Betul Smachar: नागदा को जिला बनाने से पांढुर्ना में भी सुगबुगाहट तेज, मुलताई जिला बनाओ समिति अब तक थी न्यूट्रल, अब जिला बनाने की मांग हुई तेज
Betul Smachar: By making Nagda a district, there is a buzz in Pandhurna as well, Multai district making committee was neutral till now, now the demand for making district intensified

Betul Smachar: (बैतूल)। उज्जैन से अलग कर नागदा को जिला बनाने की घोषणा के बाद पांढुर्ना के रहवासियों की निगाहें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लग गई हैं। वे पिछले दस साल से जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2018 में सीएम खुद पांढुर्ना में इसका भरोसा दिला चुके हैं। नागदा को जिला बनाने की घोषणा के बाद पिछले 18 सालों से मुलताई जिला बनाओ की मांग कर रही समिति द्वारा नागदा के जिला बनने के बाद मुलताई में कोई प्रदर्शन या मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मुलताई को जिला बनाने की मांग नहीं रखी गई है, इससे अब ऐसा लगता है कि मुलताई वासियों को मुलताई के जिला बनने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है, वहीं पांढुर्ना के जिला बनने की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है।
विधानसभा चुनाव 2023 का साल होने पर सीएम लगातार पूरे प्रदेश के जिलों में भ्रमण कर क्षेत्रवासियों की मांगें पूरी कर रहे हैं। 19 जुलाई को सीएम का पांढुर्ना दौरा प्रस्तावित था, लेकिन दो दिन पहले टाल दिया गया। पांढुर्ना के लोग सीएम से इसकी घोषणा की अपेक्षा कर रहे हैं। इसके लिए पिछले दस दिन से पांढुर्ना में विभिन्न संगठन ज्ञापन भी दे रहे हैं। पूरे पांढुर्ना में यही एक मांग जोर- शोर से उठ रही है। सीएम नागदा को उज्जैन से अलग कर जिला बना चुके हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री चुनाव से पहले पांढुर्ना आते हैं तो उन्हें क्षेत्रवासियों की इस आकांक्षा को पूरा करना होगा। वहीं मुलताई की समिति में कोई हलचल नहीं दिखाई दे रही है।
कागजी घोड़े भी दौड़ते नजर नहीं आ रहे
मुलताई को जिला बनाने की मांग 2005 से लगातार की जा रही है, पिछले 18 सालों के संघर्ष के बाद अभी मुलताई जिला बनता नजर नहीं आ रहा है। सर्वदलीय मुलताई जिला बनाओ समिति द्वारा लंबे समय से मुलताई को जिला बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस समिति द्वारा मुलताई को जिला बनाने के लिए कांग्रेस की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सुखदेव पांसे को ज्ञापन भी सौंपा गया था। ज्ञापन के बाद पांसे ने समिति के सदस्यों की बैठक लेकर उन्हें आश्वासन दिया था कि मां ताप्ती का आशीर्वाद रहा तो मुलताई जल्द ही जिला बनेगा। लेकिन फिलहाल यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है और समिति की मुहिम भी ठंडी हो गई है। मुलताई को जिला बनाने को लेकर कोई कागजी घोड़े भी नहीं दौड़ते नजर आ रहे हैं।
2018 में विधानसभा चुनाव से पहले कैबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे ने मुलताई के लोगों से वादा किया था कि यदि कांग्रेस की सरकार बनी तो मुलताई को जिला बनवाया जाएगा, सरकार बनने के बाद मंत्री पांसे इसके लिए लगातार प्रयासरत भी थे, लेकिन काग्रेस सरकार गिरने के बाद कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए है। दरअसल, मुलताई से लगातार युवाओं का पलायन हो रहा है। काम की तलाश में युवाओं को मुलताई छोडक़र बडे शहरों की ओर भागना पड रहा है। हालात यह है कि उच्च शिक्षा के लिए पहले विद्यार्थियों को शहर छोडऩा पडता है और फिर काम की तलाश के लिए उन्हें मुलताई से दूर रहना पड़ता है। तहसील क्षेत्र होने से यहां एक भी उद्योग नहीं है। मुलताई में सालों पहले एक सोयाबीन प्लांट हुआ करता था, वो भी बंद हो गया है। मुलताईवासियों का कहना है कि यदि मुलताई जिला बन जाएगा तो लोगों को विकास से सीधे जोड़ा जा सकता है, क्योंकि जब हरदा जैसी छोटी तहसीलें जिला बनाई जा सकती है तो मुलताई बड़ी तहसील को जिला क्यों नहीं बनाया जा सकता है। जानकार बताते हैं कि मुलताई, पट्टन, बोरदही और आठनेर को मिलाकर जिला बनाया जा सकता है।
ताप्ती की दशा सुधरेगी और नगर का होगा विकास
यदि मुलताई को जिला घोषित कर दिया जाता है तो मुलताई का संपूर्ण विकास होगा। अभी मुलताई में एक भी बडा उद्योग कालेज और अस्पताल नहीं है। जिससे यहां के युवा बेरोजगार है। यहां का शिक्षा का स्तर बहुत कमजोर है। जिला बनने पर शिक्षा पर ध्यान दिया जाएगा। स्वास्थ्य सुविधाओं में मुलताई पिछड़ा हुआ है, जिला बनने से अच्छे अस्पताल बन पाएंगे। यदि मुलताई को जिला घोषित कर दिया गया तो मुलताई से उद्गमित हुई ताप्ती की दशा भी सुधर जाएगी। जिला बनने के बाद चौबीस घंटे मुलताई में कलेक्टर बैठेंगे, जिससे विकास योजनाएं बन पाएगी।




