चुका है। जिले के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज हुरमाड़े से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने इस तथ्य पर कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर दिया।

जांच में तेजी, भोपाल एम्स और हमीदिया से बुलाए पर्चे

पूरे मामले को लेकर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के नेतृत्व में जांच तेज कर दी गई है। हालांकि जिले में जिन बच्चों की कल्ड्रिफ् सीरप से मौत हुई है उनका इलाज जिले में नहीं बल्कि भोपाल और नागपुर में हुआ था, लेकिन बावजूद इसके कलेक्टर घटना के प्रत्येक पहलू को ध्यान में रखकर जांच करवा रहे हैं। मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज हुरमाड़े ने बताया कि, जांच दल द्वारा जांच पूरी कर ली गई है। अगले एक दो दिनों में प्रशासन को प्रतिवेदन सौंप दिया जाएगा।

भोपाल और नागपुर के अस्पतालों से मृतक बच्चों के दवाई के पर्चे और रिपोर्ट भी तलब की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर मेडिकल स्टोर्स की जांच भी कराई जा रही है। जो भी है लेकिन इस घटना के बाद अब इस बात की जरूरत है कि मेडिकल स्टोर्स सहित दवाओं और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन को सख्त रुख अपनाना जरूरी हो चुका है, ताकी इस तरह की घटनाएं दोबारा सामने ना आ पाएं, आम जन एक भरोसे के साथ अपना और अपने परिजनों का उपचार बेख़ौ$फ होकर करवा सकें।

इनका कहना….

जांच पूरी हो चुकी है, एक दी दिनों में प्रतिवेदन कलेक्टर की सौंपा जाएगा। जिस अस्पताल में बच्चों का उपचार हुआ था, वहां से दवाई के पर्चे और रिपोर्ट बुलवाई गई हैं। मेडिकल स्टोर्स से तीन हजार रुपए की वसूली पर मैं कुछ नहीं कह पाऊंगा।

डॉ. मनोज हुरमाड़े, सीएमएचओ बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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