Betul Political News: प्रशासनिक कोना: कौनसी मोहतरमा है, जो 6 वर्ष से टिकी होने का मंत्री और अधिकारियों को जेब में रखने का नुख्खा बता रही?? 16 तारीख की असलियत से एक थानेदार बेचैन क्यों हो रहे??? बेचारे इन साहब को क्यों पड़ गई ईमानदारी भारी???? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में पूरी खबर…..
Betul Political News: Administrative Corner: Which lady is this, who is telling the tricks of keeping the ministers and officials in her pocket because she has been there for 6 years??

Betul Political News: मोहतरमा को जिले में पदस्थ हुए 6 वर्ष से अधिक का समय बीत गया है। चूंकि वे मलाईदार विभाग में पदस्थ है, इसलिए यहां के कुछ नेताओं को भी भा गई है। इसी का नतीजा है कि अपने विभाग में हर वर्ष मिलने वाले करोड़ों के बजट को ठिकाने लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उनके विभाग में हुए भ्रष्टाचार को लेकर पिछले दिनों बड़े साहब ने आधा दर्जन से अधिक अधीनस्थों पर कार्रवाई की है। बड़े साहब की कार्रवाई से मोहतरमा की धड़कने तेज हो गई है कि अपने विभाग की मुखिया होने के कारण कहीं जांच में उन तक आंच न आ जाए, लेकिन फाइल लेकर हस्ताक्षर करवाने जाने वालों अधीनस्थ कर्मचारियों को मोहतरमा चर्चा में बता रही है कि उनके संबंध सीधे मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अफसरों तक है, इसलिए उनका बाल भी बांका नहीं हो सकता है।
मोहतरमा यहां तक कहने से नहीं चूक रही है कि कुछ स्थानीय राजनीति के लोग भी उनकी जेब में है। उनकी बात में कितनी सच्चाई है यह तो खुद मोहतरमा या जिन्हें वे जेब में रखने की बात कह रही है, यह तो वे ही जाने, लेकिन मोहतरमा के इस बड़बोलेपन की तहकीकात होना जरूरी है कि वे किस-किस को जेब में रख रही है।
16 तारीख का वह सच आखिर सामने आएगा?
पुलिस विभाग में इन दिनों अफरा-तफरी मची हुई है। यहां बताना उचित नहीं है कि अफरा-तफरी का कारण क्या है? लेकिन चर्चाओं पर यकीन करें तो जिस कांड ने पुलिस की नाक कटवाई है, इस कांड की थ्योरी पर जाने के बाद कहानी और कुछ सामने आ रही है। इस मामले की शुरुआत तो काफी पहले हो चुकी थी, लेकिन जिस क्षेत्र में यह घटना हुई, उस थाने में 16 जनवरी के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो संबंधित थानेदार का सच सामने आ सकता है। आईजी ने इस थाने के दो कर्मचारियों को हटवा भी दिया है, लेकिन कहा जा रहा है कि और भी मछलियां इस तार में जुड़ी है जो थानेदार साहब के इशारों पर काम करती थी। यदि 16 जनवरी के सीसीटीवी फुटेज निकाल ले तो पूरी वास्तविकता सामने आ जाएगी और बड़ा विस्फोट होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
साहब को ईमानदारी पड़ गई भारी
पुलिस विभाग में बड़े साहब के ईमानदारी के चर्चे पूरे विभाग में हुआ करते हैं। मसलन जिले में उन्हें एक साल का भी समय नहीं बीता था और वक्त के पहिए का शिकार हो गए। भले ही उनकी कोई गलती नहीं थी, लेकिन अपने अधीनस्थों का हौसला अफजाई करने और गलती करने पर भी पक्ष लेने का उनका प्लस पाइंट भी काम नहीं आ सका। बड़े साहब हालांकि जिस थानेदार को बचाने के चक्कर में खुद तबादले का शिकार हो गए, यदि उस मछली को पहले ही पानी निकाल फेंकते तो शायद वे जिले में सफल और लंबी पारी खेलते। जिस कांड में साहब रूखस्त हुए, उसमें उनकी कही से कही गलती नहीं बताई जा रही है, लेकिन यह कहावत उनके साथ सही बैठ गई कि गेंहू के साथ घुन भी पिसता है।





