Betul News: भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच में सीएमएचओ का ढुलमुल रवैय्या
Betul News: CMHO's lax attitude in investigation against corruption

क्षेत्रीय संचालक ने हड़काया, नहीं दिया प्रतिवेदन तो कार्यवाही के लिए रहे तैयार
Betul News: बैतूल। आठनेर विकासखंड बीएमओ द्वारा की गई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का ढुलमुल रवैया के बाद अब उच्च अधिकारियों की त्यौरी चढ़ चुकी हैं। क्षेत्रीय संचालक भोपाल ने सीएमएचओ को अंतिम स्मरण पत्र जारी कर चेतावनी दी है कि जांच कर तत्काल प्रतिवेदन नहीं दिया जाता है तो आपके नाम से वरिष्ठ कार्यालय को अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा जाएगा, इसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।
गौरतलब है कि आठनेर में हुई वित्तीय अनियमितताओं के खुलासे होने के बावजूद स्वास्थ्य अधिकारी इस पर पर्दा डालने की कोशिश करते रहे हैं। लिहाजा अब अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की जल्द जांच कर प्रतिवेदन भेजा जाए, अन्यथा स्वयं कार्यवाही के लिए तैयार रहे।

सीएमएचओ को किसी भी हाल करनी होगी जांच
वित्तीय अनियमितता के मामले में आठनेर विकासखंड के बीएमओ सहित बीपीएम और बीसीएम की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे। शिकायत होने के बावजूद जिला मुख्यालय पर बैठे स्वास्थ्य अधिकारी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। क्षेत्रीय संचालक ने पत्र में लिखा है कि प्रकरण में बीएमओ के नाम की स्पष्ट जानकारी तथा बीपीएम एवं बीसीएम की भूमिका के बारे में पूर्ण विस्तृत प्रतिवेदन चाहा गया था, जो आज दिनांक तक अप्राप्त है।
कार्यालय से बार-बार स्मरण-पत्र भेजने के पश्चात भी आपके द्वारा उक्त प्रतिवेदन आज तक नहीं भेजा गया हैं , जो खेद का विषय हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मप्र भोपाल से उक्त संबंध में बार-बार स्मरण पत्र प्राप्त हो रहे हैं। आपको पुन: निर्देशित किया जाता है की आप बीएमओ के नाम की स्पष्ट जानकारी तथा बीपीएम एवं बीसीएम की भूमिका के बारे में पूर्ण विस्तृत प्रतिवेदन आज ही अनिवार्य रूप से इस कार्यालय को भेजा जाना सुनिश्चित करें। यदि जानकारी समय-सीमा में प्राप्त नहीं होती है तो आपका नाम वरिष्ठ कार्यालय को अनुशासनात्क कार्यवाही के लिए भेजा जाएगा, जिसके लिए आप स्वयं जवाबदेह होंगे।
सरकारी राजस्व का जमकर किया था दोहन
पूरा मामला वर्ष 2020 -22 का है। तब आठनेर विकास खण्ड की स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन तत्कालीन बीएमओ अजय माहोरे कर रहे थे। इन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और शासकीय योजनाओं के लिए दिए गए फंड का बेजा इस्तेमाल कर शासन को लाखों रुपए की चपत लगाई थी।
इस पूरे मामले में बीपीएम और बीसीएम के भी शामिल होना सामने आया था। इस गम्भीर मामले की शिकायत होने के बावजूद प्रकरण को लटकाया जाता रहा। आखिर उच्च अधिकारियों को इस गम्भीर मामले में संज्ञान लेना पड़ा और सीएमएचओ को चेतावनी पत्र लिखकर जांच करने के लिए कहा गया।





