Betul News: ड्राइंग डिजाईन में उलझा मुलताई-घोड़ाडोंगरी ब्रिज का निर्माण

ब्रिज कारर्पोरेशन की भेजी ड्राइंग रेलवे ने नहीं की फाइनल, क्षेत्र के लोगों को लेटलतीफी के भुगतना पड़ रहा परिणाम
Betul News: बैतूल। जिले के घोड़ाडोंगरी और मुलताई क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण दो ओवरब्रिज का निर्माण कार्य ड्राइंग-डिजाइन की अड़चनों में उलझकर ठप होता नजर आ रहा है। इन दोनों ओवरब्रिजों का निर्माण मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल होना लगभग असंभव प्रतीत हो रहा है। रेलवे द्वारा चौथी रेल लाइन की स्वीकृति और उसके चलते ड्राइंग-डिजाइन में बदलाव की प्रक्रिया ने निर्माण कार्य को और अधिक जटिल बना दिया है, जिससे आम जनता को सुविधा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इटारसी-नागपुर रेलवे क्रॉसिंग पर घोड़ाडोंगरी-सारनी मार्ग में ओवरब्रिज निर्माण के लिए 31 करोड़ 88 लाख रुपए की स्वीकृति मिली थी। प्रारंभ में निर्माण कार्य शुरू भी किया गया, लेकिन बीते कई महीनों से यह कार्य पूरी तरह रुका हुआ है। ओवरब्रिज का निर्माण मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और रेलवे के संयुक्त समन्वय से किया जाना है। फिलहाल स्थिति यह है कि ब्रिज के लिए केवल पिलर खड़े किए गए हैं, इसके बाद से निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
बताया जा रहा है कि ब्रिज निर्माण से संबंधित ड्राइंग-डिजाइन अब तक अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं हो पाई है। रेलवे की चौथी लाइन स्वीकृत होने के बाद पुराने डिजाइन में बदलाव आवश्यक हो गया, जिसके चलते नई डिजाइन तैयार कर रेलवे मुख्यालय को भेजी गई। हालांकि, महीनों बीत जाने के बावजूद अब तक इस पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। इसी कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है और इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण दोनों ओर लगभग एक किलोमीटर तक सड़क खुदी हुई है। इससे रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है। धूल और मिट्टी के कारण वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों को भी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दो वर्ष पहले इस ओवरब्रिज की मंजूरी मिली थी, लेकिन निर्माण की गति शुरू से ही बेहद धीमी रही है।
मुलताई ओवरब्रिज का काम भी कछुआ गति से
मुलताई-बोरदेही मार्ग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। इस ब्रिज की स्वीकृति भी करीब दो वर्ष पहले मिली थी, लेकिन स्वीकृति के लगभग एक साल बाद जाकर ड्राइंग-डिजाइन पास हो सकी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन इसकी रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। इस ओवरब्रिज का निर्माण 24 करोड़ 69 लाख 48 हजार रुपए की लागत से किया जाना है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरती जा रही है, जिसके चलते काम कछुआ चाल से आगे बढ़ रहा है। इस ब्रिज का निर्माण कार्य भी मार्च 2026 तक पूरा होना था, लेकिन जिस तरह से काम चल रहा है, उससे तय समय सीमा में पूरा होना संभव नहीं लग रहा।
चौथी रेलवे लाइन बनी देरी की बड़ी वजह
उल्लेखनीय है कि रेलवे द्वारा इटारसी-नागपुर खंड पर चौथी रेलवे लाइन को स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके चलते दोनों ओवरब्रिजों को नई लाइन के अनुरूप डिजाइन करना अनिवार्य हो गया है। हालांकि, रेलवे की स्वीकृति प्रक्रिया में अत्यधिक समय लगने के कारण ड्राइंग-डिजाइन को अंतिम मंजूरी मिलने में ही वर्षों बीत गए। अब जबकि मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने में देरी हुई, तो निर्माण कार्य में भी लंबा समय लगना तय माना जा रहा है।
गेट बंद होने से लग रहा लंबा जाम
घोड़ाडोंगरी-सारनी मार्ग पर रेलवे लाइन होने के कारण बार-बार फाटक बंद होता है। सारनी, बगडोना, शोभापुर और छिंदवाड़ा की ओर जाने वाले इस व्यस्त मार्ग पर ट्रेनों और मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक होने से दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। फाटक बंद होते ही वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों, मरीजों और व्यापारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ओवरब्रिज बन जाने से उन्हें जाम और फाटक बंद होने की समस्या से राहत मिलती, लेकिन निर्माण कार्य में हो रही लगातार देरी से उनकी उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं। अब लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग और रेलवे समन्वय बनाकर जल्द से जल्द ड्राइंग-डिजाइन को अंतिम रूप दें, ताकि निर्माण कार्य गति पकड़ सके और उन्हें वर्षों से चली आ रही इस समस्या से राहत मिल सके।
इनका कहना…
रेलवे की चौथी लाईन स्वीकृत होने और ड्राइंग-डिजाइन की स्वीकृति समय पर नहीं मिलने से काम में देरी हो रही है। हालाकि मुलताई की डिजाईंनिग पास हो गई है इसका काम भी प्रगति पर है।
गिरीश हिंगवे, एसडीओ ब्रिज कॉर्पोरेशन




