Betul News: घोड़ाडोंगरी-शाहपुर ब्लॉक बना अवैध रेत तस्करों का अड्डा
Betul News: Ghoradongri-Shahpur block becomes a base for illegal sand smugglers

एनजीटी के नियमों की अनदेखी कर जेसीबी और पोकलेन उतार रहे नदी में, खनिज विभाग नींद में सोया
Betul News: बैतूल। राज्य शासन ने 31 अक्टूबर तक रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद जिले के चर्चित घोड़ाडोंगरी और शाहपुर ब्लॉक में रेत खनन थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालत यह है कि दोनों ब्लॉक में रेत माफियाओं की गैंग नदी से लेकर नालों तक इतनी अधिक सक्रिय हो गई है कि रात के अंधेरे में नदियों से रेत उलीच कर डम्परों से जिले के विभिन्न स्थानों पर भेजा जा रहा है। पूरे मामले में खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे है। क्षेत्र के लोग खुद माफियाओं द्वारा नदी में डम्पर और पोकलेन उतारकर रेत निकालने के फोटो, वीडियो भेज रहे है, लेकिन विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने से परहेज कर रहे है।
सूत्र बताते है कि हर वर्ष जून माह के बाद 31 अक्टूबर तक एनजीटी के नियमों के तहत राज्य शासन रेत खनन पर प्रतिबंध लगाता है। यह सिलसिला इस बार भी लागू कर दिया गया है, लेकिन जिले में अखूत रेत संपदा होने का फायदा हर बार की तरह इस बार भी माफियों की गैंग उठा रही है। हालत यह है कि शाम ढलते ही नदियों में पोकलेन और जेसीबी उतर जाती है। अंधेरा होने से लेकर पाव फटते तक बड़ी तादाद में रेत निकालकर डम्परों से परिवहन किया जा रहा है। नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन द्वारा भले ही रेत खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन उनके गांवों में पूर्व की तरह डम्परों की धमाचौकड़ी बंद नहीं हुई है। गांव की सड़कों से हर दिन दर्जनों की तादाद पर रेत के डम्पर निकल रहे है। सूचना देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
घोड़ाडोंगरी-शाहपुर बना हब
जानकार सूत्र बताते है कि रेत परिवहन के लिए हमेशा की तरह इस बार भी प्रतिबंधित अवधि में घोड़ाडोंगरी और शाहपुर ब्लॉक अवैध रेत परिवहन के लिए हब बन गया है। इन क्षेत्रों की नदियों में माफियाओं की गैंग फुल सक्रिय होकर डम्परों से रेत परिवहन कर रही है। जानकार सूत्रों के मुताबिक जेसीबी और पोकलेन के सहारे हर दिन दोनों ब्लॉकों में हर दिन 50 से अधिक डम्पर रेत निकाली जा रही है। यह काम इतना आसानी से किया जा रहा है कि प्रशासन और पुलिस नाम की कोई चीज घोड़ाडोंगरी और शाहपुर ब्लॉक में नहीं दिख रही है। रात के अलावा दिन में भी कई डम्पर दोनों ब्लॉकों से निकलते हुए देखे जा सकते है।
खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल
घोड़ाडोंगरी और शाहपुर ब्लॉक से लगातार खबरें मिल रही है कि यहां पर बड़े पैमाने पर रेत परिवहन हो रहा है। इसके बावजूद खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे है। घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के बगडोना और छतरपुर गांव में ट्रेक्टरों से हर दिन बड़े पैमाने पर रेत परिवहन हो रही है। ट्रेक्टर मालिकों ने नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उनसे प्रत्येक ट्रिप के माफिया 1 हजार रूपए वसूल रहे है। इसके एवज में ट्रेक्टर पूरी तरह सुरक्षित होकर गंतव्य स्थान पर पहुंच रहे है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नदियों से रेत निकलकर आसानी से पहुंच रही है, लेकिन खनिज विभाग की भूमिका अवैध खनन को लेकर नगण्य है।
जगह-जगह रेत के डम्प दे रहे खनिज विभाग को चैलेंज
न सिर्फ घोड़ाडोंगरी और शाहपुर बल्कि जिले के नदी किनारे किए डम्प इस बात का सबूत है कि माफियाओं द्वारा रेत उलिची जा रही है। सूत्रों के मुताबिक रेत निकालकर माफिया आसानी से पास में ही डम्प कर दे रहे है। सैकड़ों डम्परों की तादाद में यह डम्प रेत खनिज विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठा रही है। चैलेंज किया जा रहा है कि नजूल विभाग डम्प किए गए रेत पर पूर्व की तरह कार्रवाई करें तो माफियाओं पर तगड़ा जुर्माना लगाने से शासन को राजस्व का बड़ा मुनाफा मिल सकता है। इस संबंध में सहायक संचालक मनीष पालेवार को उनके मोबाईल पर कॉल किया गया, लेकिन मोबाईल कवरेज नहीं होने के कारण चर्चा नहीं हो सकी।





