Today Hindi Samachar : 6 करोड़ की मरचुरी के दरवाजें कंडम, फ्रीजर बंद, जिला अस्पताल में मौत के बाद भी शवों को नहीं मिल रही शांति!
Today Hindi Samachar: Doors of mortuary worth Rs. 6 crore sealed, freezer closed, dead bodies are not getting peace even after death in the district hospital!

Today Hindi Samachar :(बैतूल)। भले ही जिले वासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर 500 बिस्तरों का अस्पताल तैयार खड़ा है। इसके अलावा मेडिकल कालेज भी खोले जाने का काम रफ्तार पकड़ चुका है। लेकिन अंतिम गति प्राप्त करने यानी कि मौत के आगोश में समा जाने के बाद मृतकों को खस्ताहाल मरचुरी ही नसीब हो रहा है। मरचुरी के कंडम हालात खुद अपनी कहानी कह रहे हैं । खिड़कियां टूट चुकी हैं, तो दरवाजे भी कबाड़ हो रहे हैं। मृतकों की लाशें सुरक्षित रखे जाने के लिए लगाए गए फ्रीजर खराब पड़े हुए हैं, लेकिन मरचुरी का उचित रखरखाव लगातार नजरअंदाज किया जाना यह प्रदर्शित कर रहा है की मौत होने के बाद इसी गन्दगी और कबाड़ के बीच चीरफाड़ किये जाने का संकल्प ले लिया गया हो।
खिड़की की ग्रील गायब, प्लास्टर भी झड़ा, शटर की सड़ गई शीट
वर्ष 2018 में पुराने अस्पताल भवन के पीछे लगभग 18 करोड़ की लागत से जिला अस्पताल के नए भवन का निर्माण कराया गया था। लगभग 250 बिस्तरों का यह अस्पताल अब नए स्वरूप में नजर आ रहा है। इसके ठीक बाद पुराने अस्पताल भवन को भी डिस्मेंटल कर लगभग इतने ही बिस्तरों का अस्पताल लगभग 27 करोड़ की लागत से बनाया गया है। यानी कि दोनों भवनों के निर्माण में लगभग 46 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। बाजू में ही ट्रामा सेंटर भी संचालित है। सेवाएं तो बेहतर हैं, लेकिन इसके ठीक विपरीत मरचुरी की हालत ज्यादा खराब है। मरचुरी की दीवार में लगी खिड़की की ग्रिल गायब है। दीवारों और छतों का प्लास्टर टूट टूट कर गिर रहा है। लोहे की शटर सड़ चुकी है तो वही दरवाजे भी जंग खाकर टूटने की कगार पर पहुंच चुके हैं।लाशों को सुरक्षित रखे जाने के लिए लगाए गए 4 कोल्ड फ्रिजरों में से दो खराब पड़े हुए हैं। यदि पोस्टमार्टम के लिए दो से ज्यादा शव आ जाते हैं, तो बाकी के शवों को बिना फ्रीजर के ही रखे जाना अस्पताल प्रबंधन की मजबूरी बन चुका है। हालात यह हैं कि मरच्यूरी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को पूरी तरह मजबूर हो चुका है।
रोजाना 4, महीने में होते 120 पोस्टमार्टम

खस्ताहाल हो चुके मरचुरी की सर्विस पर गौर किया जाए तो यहां रोजाना 3 से 4 शवों का पोस्टमार्टम किया जाता है। इस हिसाब से महीने में 100 से 120 पोस्टमार्टम किया जाना मामूली बात है। ऐसे में मरच्यूरी का पूरी तरह दुरुस्त होना बेहद आवश्यक हो चुका है। हालांकि इस समस्या को अस्पताल प्रबंधन भी समझ रहा है और प्रयास किए जा रहे हैं कि आने वाले समय मे नए नवेले अस्पताल भवनों के साथ साथ मरच्यूरी का भी कायाकल्प कर दिया जाएगा।
इनका कहना.
मरच्यूरी के कायाकल्प को लेकर शासन से पत्राचार किया गया है। दो फ्रीजर खराब जरूर है, लेकिन हमने चार नए फ्रीजर का आर्डर किया हुआ है। हालांकि मरच्यूरी के संचालन में कुछ दिक्कतें आ रही हैं उसके लिए भी प्लानिंग चल रही है
डॉ रानू वर्मा आरएमओ, जिला अस्पताल बैतूल





