Happy Mother’s Day: मदर्स डे स्पेशल: पति कोरोना में चल बसे, पुत्र को बनाना था आईपीएस तो अनुकंपा नियुक्ति ठुकराई

फिर घर की पेंशन और बेटी के प्राइवेट जाब से बेटा बना IPS

बैतूल। सबकुछ सहती है, फिर भी चुप रहती है, अपना निवाला देकर, सबका पेट भरती है, मां ऐसी ही होती है, अपने सारे दुख झेलकर सबको खुश रखती है….. यह पंक्तियां खंजनपुर में रहने वाली एक ऐसी माता को समर्पित की जा सकती है, जिसने कोरोना काल में अपने पति के निधन और पुत्र को यूपीएससी क्लियर कराने के लिए अनुकंपा नियुक्ति तक त्याग दी। जबकि परिवार की आर्थिक स्थिति के लिए अनुकंपा नियुक्ति की काफी जरूरत थी, लेकिन अपने पति के सपने को पूरा करने इस माता ने पति की पेंशन से घर खर्च कम किया और पुत्र को आईपीएस बनाकर पति का संकल्प पूरा करवाया। इतना ही नहीं पुत्री भी पुत्र के नक्शे कदम पर चलते हुए कोषालय अधिकारी बन गई है।

खंजनपुर में रहने वाली संगीता बारंगे आज से करीब एक वर्ष पहले सामान्य गृहणी थी, लेकिन उनके पुत्र ने गत वर्ष मई माह में यूपीएससी के परीक्षा परिणाम में आईपीएस बनकर अचानक चर्चा में ला दिया। चूंकि रविवार को मदर्स डे है और पूरे विश्व में मदर्स डे को लेकर खूब चर्चा हो रही है। ऐसे में खंजनपुर की संगीता बारंगे के बारे में भी यह बताना जरूरी है कि उनके पति का कोरोना के समय 2021 में निधन होने से परिवार टूट गया था, लेकिन जिस समय यह अनहोनी हुई, तब उनका पुत्र जय बारंगे यूपीएससी के एग्जाम के लिए कोचिंग कर रहा था। चूंकि पति का सपना पुत्र जय बारंगे को आईएएस बनाने का था, इसलिए पति का क्रियाक्रम करने के बाद पुत्र को आईएएस बनाने की राह चल पड़ी।

चूंकि उस समय श्रीमती बारंगे के पास आय का कोई स्रोत नहीं था। केवल पेंशन के सहारे घर खर्च के अलावा पुत्र जय बारंगे और पुत्री श्रेया बारंगे की एमपीपीएससी की कोचिंग का खर्च उठाना डेढी खीर थी, लेकिन पति के सपने को पूरा करने के लिए संगीता ने घर खर्च कम कर अपने पुत्र और पुत्री को काबिल बनाने का संकल्प लिया था, वह पूरा हो गया।

यूपीएससी के परिणाम ने पति का सपना पूरा किया

24 मई 2023 को जब संघ लोक सेवा आयोग के फाइनल रिजल्ट आए तो संगीता बारंगे की खुशी का ठिकाना न रहा। दरअसल उनके पति का सपना पुत्र जय ने 587वीं रैंक हासिल कर पूरा कर दिया। उन्हें आईपीएस कैडर आवंटित होने से पूरा परिवार की खुशी चारगुनी बढ़ गई। संगीता बताती है कि पति की कोरोना काल में निधन होने से पूरा परिवार बेपटरी हो गया था, लेकिन उनके सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। भोपाल में रहकर पढ़ाई करवाने के दौरान पुत्र को आर्थिक समस्याएं आई, लेकिन इसके लिए भी पुत्री ने बड़ा दिल दिखाया और पुत्री श्रेया ने निजी कंपनी ज्वाइन कर अपने भाई को आईपीएस बनाने में काफी मदद की। उनका पुत्र आईपीएस जय भी कहता है कि आज पिता के सपने को उनकी माता की वजह से ही पंख लगे है।

अनुकंपा नियुक्ति ठुकराकर मिसाल कायम की

पति के निधन के बाद संगीता बारंगे चाहती तो अनुकंपा नियुक्ति लेकर परिवार की डगमगाई आर्थिक स्थिति को ठीक कर सकती थी, लेकिन ऐसा करने से वह अपने पुत्र के आईएएस-आईपीएस बनाने के सपने को पूरा नहीं कर सकती थी। एक बार उसने यह अनुकंपा नियुक्ति अपने पुत्र को भी देने का सोचा, लेकिन भारी मन से अपना निर्णय बदल दिया। अंतत: परिवार के किसी भी सदस्य ने अनुकंपा नियुक्ति नहीं ली। संगीता बारंगे की जीवटता और संघर्ष का ही नतीजा है कि अनुकंपा ठुकराने के बाद उनका पुत्र आईपीएस की ट्रेनिंग कर रहा था तो पुत्री लोक सेवा आयोग से कोषालय अधिकारी पर चयनित हो चुकी है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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