Betul Samachar: आधी रात 1 घण्टे अंधेरे में डूबा रहा जिला अस्पताल
Betul Samachar: The district hospital remained immersed in darkness for 1 hour at midnight.

अटकी रही मरीजों की सांसे, दो लोग लिफ्ट में भी फंसे रहे
Betul Samachar: बैतूल। करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए जिला अस्पताल की आपातकालीन सुविधाएं लगातार बेपटरी होते जा रही है। इन सुविधाओं का उपयोग ना होने की स्थिति में मरीजों की जान कभी भी खतरे में पड़ सकती हैं। खासतौर से उन नवजात शिशुओं कि जिन्हें जरूरत के हिसाब से गहन चिकित्सा इकाई में मशीनों के भरोसे रखा जाता है। जिला चिकित्सालय अव्यवस्थाओं को लेकर हमेशा खासा चर्चा में रहता है। सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात बिजली गुल हो जाने से अस्पताल लगभग 1 घण्टे तक अंधेरे में डूबा रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दो बार बिजली गुल होने से मरीजों की सांस अटकी रही तो इस दौरान दो लोगों के लिफ्ट में फंसे होने की जानकारी भी मिली है। हालांकि इस दौरान यदि पावर कट लम्बा खींच जाता तो लिफ्ट में फंसे लोगों का भगवान ही मालिक होता। ऐसा नहीं है कि बिजली गुल जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल में व्यवस्था नहीं है,लेकिन यह बन्दोबस्त मात्र शोपीस बनाकर ही रखे गए हैं।

15 मिनट लिफ्ट में फंसे रहे दो व्यक्ति
रात्रि में अस्पताल में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहली बार बिजली गुल होने के समय दो लोग लिफ्ट से नीचे आ रहे थे इसी बीच अचानक 11 बजे बिजली गुल हो गई। 11 बजकर 15 मिनट पर बिजली सप्लाई आने के बाद दोनों लोगों ने राहत की सांस ली जिला चिकित्सालय अंधेरे में डूबा रहा तो वार्ड में भर्ती मरीजों के भी गर्मी से हाल बेहाल हो गए। इस दौरान गनीमत रही कि मात्र 15 मिनट में ही लाइट आ गई और दोनों लोगों को लिफ्ट से बाहर निकाल लिया गया। यदि थोड़ी देर का विलम्ब और हो जाता तो लिफ्ट में फंसे लोगों की जान आफत में पड़ सकती थी।
नवजातों की जान से भी खिलवाड़
बताया जा रहा है कि इसी रात अस्पताल में 1 बजकर 28 मिनट पर दोबारा बिजली गुल की स्थिति निर्मित हो गई। इसके बाद अस्पताल फिर अंधेरे में डूब गया। लगभग 1 घण्टे के बाद 2 बजकर 20 मिनट पर सप्लाई शुरू हो सकी। यहां सबसे ज्यादा गौर करने वाला गौर करने वाली बात यह है कि नवजातों की जान को लेकर भी अस्पताल प्रबंधन गम्भीर नहीं है। जिला चिकित्सालय में बच्चों के लिए एसएनसीयू और गहन चिकित्सा कक्ष जैसी अहम इकाइयां हैं जिसका बिना बिजली के संचालन हो ही नहीं सकता। बिजली बंद होने के दौरान एसएनसीयू में 44 नवजात शिशु भर्ती थेे। इनकी जान भी जोखिम में पड़ सकती थी, क्योंकि सम्पूर्ण एसएनसीयू मशीनों की सहायता से संचालित होता है। स्वाभाविक है कि बिजली कटने के बाद मशीनें काम करना बंद कर देती है। इससे कभी भी बड़ी आशंकाएं बनी रहती है।
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आश्वासनों पर टिकी अस्पताल की व्यवस्थाएं
ऐसा नहीं है कि आपातकाल स्थितियों से निपटने के लिए प्रबन्धन के पास संसाधन मौजूद नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसी स्थितियां निर्मित क्यों हो रही हैं यह कई सवाल खड़े कर रहा है। जिला चिकित्सालय के पास भारी भरकम जनरेटर एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध है, परंतु इन सुविधाओं को समय पर चालू नहीं उठने पर सवाल उठते है। उच्च अधिकारियों से चर्चा पर सिर्फ एक ही जवाब होता है कि व्यवस्थाएं सुधारी जाएगी, जबकि जिला चिकित्सालय में ऑटो कट जनरेटर भी उपलब्ध है बिजली गुल होते ही तत्काल जनरेटर से सप्लाई शुरू हो सकती है, परंतु यह जनरेटर काम नहीं कर रहे हैं या उन्हें संचालन करने के लिए कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कभी भी जिला अस्पताल में कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
इनका कहना…
अस्पताल में ब्लैक आउट की जानकारी मिली है। सीएमएचओ को तलब किया गया है। व्यवस्था सुधारने के लिए कहा है।
नरेंद्र कुमार सुर्यवंशी, कलेक्टर,बैतूल
मैं ट्रेनिंग पर भोपाल आया हूं, मुझे भी जानकारी मिली है। पत्र देकर जवाब मांगा जाएगा।
डॉ रविकांत उइके, सीएमएचओ,बैतूल





