Betul Samachar: जनजातीय बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़, ‘विलेन’ बने जनप्रतिनिधि

उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रावास की सौगात नहीं, हर साल 40 प्रतिभावान विद्यार्थी प्रवेश से वंचित, केंद्रीय मंत्री ने नहीं दी निधि से राशि
Betul Samachar: बैतूल। जनजातीय वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने और उनके भविष्य को संवारने के दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन बैतूल के उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रावास की सुविधा नहीं होने से इन दावों की हकीकत सामने आ रही है। विडंबना देखिए कि हर साल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले जनजातीय वर्ग के करीब 40 प्रतिभावान विद्यार्थी केवल रहने की व्यवस्था नहीं होने के कारण पढ़ाई का अवसर गंवा रहे हैं। सबसे गंभीर सवाल यह है कि केंद्रीय जनजातीय कार्य विभाग के राज्य मंत्री डीडी उइके को समस्या की जानकारी होने और महीनों तक छात्रावास के लिए पहल की उम्मीद बंधने के बावजूद अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
उत्कृष्ट विद्यालय में हर साल प्रवेश परीक्षा के माध्यम से करीब 240 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलता है। इनमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लगभग 96 विद्यार्थी शामिल होते हैं। विद्यालय परिसर के पास सामान्य श्रेणी के 100 छात्र और 100 छात्राओं की क्षमता वाले छात्रावास उपलब्ध हैं, जहां मेरिट के आधार पर विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को जगह मिलती है। इसके बावजूद एसटी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए अलग छात्रावास की व्यवस्था नहीं होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के सामने बैतूल में रहकर पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो जाता है। नतीजतन, चयन होने के बावजूद कई बच्चों को वापस लौटना पड़ता है।
महीनों तक उलझाए रखा, फिर भी नहीं मिली सौगात
इस समस्या के समाधान के लिए विद्यालय के प्राचार्य सत्येंद्र उदयपुरे ने केंद्रीय मंत्री डीडी उइके से उनके मंत्रालय के माध्यम से छात्रावास निर्माण के लिए फंड स्वीकृत कराने का अनुरोध किया था। उम्मीद थी कि जनजातीय वर्ग के बच्चों की इस गंभीर समस्या का प्राथमिकता से समाधान होगा, लेकिन महीनों तक इंतजार और उम्मीदों के बावजूद अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। विद्यालय के पास 50 छात्र और 50 छात्राओं की क्षमता वाला छात्रावास बनाने के लिए जमीन भी उपलब्ध है। यानी जमीन की कमी भी बाधा नहीं है, फिर भी योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
इसी वजह प्रतिभावान विद्यार्थियों की उम्मीदों के पंख नहीं लग सके और आज भी वे छात्रावास के अभाव में प्रवेश से वंचित हो जा रहे हैं। चौकाने वाली बात यह है कि जिले के जनप्रतिनिधियों को अपनी निधि से हर वर्ष करोड़ों की राशि मिलती है, लेकिन उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रावास निर्माण के लिए किसी ने भी अपनी निधि देने के लिए दरियादिली नहीं दिखाई। इस संबंध में केंद्रीय राज्य मंत्री और स्थानीय सांसद डीडी उइके ने उनके मोबाइल 9406959441 पर काल किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। इसी वजह महत्वपूर्ण मामले में उनसे चर्चा नहीं हो सकी।
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, व्यवस्था पर सवाल
छात्रावास के अभाव में प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पाने से शिक्षा के समान अवसरों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सीटें खाली रहने की स्थिति में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश देना पड़ता है, जिसका असर विद्यालय के परीक्षा परिणाम पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जमीन उपलब्ध है, समस्या भी सामने है और केंद्रीय मंत्री तक गुहार पहुंच चुकी है, तो फिर छात्रावास निर्माण की पहल अब तक क्यों नहीं हुई?
जनजातीय बच्चों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा यह मामला केवल एक छात्रावास का नहीं, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदों का है, जिनके बच्चे आर्थिक तंगी के बावजूद बेहतर शिक्षा हासिल करना चाहते हैं। अब देखना यह है कि मंत्री डीडी उइके इन बच्चों को छात्रावास की सुविधा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या उनकी समस्या आश्वासनों में ही उलझी रहती है।
इनका कहना…..
दो जनरल के छात्रावास है, इनमे सीट के हिसाब से सभी वर्गों के बच्चो को आवास सुविधा मिल रही है। एसटी वर्ग के लगभग 40 प्रतिशत बच्चों का चयन प्रति वर्ष होता है, लेकिन आवास की समस्या होने से उन्हें वापस लौटना पड़ता है।
सत्येंद्र उदयपुरे, प्राचार्य उत्कृष्ट विद्यालय बैतूल
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