Betul Jansunwai: जनसुनवाई बनी औपचारिक, शिकायतों का समाधान कोसों दूर!

हर मंगलवार दूर-दराज से शिकायत लेकर पहुंचते हैं लोग, विभागीय उलझन में फाइलों में दब जाती हैं फरियादें
Betul Jansunwai: बैतूल। कलेक्टर कार्यालय में हर मंगलवार आयोजित होने वाली जनसुनवाई आम लोगों के लिए अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाने का माध्यम है, लेकिन कई मामलों में यह व्यवस्था महज औपचारिकता बनकर रह गई है।
दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग उम्मीद लेकर जनसुनवाई में पहुंचते हैं और अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद कार्रवाई की उम्मीद रहती है, लेकिन कई मामलों में बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाता। इससे फरियादियों को निराश होकर लौटना पड़ता है।

जनसुनवाई में कई ऐसी शिकायतें भी सामने आती हैं, जिनका संबंध एक से अधिक विभागों से होता है। ऐसी स्थिति में शिकायत का समाधान करने के बजाय विभागीय अधिकारी एक-दूसरे के विभाग की जिम्मेदारी बताकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। इससे फरियादी की समस्या जस की तस बनी रहती है और शिकायत कार्रवाई की प्रक्रिया में उलझकर रह जाती है।
विभाग एक-दूसरे पर डालते हैं जिम्मेदारी
शहर में अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतों के मामले में भी ऐसी स्थिति सामने आती है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की बात आने पर नगर पालिका की ओर से राजस्व विभाग से संबंधित मामला बताया जाता है, जबकि राजस्व विभाग की ओर से नगर पालिका की जिम्मेदारी बताई जाती है।
दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने से शिकायत का समाधान नहीं हो पाता। फरियादी एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर लगाते रहते हैं। शिकायत आगे बढ़ने के बजाय विभागीय प्रक्रिया में उलझ जाती है। आखिरकार कई शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाती हैं और जमीन पर समस्या का समाधान दिखाई नहीं देता।
सीएम हेल्पलाइन से भी नहीं मिल रही राहत
जनसुनवाई में शिकायत का समाधान नहीं होने पर कई लोग सीएम हेल्पलाइन का सहारा लेते हैं। लोगों को उम्मीद रहती है कि ऑनलाइन शिकायत के माध्यम से उनकी समस्या का निराकरण हो जाएगा, लेकिन यहां भी कई मामलों में शिकायतों के निपटारे को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में बिना वास्तविक समाधान के ही शिकायत का निराकरण दर्ज कर दिया जाता है। कुछ मामलों में अधिकारियों द्वारा शिकायतकर्ता से संपर्क कर शिकायत बंद कराने के लिए ओटीपी लेने की बात भी सामने आती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि समस्या का समाधान हुए बिना शिकायत बंद होने से उसकी परेशानी बरकरार रहती है।
कार्रवाई के बजाय कागजी खानापूर्ति
जनसुनवाई का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का समयबद्ध और प्रभावी समाधान करना है, लेकिन जब शिकायतें विभागीय जिम्मेदारियों के फेर में उलझ जाती हैं तो व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जरूरत इस बात की है कि जिस शिकायत में एक से अधिक विभाग शामिल हों, उसमें संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय कर जिम्मेदारी तय की जाए और फरियादी को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिले। तभी जनसुनवाई वास्तव में आम लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकेगी।




