Betul ki Khabar: राजनीतिक दबाव में पट्टों का हुआ सत्यापन!

प्रधानमंत्री आवास से जुड़े 14 हितग्राहियों की सूची पर हस्ताक्षर कराने का दावा, उपाध्यक्ष पति ने पत्रकार को ग्रुप से हटाया
Betul ki Khabar: शाहपुर। नगर परिषद शाहपुर में कथित फर्जी पट्टों और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब इस प्रकरण में आरोप सामने आया है कि तत्कालीन पटवारी पर राजनीतिक दबाव बनाकर नगर परिषद कार्यालय में 14 हितग्राहियों की सूची का सत्यापन कर हस्ताक्षर कराए गए। मामले को लेकर नगर में चर्चाओं का दौर तेज होता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पहले करीब 60 हितग्राहियों की सूची जारी हुई थी। इसके बाद 14 हितग्राहियों की एक अन्य सूची सामने आई। आरोप है कि तत्कालीन पटवारी इन नामों से जुड़े पट्टों के सत्यापन को लेकर सहमत नहीं थे।
इसके बाद उन्हें देर शाम नगर परिषद कार्यालय बुलाकर अध्यक्ष और कर्मचारियों की मौजूदगी में सूची पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया गया। आरोपों के अनुसार जब पटवारी बाद में हितग्राहियों के सत्यापन के लिए वार्ड में पहुंचे तो कई नाम नगर परिषद क्षेत्र के बजाय ग्राम पंचायत पलाशपानी से जुड़े मिले। बताया जा रहा है कि 9 में से 8 हितग्राही संबंधित नगर परिषद वार्ड में नहीं पाए गए। पट्टों में दर्शाई गई चतुर्सीमा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
टिप्पणी दर्ज करने से रोकने का आरोप
बताया गया है कि पटवारी ने प्रधानमंत्री आवास और पट्टा प्रकरण में अपनी टिप्पणी दर्ज करने की बात कही थी। आरोप है कि नगर परिषद अध्यक्ष रोहित के नायक द्वारा उन्हें ऐसा करने से मना किया गया और राजनीतिक दबाव बनाकर पट्टों से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
संवाददाता को व्हाट्सएप ग्रुप से हटाने पर सवाल
इधर पिछले चार दिनों से पट्टा और प्रधानमंत्री आवास प्रकरण से जुड़ी खबरें प्रकाशित होने के बाद नगर परिषद में हलचल है। सोमवार को संवाददाता द्वारा खबर व्हाट्सएप ग्रुप हमारा नगर परिषद शाहपुर में साझा करने के बाद उपाध्यक्ष पम्मी राठौर के पति दिनेश राठौर द्वारा उन्हें ग्रुप से हटाए जाने का मामला भी चर्चा में है।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हितग्राही नगर परिषद सीमा के बजाय ग्राम पंचायत पलाशपानी क्षेत्र के थे तो उन्हें नगर परिषद द्वारा पट्टे किस आधार पर दिए गए? दस्तावेजों का विधिवत सत्यापन हुआ या नहीं, अब इसकी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों से जवाब की मांग तेज होती जा रही है।




