Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: किस अधिकारी की जेब मे पहुंचा अखबार औऱ फिर क्या हुआ?? मलाईदार थाने की चाहत में घेराबंदी का यह कैसा खेल??? जनसुनवाई में पहुंची पार्षद, अधिकारी की टिप्प्णी से क्यों बढ़ा सियासी तापमान???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

अधिकारी के जेब मे पहुंचा अखबार, फिर क्या हुआ?

कलेक्ट्रेट के गलियारों में इन दिनों एक साप्ताहिक अखबार का किस्सा खूब चर्चा में है। बताया जाता है कि हाल ही में महत्वपूर्ण पद से हटाए गए एक अधिकारी पर अखबार ने पूरे एक पेज में जमकर क्रेडिट दिया था। संयोग से अखबार कलेक्टर के सामने वाले चैंबर में टेबल पर रखा था और आने-जाने वाले उसे देख रहे थे। मंगलवार शाम करीब 4 बजे साहब पहुंचे। अखबार देखा, चुपचाप मोड़ा और जेब में रख लिया।

बाहर निकले तो डस्टबिन के पास जेब से अखबार निकला और वहीं उसका ‘सम्मानजनक अंतिम संस्कारÓ कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, साहब ने नाराजगी भी कुछ इस अंदाज में जताई कि अखबार पर थूक तक दिया। पास खड़े एक पत्रकार ने सहानुभूति जताते हुए कहा साहब, यह तो ऐसे ही फुटेज के पीछे रहता है।

बातचीत आगे बढ़ी तो पुराने विवादों की चर्चा भी छिड़ गई। एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने भी अपनी टिप्पणी जोड़ दी। आखिर में साहब का आत्मविश्वास लौटा और बोले इन्हें सबक सिखाएंगे। अब कलेक्ट्रेट में चर्चा यही है कि अखबार डस्टबिन में गया, लेकिन कहानी बाहर निकलकर गलियारों में फैल गई।

थाना पाने की जुगत में घेराबंदी का यह कैसा खेल?

महकमे में इन दिनों एक थानेदार की चर्चा गलियारों से निकलकर चाय की टेबल तक पहुंच गई है। साहब फिलहाल लाइन में हैं, लेकिन सक्रियता ऐसी कि मानो थाना नहीं, पूरा नेटवर्क ही चल रहा हो। चर्चा है कि वे दूसरे थाना प्रभारियों की घेराबंदी के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि किसी तरह कुर्सी खाली हो और अगली बारी उनकी लगे।

महकमे के जानकारों के बीच यह भी कानाफूसी है कि साहब की नजदीकियां ऐसे कुछ लोगों से बताई जा रही हैं, जिनकी पहचान सामाजिक गतिविधियों से ज्यादा विवादों से जुड़ी रही है। इनमें सोशल मीडिया को दबाव बनाने और कथित ब्लैकमेलिंग का जरिया बनाने वाले चेहरे भी चर्चा में हैं। अब सवाल यह है कि लाइन में पड़े साहब आखिर इतनी सक्रियता क्यों दिखा रहे हैं? क्या यह महज संयोग है या थाना पाने की रणनीति? फिलहाल पुलिस महकमे में हर कोई चुप है, लेकिन बंद कमरों की चर्चाएं खूब गर्म हैं।

जनसुनवाई में पहुंची पार्षद, अधिकारी की टिप्पणी से बढ़ा सियासी तापमान

मामला थोड़ा पुराना जरूर है, लेकिन इसके किस्से अब जाकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हैं। बताया जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल की एक पार्षद अतिक्रमण से जुड़ी शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंचीं। इसी दौरान किसी ने सीएमओ को बताया कि ‘साहब, वे तो जनसुनवाई में हैं।Ó चर्चा है कि जवाब में सीएमओ की ओर से पार्षद को लेकर कथित तौर पर ‘आदतन शिकायतकर्ताÓ जैसी टिप्पणी कर दी गई।

बस फिर क्या था, बात जनसुनवाई के कमरे से निकलकर सीधे राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि उक्त टिप्पणी की जानकारी पार्षद तक भी पहुंच चुकी है और अब वे इसका जवाब देने की तैयारी में हैं। चर्चा यह है कि शिकायत लेकर पहुंची जनप्रतिनिधि को लेकर ऐसी टिप्पणी आखिर किस संदर्भ में की गई? मामला भले पुराना हो, लेकिन इसकी तपिश अब महसूस होने लगी है। देखना दिलचस्प होगा कि जवाब सिर्फ शब्दों में आता है या कार्रवाई की फाइल भी खुलती है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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